साइबर क्राइम पुलिस ने जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. साइबर क्राइम पुलिस नोएडा ने इस मामले में शहर के सेक्टर 22 में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी की और पांच आरोपियों को पकड़ा है. यह कॉल सेंटर लंबोदर इंस्टीट्यूट के नाम से संचालित हो रहा था. साइबर ठग प्रतिष्ठित एविएशन कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे.
नोएडा पुलिस की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई प्रतिबिम्ब पोर्टल से मिली सटीक सूचना, तकनीकी विश्लेषण के आधार पर सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस के सहयोग से की गई. पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे बेरोजगार युवाओं को एविएशन कंपनियों, ट्रेनिंग संस्थानों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर अलग-अलग चरण में मोटा पैसा ऐंठते थे.
पुलिस के मुताबिक जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को निम्बस, स्टार एयरवेज, एयरोफ्लाई, एविएशन एकेडमी, फ्यूचर एकेडमी ट्रेनिंग एंड एविएशन और कोर एविएटर जैसी संस्थाओं का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे. इसके बाद ऑनलाइन इंटरव्यू, सेलेक्शन, ऑफर लेटर, एडमिशन कन्फर्मेशन, ट्रेनिंग, मेडिकल, यूनिफॉर्म, सिक्योरिटी डिपॉजिट, रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर हजारों से लाखों रुपये तक की रकम जमा कराई जाती थी.
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से संबंधित एक फर्जी वेबसाइट भी बना रखी है. इसी के जरिये नौकरी और अन्य सेवाओं के नाम पर आवेदन मंगाकर लोगों को ठगा जाता था. कई एविएशन संस्थानों के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर फर्जी ऑफर लेटर और प्रमाण पत्र तैयार किए जाते थे, जिससे अभ्यर्थियों को आसानी से झांसे में लिया जा सके. ठगी से मिली रकम अलग-अलग बैंक खातों में मंगाई जाती थी.
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आरोपी बाद में ये रकम आपस में बांट लेते थे. इस मामले में कई शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज मिली हैं. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन, 6 लैपटॉप, एक सीपीयू, 10 एक्टिव सिम कार्ड, 5 हेडफोन, 2 चेकबुक, 4 डेबिट कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, दो कंपनियों की मोहर, 13 फर्जी एविएशन प्रमाण-पत्र, बड़ी संख्या में फर्जी ऑफर लेटर और एडमिशन कन्फर्मेशन, 76 पृष्ठों का कॉलिंग डेटा बरामद किया है.
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नोएडा पुलिस ने आरोपियों के पास से कॉलिंग स्क्रिप्ट, अभ्यर्थियों का विवरण, डायरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए हैं. पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क की जांच जारी है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि देशभर में कितने लोगों को इस गिरोह ने अपना शिकार बनाया.
भूपेन्द्र चौधरी