योगी की तल्खी, केशव की नरमी और फ्रंट फुट पर अखिलेश... शंकराचार्य विवाद से गरमाई यूपी की सियासत

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यूपी की सियासत गरमा गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुलकर मैदान में उतर गए हैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना उन पर निशाना साध रहे हैं. ऐसे में केशव प्रसाद मौर्य ने नरम रुख अख्तियार कर रखा है, जिसे डैमेज कन्ट्रोल माना जाए या फिर कोई सियासी गेम?

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गरमाई सियासत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गरमाई सियासत

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:21 PM IST

प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर छिड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. साधू-संत दो धड़ो में बंट गए हैं तो सियासत भी गर्मा गई है. अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव फ्रंटफुट पर खड़े नजर आ रहे हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए सख्त तेवर अपनाया तो डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य शंकराचार्य पर नरम नजर आ रहे हैं. 

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मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने जा रहे शंकराचार्य को प्रशासन ने यह कह कर रोक दिया था कि संगम नोज पर भीड़ अधिक है. ऐसे में वाहन लेकर नहीं जा सकते. इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुयायियों के साथ हाथापाई भी हुई थी.इस घटना के बाद अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए, जिसे लेकर इस कड़ाके की ठंड में उत्तर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है. 

उत्तर प्रदेश का योदी प्रशासन एक के बाद एक दो नोटिस शंकराचार्य को भेज दी, जिसका अविमुक्तेश्वरनंद ने जवाब देकर भी अपना सख्त तेवर दिखा दिया. मामला लगातार बढ़ता जा रहा है, शंकराचार्य के समर्थन में अखिलेश यादव ही नहीं बल्कि केशव प्रसाद मौर्य भी उतर गए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि शंकराचार्य विवाद किस दिशा में जा रहा है?
 

अखिलेश यादव फ्रंटफुट पर नजर आ रहे
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम नोज पर जाते समय प्रशासन द्वारा रोके जाने के मामले को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव फ्रंटफुट पर खड़े नजर आ रहे हैं. शंकराचार्य के अपमान को लेकरप्रशासन को कठघरे में खड़े करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा. सपा प्रमुख ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से बात किया और उनके साथ मजबूती से खड़े रहने का भी आश्वासन दिया. 

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अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी इन परंपराओं को तोड़ रही है. संतों और शंकराचार्यों का जानबूझकर अपमान किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार ने अपने अधिकारियों के जरिए शंकराचार्यों के साथ दुर्व्यवहार किया है. यादव ने कहा कि यदि एक अधिकारी शंकराचार्यो से पहचान का प्रमाण मांगता है तो सनातन धर्म का इससे अधिक अपमान नहीं हो सकता. 

सपा प्रमुख ने कहा कि योगी सरकार ने सनातन धर्म, शंकराचार्यों, संतों, माघ मेला और इस देश का अपमान किया है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी साधु-संत का अपमान होगा तो समाजवादी पार्टी उसके विरोध में खड़ा रहेगी. सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने कहा कि भाजपा नफरत पैदा करती है. देश में भाईचारा खत्म किया है. क्या किसी को स्नान करने से मना किया जा सकता है? भारत के संविधान में समता, समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे की पूरी व्यवस्था है. लेकिन भाजपा यह तय कर रही है कि गंगा में स्नान कौन करेगा

सीएम योगी शंकराचार्य पर सख्त नजर आए
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम लिए बगैर निशाना ही नहीं साधा बल्कि कालनेमि से तुलना कर दी. योगी ने कहा कि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे. हमें उनसे सावधान होना होगा. हमें उनसे सतर्क रहना होगा. सीएम योगी ने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता.'

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सीएम योगी ने जिस 'कालनेमि' का नाम लिया वह एक मायावी दैत्य था. इसका जिक्र रामायण और रामचरित मानस में बहुत विस्तार से मिलता है. रामकथा के अनुसार कालनेमि रावण का मित्र था और रावण के कहने पर वह हनुमानजी को छलने की कोशिश करता है और फिर मारा जाता है. इतना ही नहीं योगी सरकार के प्रशासन ने जिस तरह से अविमुक्तेश्वरनंद के खिलाफ नोटिस जारी किया है, उसे लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. 

शंकराचार्य प्रयागराज में धरने पर बैठे
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में अपने कैंप के बाहर धरना दिया, भोजन-पानी त्याग दिया और आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके अनुयायियों के साथ दुर्व्यवहार किया तथा शंकराचार्य परंपरा का अपमान किया. अपने 8 पेज के जवाब में उन्होंने नोटिस को अपमानजनक बताया और अदालत की अवमानना तथा मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी. 

अविमुक्तेश्वरानंद के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रोक पट्टाभिषेक पर है,उपाधि के इस्तेमाल पर नहीं. उन्होंने अपने गुरु और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की वसीयत और द्वारका व श्रृंगेरी पीठों के समर्थन का हवाला दिया. उन्होंने पूछा कि दो पुरी शंकराचार्य को एक ही मेले में शिविर क्यों दिए गए.शंकराचार्य के अनुयायियों का कहना है कि योगी सरकार उन को जानबूझकर टारगेट कर रही है, क्योंकि स्वामी योगी सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं.

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केशव मौर्य का डैमेज कन्ट्रोंल या सियासी गेम 
अविमुक्तेश्वरानंद के धरने पर यूपी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का नरम रुख दिखा है. गुरुवार को आजमगढ़ पहुंचे डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा- मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं. उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें. डिप्टी सीएम के बयान के बाद यह चर्चा है कि वसंत पंचमी के दिन स्नान के बाद शंकराचार्य अपना धरना समाप्त करें. 

केशव मौर्य ने दूसरे दिन भी शंकराचार्य के समर्थन में उतर गए. कहा कि हम पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में नतमस्तक होते हैं. हम उनसे विधिवत स्नान करने का अनुरोध करते हैं.हम पूज्य संतों का अपमान करने वालों की जांच करेंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे. तब तक शंकराचार्य जी अपना विरोध खत्म कर इस मामले को यहीं समाप्त करें.

केशव मौर्या के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में देखा जा रहा है. इससे लगता है कि वे शंकराचार्य की स्थिति को मान्यता दे रहे हैं और विवाद को शांत करने की अपील कर रहे हैं. केशव मौर्य मामले को डैमेज कन्ट्रोल कर रहे हैं या फिर शंकराचार्य के बहाने सियासी दांव चल रहे हैं. एक तरफ योगी का कड़ा रुख सनातन धर्म की रक्षा पर जोर देता है, तो केशव मौर्या का बयान शंकराचार्य के प्रति सम्मान दिखाता है.

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