डोली उठने से पहले उठी अर्थी...बेटी का कन्यादान करते ही पिता ने दे दी जान

रायबरेली में बेटी की विदाई से ठीक पहले एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. शादी की खुशियां मातम में बदल गईं, जब पिता का शव घर से कुछ दूरी पर पेड़ से लटका मिला. शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है, जबकि परिवार आर्थिक तंगी और शादी के खर्च को बड़ी वजह बता रहा है.

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बेटी का कन्यादान करते ही पिता ने दे दी जान (Photo: representational image) बेटी का कन्यादान करते ही पिता ने दे दी जान (Photo: representational image)

शैलेन्द्र प्रताप सिंह

  • रायबरेली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के सोममऊ गांव में एक ऐसा दर्दनाक मामला सामने आया, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया. जिस घर से गुरुवार को बेटी की विदाई होनी थी, उसी घर में कुछ ही घंटों पहले पिता की मौत की खबर पहुंच गई. शादी की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं.

विदाई के वक्त लापता हो गए कौशल

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जानकारी के मुताबिक, गांव निवासी कौशल के परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है. बड़ी बेटी खुशबू की शादी उन्नाव में तय हुई थी. 9 जुलाई को शादी की सभी रस्में पूरी हो चुकी थीं और गुरुवार सुबह उसकी विदाई की तैयारी चल रही थी. इसी बीच जब काफी देर तक कौशल घर में दिखाई नहीं दिए तो परिजनों और रिश्तेदारों ने उनकी तलाश शुरू की.

पेड़ से लटका मिला शव

कुछ ही दूरी पर मंदिर के पीछे स्थित एक बाग में उनका शव पेड़ से लटका मिला. यह दृश्य देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए. सूचना मिलने पर हरचंदपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कराया गया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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मृतक के बेटे सूरज ने बताया कि उसके पिता पिछले कई दिनों से बड़ी बहन की शादी को लेकर काफी तनाव में थे. शादी के खर्च के लिए उन्होंने कई लोगों से उधार भी लिया था. सूरज ने बताया कि वह बाहर काम करता है और उसने भी शादी में आर्थिक मदद की थी, लेकिन इसके बावजूद पिता मानसिक रूप से परेशान रहते थे.

कर्ज लेकर की थी बेटी की शादी

स्थानीय लोगों के अनुसार, बेटी की शादी में करीब पांच लाख रुपये खर्च हुए. कौशल पेशे से लकड़ी के फर्नीचर बनाने का काम करते थे. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए शादी का खर्च जुटाने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा था. ग्रामीणों का कहना है कि शायद यही आर्थिक दबाव उन्हें भीतर ही भीतर परेशान कर रहा था.

अपर पुलिस अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है. उन्होंने कहा कि मृतक के बेटे ने न तो दहेज को लेकर ससुराल पक्ष पर कोई आरोप लगाया है और न ही किसी से दुश्मनी की बात कही है. फिर भी पुलिस हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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इस घटना के बाद सबसे बड़ा सदमा उस बेटी को लगा, जिसकी विदाई होनी थी. जिस दिन उसे नए जीवन की शुरुआत करनी थी, उसी दिन उसे अपने पिता को अंतिम विदाई देनी पड़ी. पूरे गांव में इस घटना को लेकर शोक का माहौल है.
 

 

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