अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुई जंग में अब तक दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है. लेकिन शुरुआती दिनों में ईरान के हमलों ने खास तौर पर अमेरिकी रक्षा ढांचे को बड़ा झटका दिया. युद्ध के पहले चार दिनों में ही ईरान ने अमेरिका के करीब 2 अरब डॉलर (लगभग 16 हजार करोड़ रुपये) के रडार और रक्षा सिस्टम क्षतिग्रस्त या नष्ट कर दिए. इनमें अत्याधुनिक THAAD डिफेंस सिस्टम, सबसे महंगा रडार सिस्टम और मिलिट्री कम्युनिकेशन सिस्टम शामिल हैं.
यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाते हुए ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला किया. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया.
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ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने सऊदी अरब से लेकर यूएई, जॉर्डन, कतर, बहरीन, इराक, कुवैत हर मुल्क में तबाही मचाई. यह 2003 के बाद खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती के बीच हुआ सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.
अमेरिका के सबसे महंगे रडार सिस्टम पर हमला
ईरान के हमलों में सबसे बड़ा नुकसान कतर के अल-उदीद एयरबेस पर तैनात अमेरिकी रडार सिस्टम को हुआ. यहां मौजूद AN/FPS-132 नाम का एक अत्याधुनिक रडार मिसाइल हमले में क्षतिग्रस्त हो गया. यह रडार करीब 1.1 अरब डॉलर या 10 हजार करोड़ रुपये का बताया जाता है. इसे लंबी दूरी से आने वाले खतरों को पहचानने के लिए बनाया गया था.
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आसान भाषा में कहें तो यह एक ऐसा रडार था, जो हजारों किलोमीटर दूर से आने वाली मिसाइल या विमान की जानकारी दे देता है. हालांकि यह खुद किसी मिसाइल को मार गिराने का काम नहीं करता, बल्कि चेतावनी देने का काम करता है. कतर सरकार और सैटेलाइट तस्वीरों से इस हमले की पुष्टि हुई है.
THAAD सिस्टम के रडार भी हुए तबाह
ईरान ने अमेरिकी THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी निशाना बनाया. यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. THAAD सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा उसका AN/TPY-2 रडार होता है, जो दुश्मन की मिसाइलों को ट्रैक करता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने ऐसे दो रडार को नष्ट कर दिया.
अमेरिका ने जॉर्डन, UAE में THAAD डिफेंस सिस्टम को तैनात कर रखा था. ईरान ने इस डिफेंस सिस्टम के एक रडार अल-रुवैस (यूएई) में तबाह किया , जिसकी कीमत करीब 500 मिलियन डॉलर बताई जा रही है. दूसरा रडार जॉर्डन के मुवाफक सल्ती एयर बेस पर तैनात था, जिसकी कीमत करीब 300 मिलियन डॉलर थी. सैटेलाइट तस्वीरों में इन ठिकानों पर बड़े गड्ढे और जलने के निशान देखे गए हैं, जिससे हमलों की पुष्टि हुई है.
कुवैत में अमेरिकी लड़ाकू विमान भी नष्ट
कुवैत में भी अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ. यहां तीन F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान नष्ट हो गए. इन विमानों की कुल कीमत करीब 282 मिलियन डॉलर बताई जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह विमान ईरानी हमले से नहीं बल्कि गलती से अपने ही एयर डिफेंस सिस्टम की फायरिंग में गिर गए. हालांकि विमान के पायलट सुरक्षित बच गए.
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कम्युनिकेशन सिस्टम भी निशाने पर
बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय को भी ईरान ने नुकसान पहुंचाया. यहां दो सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल को उसने तबाह कर दिया. इनका इस्तेमाल मिलिट्री कम्युनिकेशन यानी युद्ध के दौरान अलग-अलग ठिकानों के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए किया जाता है. इनकी कुल कीमत करीब 20 मिलियन डॉलर बताई गई है.
कई एयरबेस और सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त, सैनिक भी मरे
ईरान के हमलों में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा. कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और कैंप बुहरिंग में कई इमारतें ढह गईं. इराक के एर्बिल एयरबेस में चार इमारतें नष्ट हो गईं, जबकि यूएई के जेबेल अली पोर्ट इलाके में भी धुएं और आग के निशान देखे गए. युद्ध के पहले हफ्ते में अमेरिका को मानव क्षति भी झेलनी पड़ी. कुवैत के कैम्प आरिफजान सैन्य अड्डे पर हुए एक हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई. कई अन्य सैनिक ड्रोन और मिसाइल हमलों में घायल हुए.
अमेरिकी डिफेंस पर असर
बताया जा रहा है कि इन हमलों ने अमेरिका की क्षेत्रीय डिफेंस सिस्टम में बड़ी खामियां उजागर कर दी हैं. खासकर THAAD रडार बहुत सीमित संख्या में मौजूद हैं. बताया जाता है कि अमेरिका के पास दुनिया भर में ऐसे सिर्फ 9 THAAD रडार हैं. ऐसे में किसी एक रडार का नष्ट होना भी बड़ी रणनीतिक समस्या बन सकता है, क्योंकि नया सिस्टम बनाने में कई साल लग जाते हैं.
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इन रडार के नष्ट होने से मिसाइल हमलों की पहले से जानकारी मिलने में देरी हो सकती है. इसका मतलब यह है कि दुश्मन की मिसाइलों को रोकने के लिए प्रतिक्रिया देने का समय कम हो जाएगा. ऐसे में संभावित रूप से बैलिस्टिक मिसाइलें सीधा अपने टारगेट को निशाना बना सकती हैं.
नाटो देश बाहर से कर रहे सपोर्ट
इस पूरे युद्ध में NATO अब तक सीधे तौर पर शामिल नहीं हुआ है. नाटो महासचिव मार्क रुट ने साफ कहा है कि गठबंधन के रूप में नाटो इस युद्ध में हिस्सा नहीं लेगा. हालांकि ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे कई नाटो देश अमेरिका को सैन्य अड्डों और लॉजिस्टिक समर्थन दे रहे हैं. इस वजह से ब्रिटेन के साइप्रस स्थित एक सैन्य अड्डे पर भी ड्रोन हमले में मामूली नुकसान हुआ है.
एम. नूरूद्दीन