अमेरिकी बनकर करते थे बात... नोएडा में 10 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, अमेरिका-यूरोप के लोगों को बनाते थे शिकार

नोएडा पुलिस ने एक ऐसे साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी एयरलाइन टिकट बुकिंग के नाम पर अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को निशाना बना रहा था. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों के जरिए विदेशी ग्राहकों को फंसाने वाले इस रैकेट से जुड़े 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जांच में करीब 10 करोड़ रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं.

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आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल और डिजिटल डेटा बरामद. (Photo: Screengrab) आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल और डिजिटल डेटा बरामद. (Photo: Screengrab)

भूपेन्द्र चौधरी

  • नोएडा,
  • 14 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

अगर आपने कभी ऑनलाइन एयरलाइन टिकट सर्च किया है, तो यह खबर आपको चौंका सकती है. नोएडा पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी एयरलाइन टिकट बुकिंग के नाम पर अमेरिका और यूरोप के लोगों को निशाना बना रहा था. इस गिरोह के सदस्य खुद को एयरलाइन कंपनी या ट्रैवल एजेंसी का कर्मचारी बताकर विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये ठग रहे थे.

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नोएडा पुलिस ने इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि यह कोई साधारण साइबर फ्रॉड नहीं था, बल्कि बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था. शुरुआती जांच में करीब 10.50 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 10 करोड़ रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं.

पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से 13 लैपटॉप, 16 मोबाइल और साइबर क्राइम में इस्तेमाल होने वाले कई डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं. जांच में सामने आया कि आरोपी पेड विज्ञापन चलाते थे. ये विज्ञापन खासतौर पर अमेरिका और यूरोप के लोगों को टारगेट करते थे.

यह भी पढ़ें: थाईलैंड से भारत लाया गया साइबर ठगी का मास्टरमाइंड गणेश बालासो काले, CBI की बड़ी कामयाबी

जब कोई विदेशी नागरिक विज्ञापन में दिए गए नंबर पर संपर्क करता था, तो कॉल सीधे आरोपियों के सिस्टम पर पहुंचती थी. इसके बाद शुरू होता था ठगी का खेल. आरोपी खुद को किसी नामी एयरलाइन या ट्रैवल कंपनी का प्रतिनिधि बताकर सस्ती दरों पर टिकट दिलाने का भरोसा देते थे.

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गिरोह के सदस्य अंग्रेजी में अमेरिकी और यूरोपीय लहजे (एक्सेंट) में बात करने में माहिर थे. इसी वजह से विदेशी नागरिक आसानी से उन पर भरोसा कर लेते थे. बातचीत के दौरान आरोपी पीड़ितों से भुगतान और अन्य जरूरी जानकारियां हासिल कर लेते थे.

पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह अंतरराष्ट्रीय पेमेंट गेटवे के जरिए डॉलर में रकम वसूलता था. कई बार पीड़ितों को फर्जी टिकट भेज दिए जाते थे, जबकि कई मामलों में टिकट जारी ही नहीं किए जाते थे. आरोपियों की चालाकी यह थी कि वे अक्सर कई महीने बाद की यात्रा के लिए टिकट बुक करते थे. इससे पीड़ितों को धोखाधड़ी का पता काफी देर से चलता था.

जब तक शिकायत सामने आती, आरोपी अपने मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, सिस्टम और अन्य डिजिटल संसाधन बदल चुके होते थे. इस तरह वे लंबे समय तक कानून की नजरों से बचते रहे.

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार सभी आरोपी पढ़े-लिखे हैं और तकनीकी जानकारी रखते हैं. पुलिस का कहना है कि बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है. आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों तथा कई अन्य पीड़ितों की जानकारी सामने आ सकती है.

फिलहाल नोएडा पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह सिर्फ भारत से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले साइबर अपराध नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है. जांच एजेंसियां अब विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर तफ्तीश कर रही हैं.

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