खामेनेई का जनाजा उठा, होर्मुज में बम फूटा... क्या फिर शुरू हो जाएगा US-ईरान युद्ध?

मिडिल ईस्ट में हर बड़ा घटनाक्रम सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता. ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ता है. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र में होने वाली हर सैन्य गतिविधि पर दुनिया की नजर रहती है.

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पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के बीच होर्मुज में मिसाइल हमला, US-ईरान के बीच तनाव बढ़ा. (Photo: Reuters) पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के बीच होर्मुज में मिसाइल हमला, US-ईरान के बीच तनाव बढ़ा. (Photo: Reuters)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:25 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बावजूद वेस्ट एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है. होर्मुज स्ट्रेट के पास दो जहाजों पर हुए मिसाइल हमले ने पूरे क्षेत्र में नई चिंता पैदा कर दी है. यह हमला ऐसे समय हुआ, जब ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चल रहा था.

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कतर ने होर्मुज के पास अपने तेल टैंकर पर हुए हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं ईरान का दावा है कि टैंकर ने उसकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया था. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है. दोनों के बीच हुई पीस डील खतरे में है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति ने 17 जून को शांति समझौते के एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे. दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना गया था. हालांकि, समझौते के बाद भी दोनों देशों के बीच कई दौर के सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई हुई. 

पहले होर्मुज में जहाज को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया. करीब 48 घंटे तक चले इस सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए. 

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इसके बाद में अली खामेनेई के अंतिम संस्कार तक हमले रोकने और बातचीत को एक सप्ताह के लिए स्थगित करने का फैसला किया गया. लेकिन अंतिम संस्कार के दौरान ही होर्मुज में दोबारा मिसाइल हमला होने से पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने बयान जारी किया है.

उन्होंने कहा कि होर्मुज के पास कतरी टैंकर 'अल रेकाय्यात' को निशाना बनाया जाना अंतरराष्ट्रीय नौवहन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर अस्वीकार्य हमला है. उन्होंने कहा कि इस हमले और इसके सभी परिणामों के लिए कतर कानूनी रूप से ईरान को जिम्मेदार मानता है. ईरान के सरकारी मीडिया का दावा अलग है.

IRIB के मुताबिक, जिस तेल टैंकर को निशाना बनाया गया, उसने अमेरिकी नौसेना की मदद से ओमान के रास्ते आगे बढ़ने की कोशिश की थी. इसमें कहा गया कि ईरानी सेना ने कई बार टैंकर को चेतावनी दी थी. चेतावनी नहीं मानने के बाद कार्रवाई की गई. होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को नियमों का पालन करना होगा. 

ट्रंप की धमकी के बाद बढ़ी हलचल

यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में भी कार्रवाई जारी रहेगी. हमले से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि या तो दोनों देशों के बीच समझौता होगा या फिर अमेरिका पूरी कार्रवाई करेगा. अमेरिका ईरान के बड़े ऊर्जा संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है.

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ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता समझौता है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. उनकी चेतावनी के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बगेर ज़ोलघाद्र ने ट्रंप के बयान पर पलटवार किया था.

ईरान ने ट्रंप को दी सीधी चेतावनी

उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति को 9.1 करोड़ ईरानियों को धमकी देने के बजाय सम्मान के साथ बात करनी चाहिए. यदि अमेरिका धमकियों की भाषा बोलेगा तो ईरान भी उसी भाषा में जवाब देगा. अमेरिका पहले भी इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल कर चुका है. उसका नतीजा उसे हार और युद्धविराम के अनुरोध के रूप में भुगतना पड़ा.

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान के खिलाफ धमकियां जारी रहीं तो अंतिम समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि तेहरान-वाशिंगटन समझौता ज्ञापन के भाग-13 में स्पष्ट है कि यदि धमकियां जारी रहती हैं तो अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू नहीं होगी. अमेरिका को अपने हस्ताक्षर का सम्मान करना चाहिए.

ईरानी सेना ने भी अपनाया सख्त रुख

अराघची ने कहा कि लाखों ईरानी खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए थे. न तो ईरानी जनता और न ही देश के सशस्त्र बल किसी भी तरह की धमकियों से विचलित हुए हैं. ईरानी सेना ने भी संकेत दिए हैं कि वह किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है. किसी तरह की आक्रामकता का निर्णायक जवाब दिया जाएगा.

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ईरान की ओर से कहा गया कि देश कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहता है. उसके विरोधियों को लगा था कि अली खामेनेई, सैन्य कमांडरों, वैज्ञानिकों की हत्या और आवासीय इलाकों पर हमलों से इस्लामी गणराज्य कमजोर पड़ जाएगा. लेकिन इसका उल्टा असर हुआ. देश में राष्ट्रीय एकता, जनसमर्थन और शासन की ताकत अधिक मजबूत हुई है.

क्या शांति समझौता खतरे में है?

अमेरिका और ईरान के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा. लेकिन समझौते के बावजूद लगातार हुए हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने उस उम्मीद को झटका दिया है. पहले हमले, फिर युद्धविराम, उसके बाद अंतिम संस्कार के दौरान होर्मुज में मिसाइल हमला संवेदनशील बन गया है.

मौजूदा घटनाक्रम के बीच पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी है. यदि अमेरिका इस हमले के जवाब में सैन्य कार्रवाई करता है तो ईरान भी पलटवार की चेतावनी दे चुका है. ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर चरम पर पहुंच सकता है. आने वाला समय इस बात का संकेत देगा कि दोनों देश कौन सा रास्ता चुनकर आगे बढ़ते हैं.

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