एलॉन मस्क के AI ने ईरान में बरसाए 2000 बम? धीरे-धीरे खुल रहीं जंग की मिस्ट्री

ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल अभियान को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है. अमेरिकी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा है कि एलॉन मस्क की कंपनी xAI के ग्रोक AI मॉडल का इस्तेमाल सैन्य अभियानों में किया गया.

Advertisement
ईरान जंग में मस्क के AI का खूब हुआ इस्तेमाल (Photo- AI Generated) ईरान जंग में मस्क के AI का खूब हुआ इस्तेमाल (Photo- AI Generated)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:58 AM IST

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. दावा है कि अमेरिकी सेना ने एलॉन मस्क की AI कंपनी xAI के Grok आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए सिर्फ 96 घंटे में 2000 से ज्यादा मिलिट्री टारगेट्स पर हमले किए.

यह जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग के डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रमुख कैमरन स्टेनली द्वारा एक अमेरिकी अदालत में दाखिल लिखित बयान में सामने आई है. यह दस्तावेज उस मुकदमे का हिस्सा है, जिसमें अमेरिकी नागरिक अधिकार संगठन NAACP ने मस्क की कंपनी xAI के खिलाफ पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: न्यूक्लियर डील, पीस डील या MoU? ट्रंप के एक शब्द ने दुनिया को कर दिया कन्फ्यूज

स्टेनली ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सरकार "Grok Gov Model" का इस्तेमाल करती है. यह मॉडल xAI के AI सिस्टम पर आधारित है और इसे Maven Smart Systems नाम के प्लेटफॉर्म में तैनात किया गया है. इसका इस्तेमाल टारगेटिंग, खुफिया जानकारी जुटाने, सैन्य तैयारी और भर्ती जैसे अहम राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में किया जाता है.

Grok AI ने कैसे किया ईरान पर हमला?

दस्तावेज के मुताबिक, इसी AI-संचालित सिस्टम की मदद से "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के दौरान अमेरिकी सेना ने महज 96 घंटे में 2000 से अधिक हथियारों और बमों का इस्तेमाल किया. हालांकि बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये हमले कब और किन-किन ठिकानों पर किए गए.

Advertisement

इस खुलासे की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि पहली बार ट्रंप प्रशासन की तरफ से सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया गया है कि एलॉन मस्क के AI मॉडल का इस्तेमाल ईरान युद्ध के दौरान सैन्य अभियानों में किया गया.

हालांकि AI की भूमिका क्या थी, इस पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सिस्टम आमतौर पर खुफिया डेटा का विश्लेषण, संभावित लक्ष्यों की पहचान और युद्धक्षेत्र में तेजी से फैसले लेने में मदद करते हैं. अंतिम हमला करने का फैसला अब भी सैन्य अधिकारियों के हाथ में रहता है.

एलॉन मस्क के Grok AI पर लगे आरोप

28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों में हजारों लोग मारे गए. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इस दौरान करीब 3500 लोगों की मौत हुई. इस पूरे विवाद का दूसरा पहलू भी है. NAACP ने आरोप लगाया है कि xAI अपने विशाल डेटा सेंटर को चलाने के लिए मिसिसिपी में 27 मीथेन गैस टर्बाइन अवैध रूप से संचालित कर रही है. संगठन का कहना है कि इससे पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

यह भी पढ़ें: 1971 में बंगाल की खाड़ी से खदेड़ा गया था, अब नई चीनी सबमरीन के दम पर कूद रहा पाकिस्तान

Advertisement

लेकिन अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से इस मुकदमे को खारिज करने की मांग की है. सरकार का तर्क है कि xAI का सुपरकंप्यूटर और डेटा सेंटर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. अगर इनकी क्षमता प्रभावित हुई तो अमेरिकी सेना की AI आधारित सैन्य क्षमताओं पर असर पड़ सकता है.

आधुनिक युद्ध में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है. ड्रोन संचालन, खुफिया विश्लेषण, लक्ष्य की पहचान और युद्धक्षेत्र की निगरानी जैसे कई काम अब AI की मदद से किए जा रहे हैं. ऐसे में ग्रोक AI के इस्तेमाल को भविष्य के युद्धों की एक झलक के तौर पर देखा जा रहा है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »