योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: 18 शहरों में दौड़ेंगी 1725 AC इलेक्ट्रिक बसें, 3 नए शहरों को भी मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इनमें 18 शहरों में 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, आगरा-बरेली-प्रयागराज में नए शहरों के विकास और उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन जैसे बड़े फैसले शामिल हैं. सरकार का दावा है कि इन निर्णयों से परिवहन, शहरी विकास और निवेश को नई गति मिलेगी.

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225 करोड़ की नई सौगात. (File Photo: ITG) 225 करोड़ की नई सौगात. (File Photo: ITG)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लकनऊ,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:01 PM IST

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. बैठक में सार्वजनिक परिवहन, शहरी विकास और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने वाले कई अहम फैसले लिए गए.

कैबिनेट ने प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल पर 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सरकार का मानना है कि इससे नगरीय परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनेगी.

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बैठक के बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन योजनाओं से प्रदेश के शहरों में यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा.

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18 शहरों में चलेंगी 1725 AC इलेक्ट्रिक बसें

योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा-जेवर क्षेत्र में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी.

इन बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा GCC मॉडल पर किया जाएगा. वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तिथि से अनुबंध की अवधि 12 वर्ष निर्धारित की गई है.

सरकार के अनुसार इससे यात्रियों को आरामदायक और समयबद्ध परिवहन सुविधा मिलेगी, जबकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा.

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निजी ऑपरेटर संभालेंगे पूरी जिम्मेदारी

GCC मॉडल के तहत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, ड्राइवर और तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था, संचालन तथा अनुरक्षण की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी.

राज्य सरकार निर्धारित मानकों के अनुसार ऑपरेटरों को संचालन और अनुरक्षण शुल्क का भुगतान करेगी. योजना के तहत 12 मीटर की प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर की बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान भी दिया जाएगा.

परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण हेतु भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी. किराया और उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार करेगी.

आगरा, बरेली और प्रयागराज में विकसित होंगे नए शहर

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहरों के विकास के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है.

सरकार तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना चला रही है. इसके लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे.

योजना के तहत भूमि अर्जन पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत तक हिस्सा राज्य सरकार अधिकतम 20 वर्षों के लिए सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराएगी.

पहले चरण में जारी होंगे 225 करोड़ रुपये

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वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना में 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है. आगरा, बरेली और प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास के लिए कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है.

कैबिनेट ने इसके तहत पहली किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दे दी है. सरकार का कहना है कि इससे विकास प्राधिकरणों को बड़े पैमाने पर शहरी अवसंरचना विकसित करने में मदद मिलेगी.

अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और इससे नियोजित शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा.

सेमीकंडक्टर नीति-2024 में भी बड़ा बदलाव

योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है. सरकार का कहना है कि बदलते औद्योगिक माहौल और निवेशकों की जरूरतों को देखते हुए यह संशोधन जरूरी था.

उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 को 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित किया गया था और यह पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी. संशोधन के जरिए नीति को और अधिक निवेशक अनुकूल बनाया गया है.

सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित होंगे. खास बात यह है कि इन संशोधनों से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा.

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पहले से चल रही हैं 743 इलेक्ट्रिक बसें

गौरतलब है कि वर्तमान में प्रदेश के 15 नगर निगम क्षेत्रों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है.

नई 1725 इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने के बाद उत्तर प्रदेश का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा. सरकार का दावा है कि इससे प्रदूषण में कमी आएगी, यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और आधुनिक शहरी परिवहन प्रणाली को मजबूती मिलेगी.

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