नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर के निमंत्रण पर 5 से 7 जून तक भारत की यात्रा करेंगे. खनाल का यह दौरा नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा संसद में दिए गए बयान से उपजे विवाद के बीच हो रहा है.
शाह ने 31 मई को कहा था कि भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर चर्चा के अलावा, काठमांडू चीन और ब्रिटेन के साथ भी संपर्क में है. वहीं, भारत ने नेपाल के साथ सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्पष्ट रूप से खारिज किया है.
खनाल की भारत यात्रा की तारीखों की घोषणा करते हुए, नेपाल सरकार ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि वे नई दिल्ली में जयशंकर के साथ औपचारिक बैठक करेंगे. बयान में कहा गया है, दोनों पक्ष व्यापार, निवेश, संपर्क, ऊर्जा और जन-संबंधों सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से पारस्परिक हित के मामलों पर चर्चा करेंगे.
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा यह दौरा नेपाल और भारत के बीच स्थायी और बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा. प्रधानमंत्री शाह की सरकार के मार्च में सत्ता संभालने के बाद से यह भारत में किसी मंत्री की पहली यात्रा होगी.
रबी लामिछाने से की PM मोदी ने मुलाकात
नेपाल के नेताओं ने परंपरागत रूप से नई दिल्ली के साथ शीघ्र संपर्क को महत्व दिया है, जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच घनिष्ठ राजनीतिक, आर्थिक और जन-संबंधों को दर्शाता है. इस हफ्ते की शुरुआत में, नेपाल की सत्ताधारी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने नई दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.
बुधवार को हुई बैठक के बाद मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, नेपाल हमारी 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत एक प्राथमिकता वाला साझेदार है और हम दोनों देशों के बीच विशेष और बहुआयामी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए नई सरकार के साथ सहयोग करने के लिए तत्पर हैं.
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