अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी पर बात की. लेकिन उन्होंने साथ ही यूरोप से लेकर नाटो पर पर निशाना साधा और ग्रीनलैंड पर अमेरिकी हक की बात कही.
ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि उनके एक साल के कार्यकाल में देश में महंगाई दर घटी है और बेरोजगारी कम हुई है. इसके बाद उन्होंने यूरोप पर निशाना साधते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. यूरोप के कुछ हिस्से ऐसे हैं, जो अब पहचान में भी नहीं आते और यह बदलाव किसी अच्छे कारण से नहीं हुआ है. ट्रंप के मुताबिक, जब लोग यूरोप से लौटकर कहते हैं कि वे उसे पहचान नहीं पाए, तो वह तारीफ नहीं बल्कि चिंता की बात है.
उन्होंने सीधे तौर पर यूरोपीय सरकारों की नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि जरूरत से अधिक सरकारी खर्च, अनियंत्रित सामूहिक प्रवासन और विदेशी आयात पर अत्यधिक निर्भरता ने यूरोप को कमजोर किया है. ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि वह यूरोप से प्यार करते हैं और उसे सफल देखना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा नीतियां उसे गलत दिशा में ले जा रही हैं. हम इस पर बहस कर सकते हैं लेकिन इसमें बहस की कोई गुंजाइश नहीं है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.
उन्होंने कहा कि यूरोप की आव्रजन नीतियों और आर्थिक नीतियों ने विनाशकारी परिणाम दिए हैं, जबकि इसके उलट अमेरिका में बड़े बदलाव हुए हैं.
कनाडा के PM को ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने दावोस के मंच से कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को चेताते हुए कहा कि पड़ोसी मुल्क को अमेरिका का शुक्रगुजार होना चाहिए. कनाडा को हमसे बहुत सारी फ्रीबीज मिलती हैं. उन्हें हमारा शुक्रगुजार होना चाहिए लेकिन वे नहीं हैं.
ट्रंप ने कहा कि हमारी गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार कराने की योजना है, जिससे कनाडा की रक्षा होगी. लेकिन कार्नी हमारा आभारी नहीं है. कनाडा का वजूद हमारी वजह से है. कार्नी अगली बार बयान देने से पहले इसे याद रखें.
'हमें बस बर्फ का एक खूबसूरत टुकड़ा चाहिए'
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर कहा कि यह बर्फ का एक बड़ा खूबसूरत टुकड़ा है. मैं ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों का सम्मान करता हूं. हमने दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ग्रीनलैंड की मदद की थी. ग्रीनलैंड की रक्षा हमारे सिवाए कोई भी मुल्क नहीं कर सकता. सिर्फ हम ही ग्रीनलैंड को बचा सकते हैं. हमने वर्ल्ड वॉर 2 के वक्त ग्रीनलैंड को बचाया था. हम बेवकूफ थे जो हमने ग्रीनलैंड को वापस दे दिया.
मैं सिर्फ ग्रीनलैंड मांग रहा हूं, जो हमारा था. हमें इसकी पूर्ण ऑनरशिप चाहिए. आप लीज पर इसकी रक्षा नहीं कर सकते. हमारे प्रस्तावों पर देश हां और ना कह सकते हैं लेकिन अमेरिका आपके रिस्पॉन्स को याद रखेगा.
उन्होंने कहा कि हम अब बहुत बड़ी मिलिट्री पावर हैं. मैं मिलिट्री का इस्तेमाल नहीं करना चाहता और ना ही करन चाहूंगा लेकिन हम फिर भी ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए मिलिट्री का इस्तेमाल कर सकते हैं. हमें हमारी सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है.
ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान का फिर किया जिक्र
दावोस के मंच से ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने कई देशों के बीच युद्धों को रोकने में भूमिका निभाई है. उदाहरण के तौर पर भारत-पाकिस्तान समेत कई संघर्ष की ओर संकेत किया. उन्होंने पुतिन के फोन कॉल का भी जिक्र किया.
ट्रंप ने अपने संबोधन में खुद को वैश्विक शांति का सूत्रधार बताने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि उनके प्रयासों से कई अंतरराष्ट्रीय टकराव और युद्ध टले हैं, जिनमें भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों का भी जिक्र किया गया. ट्रंप ने कहा कि वह ऐसे नेता हैं जो सौदे करना जानते हैं और दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि ताकत के दम पर शांति की ओर ले जाना चाहते हैं.
नाटो पर भी भड़के ट्रंप
ट्रंप ने नाटो (NATO) के बारे में अपनी पुरानी आलोचनाओं को दोहराते हुए संकेत दिया कि अमेरिका बलिदान देने के बावजूद यूरोपीय साझेदारों से पर्याप्त सुरक्षा योगदान नहीं पा रहा. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के मामले को लेकर नाटो में मतभेद हो सकते हैं और अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगियों को यह समझ में आए कि उसके सुरक्षा योगदान की कीमत क्या है.
ट्रंप ने कहा कि नाटो को हमने दशकों तक फंड दिया लेकिन हमें बदले में उससे बहुत कम मिला. नाटो की सारी की सारी फंडिंग अमेरिका से होती है. नाटो और सुरक्षा के सवाल पर ट्रंप ने अपने पुराने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से यूरोप की सुरक्षा का बोझ उठाता आ रहा है, जबकि कई यूरोपीय देश अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे. ट्रंप के मुताबिक, सहयोग तभी टिकाऊ हो सकता है जब सभी साझेदार बराबरी से योगदान दें.
'मेरे कार्यकाल में अमेरिका ने ग्रोथ इंजन बना'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने जिस तरह से आर्थिक मजबूती हासिल की है, वह बाकी दुनिया के लिए एक मॉडल है. उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को इकोनॉमिक मिरेकल बताया और कहा कि अमेरिका में रोजगार, निवेश और बाजार का भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत है.
उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से देश में महंगाई लगातार कम हो रही है. अमेरिका में स्टॉक एक्सचेंज अब तक के उच्च स्तर पर रहा है. मेरे कार्यकाल में देश में निवेश 18 ट्रिलियन डॉलर रहा है. अमेरिका दुनिया का इकोनॉमिक कैपिटल है.
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