कांगो में बेकाबू हुआ इबोला, 24 घंटे में 72 नए केस, अब तक 181 लोगों की मौत

कांगो में इबोला का नया प्रकोप तेजी से फैलता जा रहा है. हालात इतने गंभीर हैं कि एक ही दिन में 72 नए मामलों की पुष्टि हुई है, जो इस आउटब्रेक की अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. कमजोर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, फंडिंग की कमी, असुरक्षा और लगातार विस्थापन ने बीमारी पर काबू पाने की कोशिशों को झटका दिया है.

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कांगो से युगांडा तक पहुंचा इबोला, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग फेल, फंडिंग संकट ने बढ़ाई मुश्किलें. (File Photo: ITG) कांगो से युगांडा तक पहुंचा इबोला, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग फेल, फंडिंग संकट ने बढ़ाई मुश्किलें. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

कांगो में इबोला वायरस का नया प्रकोप लगातार भयावह होता जा रहा है. हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को महज 24 घंटे के भीतर 72 नए मामलों की पुष्टि हुई, जो इस आउटब्रेक के दौरान एक दिन में सामने आए मामलों की सबसे बड़ी संख्या है. बीमारी के फैलने की आधिकारिक घोषणा हुए एक महीना बीत चुका है.

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इसके बावजूद कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, सुरक्षा चुनौतियों और संसाधनों की कमी के कारण संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण अभी भी दूर दिखाई दे रहा है. कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में इबोला के कुल कन्फर्म मामलों की संख्या बढ़कर 782 हो गई है. इसी दौरान 32 नई मौतों की पुष्टि होने के बाद मरने वालों की कुल संख्या 181 तक पहुंच गई है. 

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संक्रमितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. इसकी वजह यह है कि 15 मई को बीमारी के प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि हुई थी, जबकि संक्रमण कई सप्ताह पहले ही फैलना शुरू हो चुका था. स्थिति को और गंभीर बनाने वाला तथ्य ये है कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कवरेज रेट केवल 56 फीसदी रह गया है. 

पिछले सप्ताह की तुलना में यह आंकड़ा काफी कम हुआ है, जिससे संक्रमण की चेन को तोड़ना और कठिन हो गया है. इस बार इबोला का प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस की वजह से हुआ है. यह वायरस अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है और इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके खिलाफ अभी तक कोई अप्रूव्ड वैक्सीन या प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है. 

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इसके विपरीत, कांगो में पहले सामने आए 16 में से अधिकांश इबोला आउटब्रेक ज़ैरे वायरस स्ट्रेन से जुड़े थे. इसके लिए वैक्सीन और उपचार विकल्प मौजूद हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक 56 लोग संक्रमण से ठीक होकर स्वस्थ हो चुके हैं. इसके बावजूद मौजूदा आउटब्रेक में मृत्यु दर 23 फीसदी बनी हुई है, जो स्थिति की गंभीरता दर्शाती है.

बढ़ते संकट को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने टेस्टिंग, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और मरीजों के इलाज की प्रक्रिया को तेज करने की घोषणा की है. संगठन का कहना है कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने और नए मामलों की पहचान के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास बढ़ाए जा रहे हैं. अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी सक्रिय हो गई है. 

संस्था ने कहा है कि वो लैब सिस्टम को मजबूत बनाने, एक्टिव केस फाइंडिंग और कम्युनिटी एंगेजमेंट कार्यक्रमों को गति देने के लिए अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर रही है. अफ्रीका CDC के प्रमुख जीन कासेया ने कहा कि जब तक संक्रमण का प्रसार पूरी तरह नहीं रुक जाता, तब तक प्रभावित देशों को हर संभव सहायता दी जाएगी. 

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और दानदाताओं से भी तत्काल संसाधन जुटाने की अपील की है. मौजूदा आउटब्रेक का सबसे बड़ा केंद्र कांगो का पूर्वी प्रांत इतुरी बना हुआ है, जहां 90 प्रतिशत से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में भी संक्रमण फैल चुका है. इतना ही नहीं पड़ोसी देश युगांडा तक पहुंच गया है.

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इससे क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य आपातकाल की आशंका बढ़ गई है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इतुरी प्रांत में जारी हिंसा और सशस्त्र संघर्ष के कारण करीब 10 लाख लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं. लगातार विस्थापन की वजह से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग लगभग चुनौतीपूर्ण मिशन बन गई है. लोग हमलों से बचने के लिए बार-बार स्थान बदल रहे हैं.

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