इंडिया कॉकस के हेड माइक वॉल्ट्ज होंगे ट्रंप के नए NSA, चीन के रहे हैं कट्टर आलोचक

अमेरिकी सीनेट में इंडिया कॉकस के प्रमुख माइक वॉल्ट्ज चीन के कट्टर आलोचक हैं और देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के ट्रंप के वादों के पुरजोर हिमायती हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ माइक वॉल्ट्ज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ माइक वॉल्ट्ज

रोहित शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:13 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज कर चुके डोनाल्ड ट्रंप धीरे-धीरे अपनी टीम का गठन करने में जुटे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने माइक वॉल्ट्ज को अपना राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया है. 

अमेरिकी सीनेट में इंडिया कॉकस के प्रमुख वॉल्ट्ज अमेरिका की मजबूत डिफेंस स्ट्रैटेजी की वकालत करते हैं. वह देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के ट्रंप के वादों के पुरजोर हिमायती हैं. माइक वॉल्ट्ज रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे युद्ध के बीच अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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माइक वॉल्ट्ज ने 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान कैपिटल हिल में उनके ऐतिहासिक भाषण की व्यवस्था कराने में भी अहम भूमिका निभाई थी. बता दें कि सीनेट के इंडिया कॉकस मे कुल 40 सदस्य हैं. इसका गठन 2004 में न्यूयॉर्क की तत्कालीन सीनेटर हिलेरी क्लिंटन और सीनेटर जॉन कॉर्निन ने किया था. यह सीनेट में सबसे बड़ा कॉकस है.

बता दें कि वॉल्टज राष्ट्रपति जो बाइडेन सरकार की अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों की रवानगी के फैसले की पुरजोर आलोचना करते रहे हैं. उनकी संभावित नियुक्ति से चीन को लेकर अमेरिका के रुख में बड़ा बदलाव हो सकता है.

कौन हैं माइक वॉल्ट्ज?

50 साल के माइक आर्मी नेशनल गार्ड के रिटायर्ड अधिकारी हैं. वह तीन बार संसद में फ्लोरिडा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वह हाउस आर्म्ड सर्विसेज सबकमेटी के चेयरमैन रहे हैं. साथ ही सदन की विदेश मामलों की समिति के भी मेंबर रहे हैं.

माइक के पास मिलिट्री वेटेरन के तौर पर व्यापक अनुभव है. उन्होंने वर्जीनिया मिलिट्रई इंस्टीट्यूट से ग्रैजुएशन किया है और फ्लोरिडा गार्ड से जुड़ने से पहले चार सालों तक सेना में सेवाएं दी थीं. वह अफगानिस्तान, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में युद्ध के मोर्चे पर जा चुके हैं. वह पेंटागन में नीति सलाहाकर के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं.

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मालूम हो कि ट्रंप ने 2016 में अपने पहले कार्यकाल में चार एनएसए बदले थे. इनमें से पहले एनएसए तो सिर्फ 22 दिन ही पद पर रह पाए थे. लेफ्टिनेंट जनरल एच.आर. मैकमास्टर और जॉन बोल्टन समेत बाकी सलाहकारों को ट्रंप ने कुछ नीतिगत मुद्दों पर मतभेदों के चलते हटा दिया था. ट्रंप के आखिरी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन कोविड-19 महामारी और 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल पर हुए दंगे के दौरान इस पद पर बने रहे थे.

वहीं, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी के राजदूत पद के लिए एलिस स्टेफैनिक का चुनाव किया है. एलिस की कट्टर समर्थक हैं. इससे पहले ट्रंप ने सुजन उर्फ सूजी विल्स को व्हाइट हाउस का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया था. जानकारी के मुताबिक वह व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ बनने वाली पहली महिला होंगी. जनवरी में संभावित शपथ ग्रहण से पहले विल्स की नियुक्ति ट्रंप का पहला बड़ा फैसला है.

टॉम होमन को बनाया था बॉर्डर जार

डोनाल्ड ट्रंप ने इमिग्रेशन और कस्टम एनफोर्समेंट (ICE) के पूर्व प्रमुख टॉम होमन को बॉर्डर जार नियुक्त किया है. आक्रामक बॉर्डर एनफोर्समेंट के समर्थक होमन सीनेट दक्षिणी और उत्तरी दोनों सीमाओं के साथ ही समुद्री और विमानन सुरक्षा की देखरेख करेंगे. इसके अलावा वे निर्वासन का कामकाज भी देखेंगे. 

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