दिल्ली: जनकपुरी में सेंट्रो की टक्कर से मासूम की मौत, 'मदद' की बजाय तमाशबीन बने रहे लोग

दिल्ली के जनकपुरी में एक तेज रफ्तार कार की टक्कर से ई-रिक्शा पलट गया, जिससे 6 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई और उसकी नानी घायल हो गईं. परिजनों ने राहगीरों पर मदद न करने का आरोप लगाया है.

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दिल्ली में लापरवाही और रफ्तार ने ली 6 साल की छात्रा की जान (Representative image) दिल्ली में लापरवाही और रफ्तार ने ली 6 साल की छात्रा की जान (Representative image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:08 AM IST

राजधानी मे रफ़्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा द्वारका के बाद वेस्ट दिल्ली के जनकपुरी इलाके में कार की टक्कर की वजह से एक मासूम छात्रा की जान चली गई. यह हादसा 17 फरवरी को सुबह हुआ जब बच्ची अपनी नानी के साथ ई-रिक्शा से स्कूल जा रही थी.

इस दौरान पीछे से आ रही तेज रफ्तार सेंट्रो ने टक्कर मार दी.  घायल बच्ची को पहले जनकपुरी के माता चनन देवी हॉस्पिटल में ले जाया गया. उसके बाद वहां से उसे मैक्स हॉस्पिटल द्वारका शिफ्ट किया गया. इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई.

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पुलिस ने पोस्टमार्टम करने के बाद बच्ची की बॉडी को परिजनों को सौंप दी. डीसीपी शरद भास्कर ने पुष्टि करते हुए बताया कि मृतक बच्ची की दादी के बयान पर मामला दर्ज किया गया.

तमाशबीन बने रहे लोग

यह हादसा 17 फरवरी सुबह 7:40 पर हुआ. मृतका अपनी नानी के साथ ई रिक्शा से जा रही थी. टक्कर लगने से ई-रिक्शा पलट गया और दादी पोती दोनों घायल हो गई थी. पुलिस ने इस मामले में कार को जब्त कर लिया और आरोपी संजीव को हिरासत में ले लिया गया. वह माजरा डबास का रहने वाला है.

यह भी पढ़ें: द्वारका: सड़क हादसे में मारे गए साहिल को विदेश भेजना चाहती थी मां, दोस्त ने मांगा इंसाफ

मृतक बच्ची की नानी ने बताया, 'मैं अपनी बच्ची के साथ ई रिक्शा से स्कूल के लिए निकली ई रिक्शा बहुत आराम से जा रहा था कर वाले ने अचानक टक्कर मारी तीनों नीचे गिर गए. हमारी बच्ची खून से लथपथ हो गई.  मैंने वहां खड़े एक कार चालक से उसे अस्पताल ले जाने की भीख मांगी, लेकिन वह मदद करने के बजाय भाग गया. अब सड़क पर जाने में डर लगता है.'  

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वहीं बच्ची की मां ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद लोग वहां पर जा रहे थे किसी ने मदद नहीं की. बच्ची की मां, जो खुद एक अस्पताल में काम करती हैं, ने रोते हुए बताया कि लोग जमा थे लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आया. अंत में अस्पताल की ही एक नर्स ने बच्ची को इलाज के लिए पहुंचाया.

ई-रिक्शा सुरक्षा पर उठते सवाल
इस हादसे ने दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा की सुरक्षा पर फिर से बहस छेड़ दी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 2 लाख से अधिक ई-रिक्शे पंजीकृत हैं, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई ई-रिक्शे बिना पंजीकरण, बिना प्रशिक्षण और ओवरलोड होकर चलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है.

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