गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा के थाना फेज-1 क्षेत्र में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी जरूरतमंद लोगों को आसान शर्तों पर कम ब्याज दर में लोन दिलाने का भरोसा देते थे. जब पीड़ित उनकी बातों में आ जाते थे, तो उनसे प्रोसेसिंग फीस जमा कराई जाती थी. इसके बाद उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ओटीपी और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी भी हासिल कर ली जाती थी.
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गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन, लैपटॉप, चेकबुक, पासबुक, कॉलिंग डेटा, स्क्रिप्ट बुक, बिलिंग बुक, इंटरनेट राउटर समेत कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं.
'ऑपरेशन साइबर वज्र' में पुलिस ने ऐसे खोला पूरे नेटवर्क का राज
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत 11 जुलाई को थाना फेज-1 पुलिस ने 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के दौरान 159 संदिग्ध बैंक खातों की जांच की.
जांच के दौरान पुलिस ने 19 रेड जोन चिह्नित किए और करीब 2500 मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया. एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों, स्थानीय खुफिया सूचना और सर्विलांस की मदद से पुलिस सेक्टर-2 स्थित डी-80 की पहली मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर तक पहुंची.
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से पवन कुमार, मोहित, हर्ष शर्मा, स्वाती और प्रीती को गिरफ्तार कर लिया. शुरुआती पूछताछ में सभी आरोपियों ने फर्जी लोन के नाम पर लोगों को निशाना बनाने की बात स्वीकार की है.
लोन नहीं, सिर्फ ठगी... फीस लेने के बाद बंद कर देते थे संपर्क
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे सोशल मीडिया, कॉल और अन्य माध्यमों से लोन की तलाश कर रहे लोगों से संपर्क करते थे. उन्हें बेहद कम ब्याज दर पर तत्काल लोन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जाता था.
विश्वास जीतने के बाद आरोपी प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम अपने खातों में जमा कराते थे. इसके बाद पीड़ितों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी भी हासिल कर ली जाती थी. फीस लेने के बाद न तो लोन स्वीकृत किया जाता था और न ही जमा की गई रकम लौटाई जाती थी.
पुलिस का कहना है कि गिरोह ने इसी तरीके से देशभर के सैकड़ों लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की है. गिरोह से जुड़े मोबाइल नंबरों के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से 10 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं.
बैंक खातों और नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और उनके पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर की जाती थी.
अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस साइबर नेटवर्क से जुड़े कई और खुलासे हो सकते हैं. पुलिस अन्य राज्यों में दर्ज शिकायतों का भी मिलान कर रही है ताकि पीड़ितों की संख्या और ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाया जा सके.
फिलहाल गिरफ्तार पांचों आरोपियों से पूछताछ जारी है. पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और इस साइबर ठगी के पीछे सक्रिय अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.
भूपेन्द्र चौधरी