एक तरफ मिडिल-ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जंग चल रही है. दूसरी तरफ पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी एक-दूसरे पर हमला कर रहा है. ऐसे में चीन ने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए मध्यस्थता की कमान संभाल ली है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि वो दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने और कड़वाहट को कम करने की कोशिश कर रहा है. चीन के एक विशेष दूत लगातार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है.
इस प्रक्रिया को 'शटल डिप्लोमेसी' कहा जा रहा है, जिसका मकसद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत का रास्ता खोलना और आपसी मतभेदों को सुलझाना है. ये त्रिपक्षीय संवाद सुनिश्चित करने की कोशिश है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल किया जा सके.
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चीन की प्रतिबद्धता
चीन ने सिर्फ विशेष दूत ही नहीं भेजा, बल्कि जमीनी स्तर पर भी संवाद तेज कर दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में स्थित चीनी दूतावास भी एक-दूसरे के साथ निरंतर और करीबी संपर्क में हैं. चीन ने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर अपनी भूमिका साफ करते हुए कहा है कि वो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है.
दक्षिण एशिया और चीन की सुरक्षा के लिए शांति जरूरी
विदेश मंत्रालय ने कहा, चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव को कम करने के लिए सक्रिय प्रयास जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीन का मानना है कि क्षेत्र में शांति न सिर्फ इन दो देशों के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और चीन की अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए भी जरूरी है.
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बता दें कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अक्सर सीमा विवाद, आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर विवाद रहता है. दोनों देशों में एक बार मतभेद जारी हैं.
सना फरज़ीन