ईरान जंग के बीच रूस की 'चांदी', तेल बेचकर एक महीने में ही कर रहा इतनी कमाई

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आई है. इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा रूस को हो रहा है, जो मार्च में कच्चे तेल उत्पादन से भारी कमाई कर रहा है.

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ईरान जंग के बीच रूस तेल उत्पादन से खूब कमाई कर रहा है (Photo: Reuters) ईरान जंग के बीच रूस तेल उत्पादन से खूब कमाई कर रहा है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:01 PM IST

ईरान में चल रही अमेरिका और इजरायल की जंग के कारण तेल की कीमतों को जैसे पंख लग गए हैं. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से मध्य-पूर्व के देशों से तेल सप्लाई में रुकावट आ रही है. ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ी हैं और दुनिया के देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है. लेकिन इस बीच जिस एक देश को सबसे अधिक फायदा हो रहा है, वो रूस है.

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मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से रूस मार्च में कच्चे तेल पर लगने वाले टैक्स से दोगुनी कमाई कर सकता है. तेल उत्पादन पर टैक्स लगाकर रूस इस महीने 7.43 अरब डॉलर की भारी कमाई करने वाला है.

यूक्रेन से युद्ध को लेकर रूस अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों के निशाने पर है. इस युद्ध के कारण रूसी तेल और उसकी तेल कंपनियां कई तरह के प्रतिबंधों से गुजर रही हैं. इन प्रतिबंधों के चलते तेल से होने वाली रूस की आय काफी कम हो गई थी लेकिन ईरान जंग ने रूस के लिए जैसे अवसरों की तिजोरी खोल दी हो.

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से मिडिल ईस्ट के कई देश अपना तेल नहीं बेच पा रहे. रूस इस मौके का भरपूर फायदा उठाते हुए भारत जैसे देशों को तेल सप्लाई कर रहा है और मांग को देखते हुए तेल उत्पादन काफी बढ़ा दिया गया है.

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रूस ने बढ़ाया तेल उत्पादन, कमा रहा भारी मुनाफा

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में कैलकुलेशन के आधार पर बताया कि इस महीने रूस कच्चे तेल उत्पादन पर टैक्स लगाकर भारी कमाई कर रहा है. रूस कच्चे तेल उत्पादन पर 'खनिज निष्कर्षण कर (Mineral Extraction Tax)' लगाता है जो इस महीने दोगुनी हो सकती है.

वैश्विक कच्चा तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड सोमवार को बढ़कर एक सेशन में 119 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया जो जून 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. सऊदी अरब और अन्य तेल उत्पादक देशों ने सप्लाई में रुकावट की वजह से तेल उत्पादन कम किया है जिसने तेल कीमतों को बढ़ने में मदद की है.

रूस, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है, कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का खूब फायदा उठा रहा है. रूस के सरकारी बजट की आय का लगभग एक-चौथाई हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस से आता है.

रॉयटर्स के कैलकुलेशन के अनुसार, अगर तेल की कीमतें मौजूदा स्तर के आसपास बनी रहती हैं तो इस महीने तेल उत्पादन पर टैक्स से रूस को करीब 590 अरब रूबल (लगभग 7.43 अरब डॉलर) की आय हो सकती है. अनुमान है कि पिछले महीने रूस को 300 अरब रूबल और जनवरी में 314 अरब रूबल की कमाई हुई थी. एक डॉलर की कीमत लगभग 79.3955 रूबल के बराबर है.

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आसमान छू रहीं कच्चे तेल की कीमतें

गुरुवार को तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखी गई है क्योंकि ईरान ने मिडिल ईस्ट में तेल और इसकी शिपिंग से जुड़ी सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए. इससे लंबे समय तक युद्ध चलने और होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली तेल सप्लाई के और रुकने की आशंकाएं बढ़ गई हैं.

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड के वायदा भाव 6.41 डॉलर (करीब 7%) बढ़कर 98.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए, जबकि इससे पहले कारोबार के दौरान यह 100 डॉलर प्रति बैरल तक गया था. वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल 5.98 डॉलर (करीब 6.85%) बढ़कर 93.23 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.

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