पॉक्सो (POCSO) एक्ट के एक मामले में फंसे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली उनकी अग्रिम जमानत आगे भी बरकरार रहेगी.
बता दें कि यह पूरा विवाद प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है. इसमें पॉक्सो (POCSO) एक्ट के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं भी लगाई गई हैं. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने नाबालिग बटुकों का यौन शोषण किया.
प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर 21 फरवरी 2026 को यह एफआईआर दर्ज हुई थी. इसके बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 25 मार्च 2026 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य को अग्रिम जमानत दे दी थी. ऐसे में एफआईआर कराने वाले आशुतोष ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. जिसमें अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने इस पूरे मामले की विस्तार से सुनवाई की. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद साफ कह दिया कि आरोपियों की अग्रिम जमानत रद्द नहीं की जाएगी और इसी के साथ कोर्ट ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका को खारिज कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले से जुड़ी कानूनी जांच और पुलिस की प्रक्रिया पहले की तरह ही आगे चलती रहेगी, लेकिन फिलहाल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य को हाईकोर्ट से मिली राहत जारी रहेगी यानी उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी.
संतोष शर्मा