रूस की धरती से गरजे अजीत डोभाल... पाकिस्तान का नाम लिए बिना दुनिया के सामने आतंकवाद पर उधेड़ दी बखिया!

अजीत डोभाल ने रूस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए. डोभाल ने होर्मुज और रेड सी जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को भी बेहद जरूरी बताया.

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डोभाल बोले - आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा (Photo: PTI) डोभाल बोले - आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे. वहां उन्होंने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लिया और दुनिया के सामने भारत का साफ संदेश रखा. डोभाल ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा रवैया नहीं चलेगा. जो देश आतंकियों को पनाह देते हैं, उन्हें तय करना होगा कि वो किस तरफ खड़े हैं.

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मॉस्को में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन हुआ. इसका नाम था 'पहला इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम' और साथ में 'सुरक्षा मामलों के बड़े अधिकारियों की 14वीं बैठक.' इस बैठक की अध्यक्षता रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु ने की. इस सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के बड़े सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए. भारत की तरफ से NSA अजीत डोभाल वहां पहुंचे.

बैठक में मुख्य विषय था कि दुनिया जिस तरफ बढ़ रही है, यानी जहां अमेरिका की जगह कई देश मिलकर दुनिया की ताकत बन रहे हैं, उस बदलती दुनिया में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को कौन-कौन से खतरे हैं.

डोभाल ने सम्मेलन में तीन बड़ी बातें कहीं. पहली बात, पाकिस्तान का बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा. डोभाल ने साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दो तरह की नीति नहीं हो सकती. जो देश जिम्मेदार हैं, उन्हें अपना रुख तय करना होगा. या तो वो आतंकियों को पालने वालों का साथ दें, या फिर आतंकवाद को मिलकर कुचलें. यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पाकिस्तान पर बार-बार आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि डोभाल ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन संदेश बिल्कुल साफ था.

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दूसरी बात, दुनिया की पुरानी संस्थाओं में बदलाव जरूरी है. डोभाल ने कहा कि जो अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं 1945 में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बनाई गई थीं, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी दूसरी संस्थाएं, अब वो पुरानी पड़ चुकी हैं. आज की दुनिया की समस्याओं से निपटने के लिए इनमें बड़े बदलाव जरूरी हैं. और इन बदलावों में 'ग्लोबल साउथ' यानी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को ज्यादा जगह और आवाज मिलनी चाहिए.

तीसरी बात, समुद्री रास्ते खुले रहने चाहिए. डोभाल ने खासतौर पर होर्मुज और लाल सागर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन समुद्री रास्तों से व्यापार बिना रुके जारी रहना बेहद जरूरी है. ये दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक रास्ते हैं जहां से तेल और अन्य जरूरी सामान एशिया सहित दुनियाभर में पहुंचता है. खासकर होर्मुज पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया के संघर्ष की वजह से व्यावहारिक रूप से बंद जैसा हो गया है, जिससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है.

इनपुट: पीटीआई

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