पश्चिम एशिया की जंग की वजह से अमेरिका के हथियार के गोदाम तेजी से खाली हो रहे हैं. ईरान के साथ अमेरिका बीते एक महीने के अधिक समय से हमला कर रहा है. ऐसे में उसके हथियारों के खेप पर भी इसका असर दिखना शुरु हो गया है. ऐसी खबरें सामने आई हैं कि जापान को 2028 तक मिलने वाले टॉमहॉक मिसालों की डिलिवरी में देरी होगी.
जापान ने अमेरिका से करीब 400 टॉमहॉक मिसाइलें मंगवाई थीं. ये वही मिसाइलें हैं जो समुद्र से छोड़ी जाती हैं और सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर सटीक निशाना लगाती हैं. डील थी कि ये सब मार्च 2028 तक जापान को मिल जाएंगी.
लेकिन अब अमेरिकी मीडिया कंपनी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट आई है कि अमेरिका ने इशारों-इशारों में कह दिया है, "मिसाइलें टाइम पर देना मुश्किल हो सकता है."
क्यों हो रही है देरी?
देरी होने की बात साफ-साफ सीधी है. अमेरिका-ईरान जंग में अमेरिका के हथियार तेजी से खर्च हो रहे हैं. जो मिसाइलें और हथियार पहले से बने थे, वो अब युद्ध में लग रहे हैं. नए बनाने में वक्त लगता है. तो जो जापान के लिए बचाकर रखे थे, उन पर भी दबाव आ गया.
यह भी पढ़ें: ईरान का ट्रंप कार्ड: चोक पाइंट जंग का ऐसे बना बादशाह, रोकी दुनिया की राह
जापान के लिए ये बड़ी बात क्यों है?
जापान पिछले कुछ सालों में अपनी सेना को काफी मजबूत कर रहा है. चीन और उत्तर कोरिया से खतरा देखते हुए जापान ने फैसला किया था कि वो लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें रखेगा. टॉमहॉक मिसाइलें उसी प्लान का हिस्सा थीं. अब देरी होती है तो उसकी पूरी सुरक्षा योजना पर असर पड़ता है.
डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लगातार धमकी मिल रही है. ताजा चेतावनी में ट्रंप ने साफ-साफ बोला है कि ईरान के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को और तेज कर दिया जाएगा. गुरुवार को ही अमेरिका-इजरायल ने ईरान में एक पुल को उड़ा दिया था. यह पुल करीब 3800 करोड़ की लागत से बनकर बिल्कुल तैयार हो गया था.
aajtak.in