16 साल बाद इंसाफ, 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानकर पूर्व प्रधान समेत 2 को फांसी, किसान राजबीर सिंह हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला

मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 16 साल पुराने किसान राजबीर सिंह हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. न्यायाधीश रवि दिवाकर की अदालत ने प्रधानी चुनाव की रंजिश में हत्या करने वाले पूर्व प्रधान सहदेव और प्रमोद को फांसी की सजा सुनाई है. दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

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किसान हत्याकांड में पूर्व प्रधान समेत 2 को मौत की सजा. (Photo: Screengrab) किसान हत्याकांड में पूर्व प्रधान समेत 2 को मौत की सजा. (Photo: Screengrab)

संदीप सैनी

  • मुजफ्फरनगर ,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:49 PM IST

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट से सोमवार को एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है. अदालत ने करीब 16 साल पुराने एक किसान की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए गांव के पूर्व प्रधान सहित दो मुख्य अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट ने इसके साथ ही दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी लगाया है. फैसला आते ही दोनों दोषियों को पुलिस अभिरक्षा में तुरंत जेल भेज दिया गया.

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क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद मुजफ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मांडी गांव का है. गांव में प्रधानी चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से गहरी रंजिश चली आ रही थी. इसी चुनावी दुश्मनी के चलते 16 साल पहले, 24 अगस्त 2010 को मांडी गांव के रहने वाले किसान राजबीर सिंह की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वो अपने खेत पर रोज की तरह काम करने गए हुए थे. हमलावरों ने घात लगाकर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी.

अज्ञात से शुरू हुई थी जांच, दो की हो चुकी है मौत

वारदात के बाद मृतक किसान राजबीर सिंह के बेटे प्रदीप ने तितावी थाने में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने जब इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए जांच शुरू की, तो प्रधानी की रंजिश का एंगल सामने आया. जांच के दौरान गांव के चार लोग सहदेव, प्रमोद, अमित और विपिन शर्मा के नाम इस जघन्य हत्याकांड में प्रकाश में आए. पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. हालांकि, इस मामले में ट्रायल पूरा होने से पहले ही दो अभियुक्तों (अमित और विपिन शर्मा) की पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) के दौरान मौत हो चुकी है.

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मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए सरकारी अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि यह केस 16 वर्षों से अदालत में लंबित था. इसकी पैरवी हमारे साथी एडीजीसी कुलदीप कुमार द्वारा बहुत मजबूती से की गई. इस मामले का ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC-3) के माननीय न्यायाधीश श्री रवि दिवाकर जी के न्यायालय में चल रहा था. अभियोजन पक्ष की तरफ से सभी गवाहों, बयानों और पुलिस पत्रों को न्यायालय के समक्ष पूरी प्रामाणिकता के साथ साबित किया गया.

अदालत में सरकारी पक्ष ने रखी मजबूत दलीलें

सरकारी वकील ने यह भी साफ किया कि इस प्रकार के गंभीर और संवेदनशील मामलों की मॉनिटरिंग खुद माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय, स्थानीय जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) की पूरी टीम द्वारा लगातार की जा रही थी. यही वजह रही कि पुलिस और अभियोजन पक्ष सभी पुख्ता साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश करने में सफल रहे और कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में मानते हुए दोषियों को अधिकतम दंड से दंडित किया. 16 साल लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को पूरा न्याय मिला है.


 

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