इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया. वहीं, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी दीं. ईरान के बाद यमन और लेबनान ने भी इजरायल पर अटैक कर दिया. आइए जानते हैं इस जंग को लेकर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है.
विदेश मामलों के जानकार वईल अव्वाद ने कहा, 'अगर अब ये जंग शुरू हो गई है तो ये खत्म नहीं होने वाला है. ईरान ने खुद कह दिया है कि तुमने शुरू किया था और अब हम खत्म करेंगे. इसका मतलब है कि ईरान पूरी तैयारी में है.'
खामेनेई के घर के पास 7 मिसाइलें गिरने को लेकर उन्होंने कहा, 'अभी तक अमेरिका और इजरायल का मुद्दा रेजिम चेंज ही रहा है. वो ईरान की सरकार बदलना चाहते हैं. लेकिन ईरान खुद भी जवाब देने के लिए तैयार है.'
इजरायल और ईरान की जंग 'गंभीर मुद्दा'
इजरायल और ईरान की जंग और इसमें दुनिया के दूसरे देशों की एंट्री को रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड मेजर विशंबर दयाल ने 'गंभीर मुद्दा' बताया. उन्होंने कहा, 'इतनी जल्दी न तो चीन और न ही रूस इस जंग में शामिल होगा. शायद ईरान की मुहिम थी कि वो रूस और चीन से कुछ एंटी एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दें. शायद ऐसा नहीं हो सका, वरना ये मिसाइलें आज हार जातीं. उनके पास मिसाइल S3100 हैं जिसे ये मिसाइलें बीट कर सकती हैं, इसीलिए ये मिसाइलें आज एक्टिव हुई हैं.'
पहले से ईरान को थी हमले की आशंका?
दयाल ने आगे कहा, 'काफी दिन से ईरान में बिजनेस बंद था, लोग घरों में बंद थे और तेहरान में भी कोई हलचल नहीं थी. तो मतलब है कि लोग उम्मीद कर रहे थे कि किसी तरह का हमला होगा. ये हमला हमें 1939 की याद दिलाता है. ट्रंप बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन आप ग्लोबल सिचुएशन भी तो देखिए, ये ऐसा हमला है जिसकी जरूरत नहीं थी. ईरान के फॉरेन सेक्रेटरी, अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट से मिले और उनसे वादा किया कि आप जो कह रहे हैं, वो हमारे पास नहीं है.'
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'सीरिया-ईराक जैसे देशों की ये 50 साल की रणनीति...'
एक्सपर्ट ने कहा, 'परमाणु बम पर ईरान इससे पहले इतना कभी नहीं झुका था. आप एक तरफ सौदा कर रहे हो, दूसरी तरफ हमला कर रहे हो, तो आपका इरादा सिर्फ परमाणु तबाह करने का बहाना है. सीरिया-ईराक जैसे देशों की ये 50 साल की रणनीति है, जिसमें पता नहीं किस-किसकी बारी होगी. पहले सोवियत यूनियन की बारी थी, युगोस्लाविया की बारी थी, इराक की बारी थी. अब ईरान की बारी है.'
डोनाल्ड ट्रंप की ईरानी मिसाइल ठिकानों को बर्बाद करने की धमकी पर रक्षा विशेषज्ञ ने रिटायर्ड AVM पीके श्रीवास्तव ने कहा, 'ये बिल्कुल आसान नहीं है. जहां तक एयर डिफेंस का संबंध है, उसके लिए आपके पास ऐसा एआई इनेबल्ड सिस्टम होना चाहिए या इलेक्ट्रोनिक मीडिया होना चाहिए जो सारे हथियारों को संचालित करे. जैसे हमारे पास IACCS और आकाशसील, ये दोनों वहां मौजूद नहीं है. ऐसे में एयर डिफेंस करना बहुत मुश्किल है ईरान के लिए.'
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