अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने सबसे विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद, अमेरिकी सेना अब ईरान पर हमला करने की तैयारी में जुट गई है. अमेरिकी सेना अपने सबसे घातक लंबी दूरी के हथियारों को तैनात करने का प्लान बना रही है.
ट्रंप ने हाल ही में धमकी दी थी कि वो ईरान पर इतना भीषण हमला करेंगे कि उसे 'पाषाण युग'में वापस भेज देंगे. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य अभियान के अगले चरण में JASSM-ER क्रूज मिसाइलों के लगभग पूरे भंडार का इस्तेमाल किया जाएगा.
JASSM-ER क्रूज मिसाइल 600 मील (965 किमी) से ज्यादा दूर स्थित लक्ष्यों पर सीधे अटैक कर सकती है. इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है.
बता दें कि ईरान से जंग के बीच प्रशांत क्षेत्र और अमेरिकी ठिकानों से JASSM-ER क्रूज मिसाइलों को हटाकर मध्य कमान (CENTCOM) के बेस और ब्रिटेन के फेयरफोर्ड बेस पर भेजा जा रहा है. जखीरे में कमी के बावजूद, अमेरिका अब बचकर जंग लड़ने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि उसे युद्ध के मैदान में कुछ बड़े झटके लगे हैं.
ईरान दे रहा कड़ी चुनौती
ईरान की हवाई शक्ति को कमजोर करने के अमेरिकी और इजरायली दावों के बावजूद, तेहरान ने कड़ी चुनौती पेश की है. इस सप्ताह ईरान ने अमेरिका के एक F-15E स्ट्राइक फाइटर और एक A-10 अटैक एयरक्राफ्ट को मार गिराया. इसके अलावा, खोज और बचाव अभियान में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों और एक दर्जन से ज्यादा MQ-9 ड्रोनों को भी तबाह कर दिया गया है.
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इन नुकसानों ने वॉशिंगटन को मानव रहित लंबी दूरी की मिसाइलों पर निर्भर होने के लिए मजबूर कर दिया है. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अब तक ईरान के 12,300 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया जा चुका है. लेकिन इस भारी गोलाबारी ने अमेरिका के मिसाइल भंडार को संकट में डाल दिया है.
सिर्फ 425 मिसाइलें बाकी
युद्ध के पहले चार हफ्तों में ही 1,000 से ज्यादा JASSM-ER मिसाइलें खर्च हो चुकी हैं. दुनिया भर में अब सिर्फ 425 मिसाइलें ही बाकी बचेंगी, जबकि युद्ध से पहले ये संख्या 2,300 थी. मौजूदा प्रोडक्शन की रफ्तार को देखते हुए, इस भंडार को दोबारा भरने में कई साल लग सकते हैं.
अमेरिका के B-52 और B-1B बॉम्बर लगातार उड़ानें भर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि ये हवाई अभियान और भी भीषण होने वाला है।. इतनी बड़ी मात्रा में मिसाइलों का इस्तेमाल अमेरिका को चीन जैसे दूसरे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ कमजोर कर सकता है. वहीं, ईरान के पास अब भी कुछ ऐसे एयर डिफेंस सिस्टम बाकी हैं, जो अमेरिकी विमानों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं.
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