ट्रंप के अफसरों के फूले हाथ-पांव... क्या डेडलाइन खत्म होने से पहले कुछ बड़ा होगा?

ईरान को लेकर तय समय सीमा खत्म होने से पहले अमेरिका में हलचल तेज हो गई है. व्हाइट हाउस के भीतर दबाव बढ़ता जा रहा है और बातचीत आखिरी दौर में पहुंच चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि हालिया प्रस्ताव उम्मीद से बेहतर है, लेकिन अभी भी सहमति का इंतजार है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की डेडलाइन पर टिकी दुनिया की नजर, अगले कुछ घंटे बेहद अहम. (File Photo: ITG) अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की डेडलाइन पर टिकी दुनिया की नजर, अगले कुछ घंटे बेहद अहम. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली/वाशिंगटन,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:28 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डेडलाइन से पहले अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई है. व्हाइट हाउस में दबाव बढ़ गया है और अधिकारी हर हाल में समय सीमा से पहले समझौता करने की कोशिश में जुटे हैं. प्रस्ताव में सुधार के साथ बातचीत जारी है. अगले कुछ घंटे बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं.

एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अब पूरी कोशिश इस बात पर केंद्रित है कि क्या हम आज रात 8 बजे तक वहां पहुंच सकते हैं. इससे साफ है कि बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और हर मिनट अहम हो गया है. हाल ही में मिला प्रस्ताव पूरी तरह वैसा नहीं है जैसा अमेरिका चाहता था, लेकिन यह उम्मीद से कहीं बेहतर है. 

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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बेहतर प्रस्ताव मिलने की वजह से बातचीत को आगे बढ़ाने की इच्छा दोनों पक्षों में बनी हुई है. इस प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रस्ताव मिलने के बाद मध्यस्थों ने ईरान के साथ मिलकर उसमें संशोधन और नया मसौदा तैयार करने का काम शुरू कर दिया. समझौते की दिशा में कोशिशें लगातार जारी हैं.

अमेरिकी अधिकारी ने यह भी कहा कि बातचीत रुकने वाली नहीं है. पिछले हफ्ते जिनेवा में हुई चर्चा के बाद अब इस हफ्ते इस्लामाबाद में बैठक की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा दोनों देशों की टीमों के बीच पाकिस्तान सहित अन्य मध्यस्थों के साथ वर्चुअल मीटिंग पर भी विचार हुआ है. बातचीत अगले कुछ घंटों तक जारी रह सकती है. 

गौरतलब है कि अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान लगातार मध्यस्थता की कोशिश में लगा हुआ है. कुछ दिन पहले ही उसने सऊदी अरब सहित तीन देशों के साथ इस्लमाबाद में एक मीटिंग की थी. इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार चीन गए थे. वहां पर ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर चर्चा हुई थी.
 
इस दौरान दोनों देशों ने पांच सूत्रीय प्रस्ताव तैयार किया था. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस पर गौर करने से इनकार कर दिया था. इसी बीच मंगलवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती से बातचीत की है.दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात पर चर्चा की है और तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया है.

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उधर, अमेरिका की सख्त चेतावनियों के बीच ईरान ने भी खुलकर पलटवार की रणनीति सामने रख दी है. हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि यदि एक कदम भी आगे बढ़ा, तो पूरा मिडिल ईस्ट इसकी चपेट में आ सकता है. ईरान ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि उसके पावर प्लांट पर हमला हुआ, तो वह चुप नहीं बैठेगा. 

तेहरान ने मिडिल ईस्ट के अहम पुलों को निशाने पर लेने की चेतावनी दी है. ईरान ने आठ बड़े पुलों की एक सूची तैयार की है, जिन्हें संभावित हमले के लिए चिन्हित किया गया है. इस लिस्ट में कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह सी ब्रिज सबसे ऊपर है. इसके अलावा यूएई के शेख जाएद ब्रिज, अल मक्ता ब्रिज और शेख खलीफा ब्रिज भी निशाने पर हैं. 

सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे भी ईरान की हिट लिस्ट में शामिल बताया जा रहा है. वहीं जॉर्डन के किंग हुसैन ब्रिज, दामिया ब्रिज और अब्दौलन ब्रिज को भी संभावित टारगेट माना गया है. ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह सिर्फ पुलों तक सीमित नहीं रहेगा. 

इजरायल के परमाणु केंद्रों और मिडिल ईस्ट की रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया जा सकता है. इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियों के दफ्तर भी हमले की जद में आ सकते हैं. बताया जा रहा है कि इस तरह के हमलों के जरिए ईरान अमेरिका को सीधा संदेश देना चाहता है कि उसकी मिसाइल क्षमता को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

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तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी ईरान ने सख्त रुख अपनाया है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा है कि किसी भी तरह के अस्थायी सीजफायर के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान किसी दबाव या समय-सीमा के आधार पर कोई फैसला नहीं करेगा.

होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे टकराव का सबसे अहम बिंदु बनता जा रहा है. यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. मौजूदा हालात में यहां 3000 से ज्यादा जहाज फंसे होने की खबर है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग पर ट्रैफिक में करीब 94 फीसदी तक गिरावट आ चुकी है.

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