जंग का साया, मलबे के ढेर, भूख से तड़पते लोग... सीरिया के वॉर जोन में भूकंप पीड़ितों को नहीं पहुंच पा रही मदद

12 साल से चल रहे संघर्ष के चलते सीरिया टूट चुका है. ईरान और रूस समर्थित राष्ट्रपति बशर अल-असद ने देश के अधिकांश हिस्सों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है. हालांकि, विद्रोहियों और तुर्की समर्थित लड़ाकों ने उत्तर पश्चिम इलाकों पर नियंत्रण कर रखा है. सारिया में विद्रोहियों के कब्जे वाला इलाका भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. हालांकि, सरकार नियंत्रित इलाके में भी भूकंप से तबाही हुई है, और लोगों ने अपनी जान गंवाई है.

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तुर्की और सीरिया में भूकंप से भारी तबाही तुर्की और सीरिया में भूकंप से भारी तबाही

aajtak.in

  • दमिश्क ,
  • 14 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 10:06 AM IST

6 फरवरी को आए भूकंप ने तुर्की के साथ साथ सीरिया में भारी तबाही मचाई है. अब तक 3600 लोगों की मौत हो चुकी है. हर तरफ मलबे के ढेर नजर आ रहे हैं. सीरिया में अभी कई ऐसे इलाके हैं, जहां भूकंप के 8 दिन बाद भी राहत और मदद नहीं पहुंच पाई है. ऐसे में भूकंप प्रभावित लोग खाने तक के लिए तड़प रहे हैं. लोगों के अपने उनके सामने मलबे में दबे दबे जान गंवा रहे हैं, लेकिन वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. इन सबके पीछे सीरिया के गृहयुद्ध को ही मुख्य वजह माना जा रहा है.

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सीरिया में पिछले 12 साल से गृहयुद्ध चल रहा है. ऐसे में यहां रेस्क्यू अभियानों में काफी दिक्कतें हो रही है. गृहयुद्ध के चलते क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां भी कई गुटों में बटी हैं. ऐसे में जो देश या संगठन सीरिया की मदद के लिए आगे आए हैं, उनके लिए भी राहत पहुंचाना आसान नहीं है. आईए जानते हैं सीरिया के वॉर जोन में भूकंप पीड़ितों को कैसे राहत पहुंचाई जा रही है और इसमें क्या क्या दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. 

सीरिया के गृहयुद्ध का क्या प्रभाव?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 साल से चल रहे संघर्ष के चलते सीरिया टूट चुका है. ईरान और रूस समर्थित राष्ट्रपति बशर अल-असद ने देश के अधिकांश हिस्सों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है. हालांकि, विद्रोहियों और तुर्की समर्थित लड़ाकों ने उत्तर पश्चिम इलाकों पर नियंत्रण कर रखा है. यूएन के मुताबिक, इस इलाके में भूकंप से पहले भी 40 लाख लोगों को मदद की जरूरत थी. 

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सारिया में विद्रोहियों के कब्जे वाला इलाका भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. हालांकि, सरकार नियंत्रित इलाके में भी भूकंप से तबाही हुई है, और लोगों ने अपनी जान गंवाई है. सीरिया के पूर्वोत्तर का बड़ा हिस्सा US समर्थित कुर्द नेतृत्व वाली सेना द्वारा नियंत्रित किया जाता है. यह क्षेत्र भूकंप से सबसे कम प्रभावित हुआ है. 
 
सीरिया में कैसे पहुंच सकती है मदद?

समर्थित राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार का कहना है कि अन्य देशों को सीरिया की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और देश के किसी भी हिस्से के लिए सहायता सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्र के माध्यम से प्रवेश करनी चाहिए

आमतौर पर विद्रोहियों के कब्जे वाले उत्तर-पश्चिम में तुर्की की सीमा से मदद पहुंचाई जाती है. इसके लिए हर 6 महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मंजूरी लेनी पड़ती है. बशर अल-असद की सरकार को समर्थन देने वाले रूस ने सिर्फ तुर्की से उत्तर-पश्चिम में एक क्रॉसिंग खोलने को मंजूरी दी है. रूस का कहना है कि UN को राजधानी दमिश्क के जरिए मदद भेजनी चाहिए, बाद में इसे आगे भेजा जाना चाहिए. 

यूएन सहायता प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ ने सोमवार को सीरिया का दौरा किया, उन्होंने भूकंप राहत साम्रगी लाने के लिए तुर्की से अतिरिक्त क्रॉसिंग खोलने के लिए संयुक्त राष्ट्र में पैरवी की है. 

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सीरिया में प्रभावित इलाकों में मदद पहुंचना कितना मुश्किल?

सीरिया में भूकंप के बाद मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए कुछ प्रयास किए गए. लेकिन यह प्रक्रिया काफी कठिन और भयावह है. कुर्द-नेतृत्व वाले पूर्वोत्तर से एक काफिला तुर्की समर्थित विद्रोही गुटों के कब्जे वाले उत्तर-पश्चिम के लिए रवाना होता है. इन दोनों गुटों में गृहयुद्ध के दौरान कई बार भीषण संघर्ष भी हुआ है. ऐसे में इस बार भी मदद के लिए पहुंचे इस काफिले को लौटा दिया गया. 

इसके लिए दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया और सहायता का राजनीतिकरण करने की कोशिश करने का आरोप लगाया. संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि सरकार के नियंत्रण वाले सीरिया से विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में जाने वाली सहायता को अनुमति के मुद्दों के चलते रोक दिया गया. वहीं, विद्रोहियों के गुट की ओर से कहा गया कि वे सरकार के कब्जे वाले क्षेत्रों से शिपमेंट की अनुमति नहीं देंगे. 

कौन भेज रहा मदद?
 
पश्चिमी देश संघर्ष के  बाद से असद सरकार को अलग-थलग करने की मांग करते रहे हैं. पश्चिम देशों का आरोप है कि 2011 में असद सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे. तब असद सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर जबरदस्त कार्रवाई की थी. पश्चिमी देशों ने सीरिया पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हैं. ऐसे में इन देशों से काफी कम प्रत्यक्ष सहायता दी जा रही है. हालांकि, पश्चिमी देशों का कहना है कि उनके प्रतिबंध का असर राहत कार्यों पर नहीं पड़ेगा. ये देश संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख दाता देश हैं, जो सीरिया में मदद के लिए ऑपरेशन चला रहे हैं. 
 

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भारत ने सीरिया में पहुंचाई मदद


 
सीरिया की मीडिया के मुताबिक, भूकंप के बाद से अरब और एशिया के देशों से राहत साम्रगी लेकर 50 से ज्यादा प्लेन सरकार नियंत्रित एयरपोर्ट पर पहुंचे हैं. इटली मेडिकल टीम भी रविवार को सीरिया पहुंची. यह यूरोपीय देशों से सीरिया पहुंची पहली मदद है. 
 
पश्चिमी देशों से उत्तर पश्चिम पहुंची सीधी मदद भी विद्रोहियों के चलते प्रभावित हुई है. यह भूकंप के तीन दिन बाद तक सीमा पर बाधित रही. हालांकि, गुरुवार को खाद्य साम्रगी, चिकित्सा उपकरण ही उत्तर पश्चिम इलाकों में पहुंचे हैं. जबकि मलबा साफ करने के लिए जरूरी उपकरण नहीं पहुंचे हैं. 
 


 

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