'भयावह संकट आने वाला है', सऊदी-कतर-यूएई के गैस ठिकानों पर हमलों से डरी पूरी दुनिया

इजरायल ने बुधवार रात ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया. बदले में ईरान ने खाड़ी के कई ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं. इन हमलों से सऊदी, यूएई, कतर और कुवैत के गैस ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है.

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साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान खाड़ी देशों पर बड़े हमले कर रहा है (Photo: Reuters/AP/ITG) साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान खाड़ी देशों पर बड़े हमले कर रहा है (Photo: Reuters/AP/ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST

बुधवार रात इजरायल ने कथित रूप से अमेरिकी मदद से दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड ईरान के साउथ पार्स पर हमला कर दिया. इस हमले से बौखलाए ईरान ने खाड़ी के देशों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. ईरान खाड़ी देशों के गैस ठिकानों पर हमले कर रहा है जिसका सबसे अधिक नुकसान कतर को हुआ है.

ईरानी शासन ने चेतावनी दी है कि उसके सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स के प्रोडक्शन सेंटर पर हुए इजरायली हमले को वो 'पूर्ण आर्थिक युद्ध' मानता है. साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड है जिसे ईरान और कतर साझा करते हैं. यह दोनों खाड़ी देशों के बीच समुद्र में स्थित है और कतर के विशाल नॉर्थ फील्ड का विस्तार माना जाता है.

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साउथ पार्स पर हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान इलाके को निशाना बनाया, जहां लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की रिफाइनरी के मुख्य ठिकाने हैं. कतर की सरकारी गैस कंपनी के अनुसार, ईरान के हमले से समुद्री मार्ग से गैस आपूर्ति करने वाली दुनिया के सबसे बड़े गैस सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है.

पूरी ग्लोबल सप्लाई पर बढ़ेगा संकट 

कतर की सरकारी तेल-गैस कंपनी कतरएनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) साद अल-काबी के मुताबिक, 'ईरान के हमले में गैस रिफाइनरियों को इतना नुकसान हुआ है जिसे ठीक करने में पांच साल लग सकते हैं. इस वजह से चिंता बढ़ गई है कि ग्लोबल गैस सप्लाई का संकट लंबे समय तक बना रह सकता है.'

अल-काबी ने कहा, 'मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि रमजान के महीने में एक मुस्लिम देश हम पर इस तरह हमला करेगा.'

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कतर सरकार ने पुष्टि की कि ईरान की ओर से दागी गई पांच बैलिस्टिक मिसाइलों में से चार को रोक लिया गया, लेकिन एक मिसाइल रास लाफान औद्योगिक परिसर पर गिरी, जो देश के गैस निर्यात का मुख्य केंद्र है.

सरकारी प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना 'ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी, क्षेत्र के लोगों और पर्यावरण के लिए खतरा' है.

एशियाई देश सबसे अधिक गैस कतर से खरीदते हैं

पिछले साल कतर की गैस सप्लाई वैश्विक LNG बाजार का लगभग पांचवां हिस्सा थी, जिसमें से करीब 80% एशिया के विकासशील देशों को भेजी गई. अगर इसका निर्यात लंबे समय तक बाधित होता है, तो दुनिया भर में गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है.

साउथ पार्स हमले के बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने चेतावनी दी अब उसका हक है कि वो सऊदी अरब, यूएई और कतर के कई प्रमुख तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाए.

इन संभावित लक्ष्यों में सऊदी अरब की यनबू के पास स्थित सैमरेफ रिफाइनरी, जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई का अल-होसन गैस क्षेत्र और कतर का मेसाईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं.

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को सैमरेफ रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की पुष्टि की और यनबू की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराने का दावा किया. यनबू, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच सऊदी कच्चे तेल के निर्यात का अहम केंद्र है.

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ईरान के हमले में कुवैत की रिफाइनरी में लगी आग 

कुवैत की मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्ला रिफाइनरियों को भी ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिससे वहां आग लग गई.

कुवैत की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने राष्ट्रीय तेल कंपनी के हवाले से बताया कि 'दुश्मन के कई ड्रोन हमलों' ने मीना अल-अहमदी रिफाइनरी को निशाना बनाया, जिससे आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

रिपोर्ट में कहा गया कि दमकलकर्मी आग पर काबू पाने में जुटे हैं और रिफाइनरी की कई यूनिट्स को बंद कर दिया गया है. इससे पहले कुवैत सेना के एक बयान में कहा गया था कि एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन मिसाइल और ड्रोन खतरों का जवाब दे रहा है.

दुनिया के सबसे बड़े गैस प्रोसेसिंग ठिकानों में से एक यूएई के हबशन गैस कॉम्प्लेक्स को भी ईरान ने टार्गेट किया. एयर डिफेंस ने मिसाइल को इंटरसेप्ट कर दिया लेकिन मलबा गिरने से उत्पादन बंद करना पड़ा है. यूएई की सरकारी तेल और गैस कंपनी ADNOC ने बताया कि उसके बाब ऑयलफील्ड को भी निशाना बनाया गया.

भयावह संकट में दुनिया, भारत पर भी असर!

इन हमलों के बाद गैस बाजार में तेज उछाल आया और यूरोपीय बेंचमार्क कीमतें 30% तक बढ़ गईं, जो 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है.

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कंसल्टेंसी MST Marquee के रिसर्च प्रमुख सॉल कावोनिक ने ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' से बात करते हुए कहा, 'हम अब एक भयावह गैस संकट की स्थिति की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. युद्ध खत्म होने के बाद भी एलएनजी सप्लाई में बाधा महीनों या यहां तक कि सालों तक बनी रह सकती है. इस कारण गैस की कीमतें ऊपर ही बनी रहेंगी.'

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद पहले से दबाव में चल रहे वैश्विक तेल बाजार में अब और चिंता बढ़ गई है. विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें जल्द ही 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं.

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के गैस ठिकानों पर और हमलों के खिलाफ ईरान को चेतावनी दी है और कहा है कि ऐसा हुआ तो साउथ पार्स गैस फील्ड को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा.

भारत LNG की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से कतर पर निर्भर है. कतर का उत्पादन रुकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से सप्लाई चेन बाधित हो रही है. भारत सालाना LNG का 1.4 करोड़ टन से ज्यादा आयात करता है, और LPG का 80-85% गल्फ (कतर, सऊदी आदि) से आता है. मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात भारत के लिए और मुश्किलें पैदा करने वाले हैं.

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