'शर्तें पूरी न होने पर नहीं होगा अंतिम समझौता, रिमोटली साइन होगी डील', ईरान की अमेरिका को दोटूक

अमेरिका के साथ जारी परमाणु कूटनीति के बीच ईरान ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि अगर तय शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर बिल्कुल नहीं किए जाएंगे और यह पूरी डील वर्चुअली यानी दूर बैठकर साइन हो सकती है.

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US ने नहीं मानी शर्तें तो नहीं होगा समझौता. (photo: ITG) US ने नहीं मानी शर्तें तो नहीं होगा समझौता. (photo: ITG)

aajtak.in

  • तेहरान,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:20 AM IST

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता आगे तभी बढ़ेगी, जब अंतरिम समझौते (Memorandum of Understanding) को लागू किया जाए. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समझौते की शर्तें पूरी नहीं की गईं तो ईरान अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा. उन्होंने बताया कि इस कूटनीतिक मसौदे पर अंतिम फैसला ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) में सामूहिक रूप से लिया जाएगा और इसे मंजूरी मिलने की स्थिति में समझौते को रिमोटली यानी दूर बैठकर ही डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षरित किया जाएगा.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) को दिए साक्षात्कार में अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अंतरिम समझौते को लागू करने की अनिवार्य शर्त रखी है.

उन्होंने इंटरव्यू में कहा, अंतरिम (शुरुआती) समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद हम अमेरिका को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए 60 दिन का वक्त देंगे. इस दौरान या तो हम समझौते पर पहुंच सकते हैं या सीजफायर बढ़ा सकते हैं, लेकिन अगर 60 दिन बाद भी शर्तें पूरी नहीं हुईं तो स्थिति पहले जैसी हो सकती है.

IRIB ने ईरानी विदेश मंत्री के हवाले से कहा, 'अगर समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रावधानों को पूरा नहीं किया गया, तो अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे.'

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'रिमोटली साइन होगा समझौता'

अरागची ने ये भी कहा कि समझौते के मसौदे पर फैसला ईरान की 'सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद' (SNSC) में सामूहिक रूप से लिया जाएगा और अगर इसे मंजूरी मिलती है तो समझौते पर दूर से (रिमोटली) हस्ताक्षर किए जाएंगे.

उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि ईरान को इसे लागू करने में चुनौतियों की उम्मीद है और आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारी शायद डील का पूरी तरह पालन न करें, क्योंकि वादाखिलाफी करना अमेरिकी राजनेताओं की फितरत रही है. ईरान ये अच्छी तरह जानता है कि उसका सामना ऐसे लोगों से है जो पूरी तरह समझौते के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं. यही वजह है कि ईरान उनकी किसी भी संभावित गैर-अनुपालन की कोशिश को रोकने के लिए सारे लूपहोल्स (कमियों) को पहले ही पूरी तरह बंद कर देगा.

उन्होंने IRIB से कहा, 'हम अपनी सुरक्षा की गारंटी के लिए सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र या अंतर-क्षेत्रीय गठबंधनों पर निर्भर नहीं हैं. हमारा भरोसा केवल ईश्वर, हमारी जनता और हमारी अपनी सशस्त्र सेनाओं पर है.'

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दो चरणों में होगा समझौता

IRIB के अनुसार, आरघची ने बताया कि ईरान-अमेरिका के बीच दो चरणों में समझौता होगा. पहले चरण में परमाणु मुद्दे पर चर्चा नहीं गई है. इसको दूसरे चरण के लिए स्थगित कर दिया गया है.

आईआरआईबी  से बातचीत के दौरान अराघची ने दावा किया कि समझौते में  सबसे पहले जिस बात का जिक्र किया गया है, वो ये है कि होर्मुज से अमेरिकी नौसैनिक की नाकेबंदी हटाई जाए. उन्होंने होर्मुज से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भविष्य अतीत जैसा नहीं होगा और संकेत दिया कि ईरान और ओमान जल्द ही इसके प्रबंधन पर एक संयुक्त बयान जारी करेगा.

'हिज्बुल्लाह नहीं छोड़ेंगे अकेला'

उन्होंने लेबनान में हिज्बुल्लाह का साथ न  छोड़ने की बात करते हुए कहा, हम लेबनान में हिज्बुल्लाह को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे और लेबनान में युद्ध खत्म करना हमारे सभी मोर्चे में शामिल है. 

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