डोकलाम के बाद अब शी जिनपिंग ने तिब्बत में चला नया दांव

जिस इलाके में शी जिनपिंग ने चरवाहों को बसेरा डालने के लिए कहा है वह दरअसल दक्षिण-पश्चिम चीन की सीमा से सटा है और भारत के अरुणाचल प्रदेश के करीब है. इस इलाके पर चीन अपना दावा करता है.

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

जावेद अख़्तर

  • बीजिंग,
  • 29 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 11:20 PM IST

एक बार फिर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की कमान मिलते ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को लेकर अपने नए प्लान पर काम शुरू कर दिया है. इस बार चीन ने अपने सीमाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तिब्बत के चरवाहों पर दांव खेला है. जिनपिंग ने तिब्बत में रहने वाले चरवाहों से कहा है कि वो भारत-चीन सीमा के पास बस्ती बनाएं और चीनी क्षेत्र की सुरक्षा करें.

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न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तिब्बत के लुन्झे स्थित एक परिवार की दो बेटियों ने शी जिनपिंग को पत्र लिखकर अपने कस्बे की आप बीती बताई थी, जिसके जवाब में शी ने उन्हें भारत-चीन सीमा क्षेत्र के पास बसेरा डालने को कहा है.

जिस इलाके में शी जिनपिंग ने चरवाहों को बसेरा डालने के लिए कहा है वह दरअसल दक्षिण-पश्चिम चीन की सीमा से सटा है और भारत के अरुणाचल प्रदेश के करीब है. इस इलाके पर चीन अपना दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है.

बताया जा रहा है कि शी जिनपिंग ने चरवाहों के एक परिवार से सीमावर्ती क्षेत्र में बस्ती बसाने, चीनी क्षेत्र की सुरक्षा करने और वहां पर बस्ती का विस्तार करने के लिए कहा है. ये भी दावा किया जा रहा है कि जिनपिंग ने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए परिवार के प्रयासों को स्वीकारा और सीमावर्ती क्षेत्र में उनकी वफादारी और योगदान के प्रति आभार जताया है.

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कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) का दोबारा महासचिव निर्वाचित होने के बाद शी जिनपिंग ने अपनी सेना से तैयार रहने को कहा था. शी ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा था कि चीन पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए तैयार है, लेकिन वह अपनी संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली चीजों को सहन नहीं कर सकता.  ऐसे में तिब्बत से जुड़ी भारत की सीमा पर चीन का ये रवैया एक बार उसकी विस्तारवादी नीति को तो दर्शाता ही है, साथ ही ये भी दिखाता है कि जिस इलाके को चीन अपना बताता है, उस पर कब्जे की हर मुमकिन तैयारी करता है.

इससे पहले हाल ही में चीन और भारत के बीच सिक्किम में डोकलाम को लेकर दो महीने से ज्यादा विवाद चला. उसी दौरान लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प की तस्वीरें सामने आई थीं. डोकलाम में चीन को मुंह की खानी पड़ी थी. चीन ने डोकलाम गतिरोध के दौरान तिब्बत में युद्ध टैंक भी भेजे थे.

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