शहबाज ने अमेरिका के सामने फिर फैलाए हाथ, कश्मीर पर मध्यस्थता के ऑफर का किया स्वागत

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह कश्मीर विवाद का समाधान खोजने के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं, जिसे उन्होंने 'हज़ार साल' से चल रहा मुद्दा बताया.

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कश्मीर पर अमेरिका की मध्यस्थता चाहता है पाकिस्तान कश्मीर पर अमेरिका की मध्यस्थता चाहता है पाकिस्तान

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2025,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST

भारत का ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है, जिसकी तहत भारतीय सेनाएं पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं. भारत ने 7 मई से पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ जैसी कार्रवाई की है, उसके बाद पड़ोसी मुल्क के होश उड़ चुके हैं. पाकिस्तान सीमापार से गोलीबारी करके बेकसूर नागरिकों को निशाना बना रहा है. लेकिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान में हवाई हमले कर उसके सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया है, जिसके बाद पड़ोसी मुल्क की कमर टूट चुकी है.

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भारत ने शर्तों पर किया सीजफायर

भारत ने अपनी शर्तों पर पाकिस्तान के साथ सीजफायर किया है और साफ कर दिया है कि उकसावे की किसी कार्रवाई का उसी की जुबान में जवाब दिया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच सीजफायर होने पर खुशी जाहिर की है. अमेरिके के उपराष्टपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेतत्व से बातचीत की है. इसके बाद भारत अपनी शर्तों पर पाकिस्तान के साथ सीजफायर करने को राजी हुआ है.

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उधर, पाकिस्तान ने रविवार को कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऑफर का स्वागत किया है. इस्लामाबाद ने इसे एक लंबा विवाद बताया, जिसका दक्षिण एशिया और उससे आगे शांति और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. हालांकि भारत कश्मीर के मुद्दे पर किसी भी तरह की मध्यस्थता को स्वीकार न करने के अपने पुराने रुख पर कायम है. भारत का साफ तौर पर मानना है कि यह दो देशों के बीच का मुद्दा है और इस मसले पर किसी भी तीसरे की दखल मंजूर नहीं है.

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कश्मीर पर मध्यस्थता का ऑफर

इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह कश्मीर विवाद का समाधान खोजने के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं, जिसे उन्होंने 'हज़ार साल' से चल रहा मुद्दा बताया. ट्रंप की यह टिप्पणी उनके उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम समझौता करवाया है.

सीजफायर वार्ता में 'अमेरिका की ओर से निभाई गई भूमिका' की सराहना करते हुए पाकिस्तान सरकार ने एक बयान में कहा, 'हम राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से जम्मू और कश्मीर विवाद के समाधान के लिए प्रयासों का समर्थन करने की इच्छा जताने की भी सराहना करते हैं, यह एक लंबा मुद्दा है जिसका दक्षिण एशिया और उसके बाहर शांति और सुरक्षा पर गहरा असर है.'

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इस्लामाबाद ने आगे जोर देकर कहा, 'सरकार फिर से दोहराती है कि जम्मू और कश्मीर विवाद का कोई भी न्यायसंगत और स्थायी समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के मुताबिक होना चाहिए और कश्मीरी लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.' सोशल मीडिया पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध विराम पर सहमति जताने के लिए पाकिस्तान की तारीफ की और इसे 'ऐतिहासिक और साहसी फैसला' बताया और समझौते को संभव बनाने में अमेरिका की भूमिका पर गर्व जताया.

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फिर गिड़गिड़या पाकिस्तान

उन्होंने कहा, 'इसके अलावा मैं आप दोनों के साथ मिलकर यह देखने के लिए काम करूंगा कि क्या 'हज़ार साल' के बाद कश्मीर के मामले में कोई समाधान निकाला जा सकता है. भगवान भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व को उनके अच्छे काम के लिए आशीर्वाद दें!!!'. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के समझौते के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापक मुद्दों- जिनमें कश्मीर, जल बंटवारा और अन्य विवादास्पद मामले शामिल हैं, का भी समाधान किया जाना चाहिए.

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एक हैरान करने वाले घटनाक्रम में, भारत और पाकिस्तान ने शनिवार को दोनों देशों के बीच आगे और तनाव को रोकने के लिए एक समझौता किया, जो 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले, भारत के जवाबी ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद ड्रोन हमलों के जरिए पाकिस्तान की ओर से उकसावे की कार्रवाई से पैदा तनाव के बाद हुआ. हालांकि, घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर, पाकिस्तानी सेना ने शनिवार रात को नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन हमले और गोलाबारी जारी रखते हुए समझौते का उल्लंघन किया. भारत ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इस्लामाबाद से जिम्मेदारी से काम करने का आग्रह किया है.

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