नोटों की गड्डी, 40 दान पेटियां और 50 कर्मचारी: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अयोध्या पहुंची SIT, कड़े पहरे में दूसरे दिन जांच शुरू

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी अयोध्या पहुंच चुकी है. लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली इस टीम ने मंदिर परिसर में करीब आठ घंटे तक दस्तावेजों, दान पेटियों और सीसीटीवी फुटेज की गहन पड़ताल की.

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अयोध्या पहुंची एसआईटी की टीम (Photo- ITG) अयोध्या पहुंची एसआईटी की टीम (Photo- ITG)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ ,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:27 AM IST

लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन की तीन सदस्यीय एसआईटी सोमवार दोपहर 12 बजे अयोध्या पहुंची. इस टीम ने राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित होने के बाद मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच शुरू की. अधिकारियों ने दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक मंदिर परिसर और ट्रस्ट के कार्यालय में डेरा डाला. उन्होंने दान पेटियां खोलने की प्रक्रिया, कर्मचारियों की आवाजाही और बैंक में रकम जमा करने के बही-खातों का बारीकी से निरीक्षण किया.

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गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) की जांच का आज दूसरा दिन है. सोमवार को लगातार 8 घंटे की पड़ताल के बाद आज टीम दोबारा राम मंदिर ट्रस्ट जाकर जांच करेगी. पहले दिन एसआईटी ने चढ़ावा इकट्ठा होने से लेकर बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया और पिछले 1 साल के स्टाफ का ब्यौरा जुटाया था. 

मंदिर परिसर में 8 घंटे चली मैराथन जांच

एसआईटी की टीम तीन अलग-अलग गाड़ियों से वीवीआईपी गेट के रास्ते मंदिर के अंदर दाखिल हुई. जांच टीम के पहुंचने से पहले ही एसबीआई के अधिकारियों की टीम ट्रस्ट के दफ्तर पहुंच चुकी थी. टीम ने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए और फिर उन 40 दान पेटियों का मुआयना किया, जिनमें श्रद्धालु अपना चढ़ावा डालते हैं. अधिकारियों ने यह समझने की कोशिश की कि क्या दान पेटियों से सीधे नकदी निकालना संभव है, हालांकि इसकी संभावना काफी कम नजर आई.

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चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया पर एसआईटी की नजर

जांच का मुख्य केंद्र वह हॉल रहा जहां दान पेटियां खोली जाती हैं. यहां वाराणसी की एक निजी कंपनी के 24 कर्मचारी नोटों की गड्डियां बनाते हैं, जिन पर ट्रस्ट के 12 कर्मचारी निगरानी रखते हैं. इसके अलावा टीसीएस और एसबीआई के 14 कर्मचारी मिलकर नोटों की गिनती करते हैं. एसआईटी ने इन सभी कर्मचारियों के आने-जाने के समय का रजिस्टर, उनकी तलाशी की व्यवस्था और पिछले एक साल में नौकरी छोड़ने वाले कर्मियों का पूरा ब्यौरा खंगाला.

अनुभवी अधिकारियों की टीम कर रही है पड़ताल

एसआईटी में शामिल तीनों अधिकारी अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं. मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत मंदिर प्रशासन और व्यवस्था को देख रहे हैं, जबकि सीबीआई से अनुभव प्राप्त आईजी किरण एस. चोरी की संभावनाओं और तरीकों की पुलिसिया नजरिए से जांच कर रहे हैं. वहीं, वित्त विभाग के नील रतन अकाउंट बुक और बही-खातों में किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी की तलाश कर रहे हैं। टीम ने सीसीटीवी सिस्टम को भी बारीकी से समझा.

ट्रस्ट के पदाधिकारियों से पूछताछ और 15 दिन का समय

जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और व्यवस्थापक गोपाल राव मौजूद रहे, जबकि अनिल मिश्रा इलाज के चलते अनुपस्थित थे. मंदिर व्यवस्थापक गोपाल राव इस दौरान काफी असहज नजर आए और उन्होंने मीडिया के सवालों से दूरी बनाए रखी. एसआईटी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सरकार को सौंपनी है. इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि कितनी चोरी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.

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