पश्चिम बंगाल के चर्चित संदेशखली मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच एक अहम पड़ाव पर पहुंच गई है. विशेष PMLA अदालत ने तृणमूल कांग्रेस के निलंबित नेता शेख शाहजहां, उसके भाई शेख आलमगीर और एक अन्य आरोपी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय कर दिए हैं. इसके साथ ही मामले में नियमित सुनवाई और ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है.
ED ने इस मामले में 27 मई 2024 को अभियोजन शिकायत दायर की थी, जिस पर अदालत ने 3 जून 2024 को संज्ञान लिया था. जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई शेख शाहजहां और उसके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी.
ED के अनुसार, जांच में सामने आया कि शेख शाहजहां ने राजनीतिक संरक्षण और अपने गुर्गों के दम पर संदेशखली में आतंक का माहौल बना रखा था. एजेंसी का दावा है कि उसने छोटे अपराधों से शुरुआत कर धमकी, हिंसा और दबंगई के जरिए अपना आपराधिक नेटवर्क लगातार फैलाया.
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि शाहजहां ने जमीनों पर अवैध कब्जा, मछली पालन और व्यापार, ईंट भट्ठों पर कब्जा, ठेकों में अनियमितता और अवैध वसूली के जरिए बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की. इस अवैध धन को मछली कारोबार की आय के रूप में दिखाकर वैध बनाने की कोशिश की गई और इसके लिए कई करीबी सहयोगियों का इस्तेमाल किया गया.
जांच के दौरान एजेंसी ने भूमि कब्जाने, रंगदारी और हत्या की धमकी के पीड़ितों समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए. PMLA की धारा 17 के तहत कई स्थानों पर छापेमारी की गई और कई लग्जरी वाहन भी जब्त किए गए. इससे पहले ED इस मामले में करीब 27 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच कर चुकी है. एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों की कुर्की को न्यायनिर्णायक प्राधिकरण भी मंजूरी दे चुका है.
मामले में ED अब तक शेख शाहजहां, उसके भाई शेख आलमगीर, शिब प्रसाद हाजरा और दीदार बोक्श मोल्ला सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. एजेंसी के मुताबिक, विशेष अदालत सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज कर चुकी है और फिलहाल सभी न्यायिक हिरासत में हैं. हालांकि, अदालत ने अभी केवल आरोप तय किए हैं. आरोपियों की दोषसिद्धि या बरी होने का अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा.
सृष्टि ओझा