लखनऊ अग्निकांड: कैसे अखाड़ा बन गया फायर डिपार्टमेंट? पहले CM को चिट्ठी, अब कर्मचारी यूनियन भी मैदान में उतरा

लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद चार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इनमें से एक अधिकारी के सस्पेंशन को गलत बताया है और हाई-लेवल तकनीकी जांच की मांग की है. समिति का कहना है कि आग शॉर्ट सर्किट या अंदरूनी इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण लगी थी और अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं.

Advertisement
लखनऊ हत्याकांड में 4 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था. (Photo- ITGD) लखनऊ हत्याकांड में 4 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था. (Photo- ITGD)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:06 AM IST

लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था. अब उत्तर प्रदेश की विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति को पत्र लिखकर ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के सस्पेंशन को गलत और एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन बताया है. 

दरअसल आग लगने के बाद गौरव कुमार (बिजली विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर कलेक्शन), कमलेंद्र कुमार सिंह, FSSO (फायर डिपार्टमेंट) इंदिरा नगर, अनिल कुमार AE (LDA), और प्रमोद कुमार JE (LDA) को सस्पेंड कर दिया गया था.

Advertisement

कमेटी ने अग्निकांड की हाई-लेवल, बिना किसी भेदभाव के और एक्सपर्ट टेक्निकल जांच की मांग की. कमेटी ने ये भी कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए.

'इंजीनियर आग लगने के लिए जिम्मेदार नहीं'

कमेटी ने अपने एक बयान में कहा, 'घटना के संबंध में जानकीपुरम जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का सस्पेंशन गलत और जल्दबाजी में किया गया एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन है. कमेटी का मानना ​​है कि मौजूद तथ्यों के आधार पर, इंजीनियर आग लगने के हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है.'

संघर्ष समिति ने बताया कि उस जगह पर 2016 से एक वैलिड कमर्शियल बिजली कनेक्शन था, जिसमें 20 किलोवाट तक का मंजूर लोड बढ़ाने का अप्रूवल था.

समिति का कहना है कि वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग के बाद लागू मौजूदा सिस्टम के तहत, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को आमतौर पर जुलाई में ही डिमांड से जुड़ी जानकारी मिलती है. इसलिए, लोड बढ़ाने या उससे जुड़े मामलों पर कोई भी कार्रवाई उस समय के बाद ही तय प्रोसेस के हिसाब से शुरू की जा सकती है.

Advertisement

कैसे लगी आग?

कमिटी का कहना है कि ऐसे में जून में हुए इस हादसे के लिए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग शॉर्ट सर्किट या बिल्डिंग के अंदरूनी इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी की वजह से लगी थी. ऐसे में कमिटी ने कहा कि अंदरूनी वायरिंग, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, फायर सेफ्टी सिस्टम और सेफ्टी स्टैंडर्ड का पालन करने की जिम्मेदारी बिल्डिंग मालिक की है.

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अपने बयान में ये भी कहा कि इलेक्ट्रिकल सेफ्टी डायरेक्टरेट सेफ्टी क्लीयरेंस जारी करने और जरूरी इंस्पेक्शन करने के लिए जिम्मेदार है.

कमिटी ने सस्पेंशन ऑर्डर में उस आरोप को भी खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने ये जानते हुए भी कार्रवाई नहीं की कि बिजली की खपत मंजूर लोड से ज्यादा है. उन्होंने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन के मौजूदा वर्टिकल स्ट्रक्चर के तहत, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को कस्टमर्स की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे असल लोड के बारे में रियल-टाइम अपडेट अपने आप नहीं मिलता है.

यह भी पढ़ें: लखनऊ अग्निकांड: सीने में दर्द का बहाना नहीं आया काम, बिल्डिंग मालिक को 14 दिन की जेल

कमिटी ने बताया कि अगर कोई कस्टमर मंजूर लोड से ज्यादा बिजली इस्तेमाल कर रहा है और जरूरी जानकारी समय पर संबंधित अधिकारी तक नहीं पहुंचती है, तो वर्टिकल स्ट्रक्चर में कमियों और जानकारी शेयर करने के तरीके में खराबी की जांच करना जरूरी है.

Advertisement

उन्होंने कहा, 'इन सिस्टम से जुड़े मामलों की जांच किए बिना किसी अधिकारी को सस्पेंड करना एक सही एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस नहीं माना जा सकता.'

फायर सब स्टेशन ऑफिसर ने CM योगी को लिखा था लेटर

वहीं सस्पेंड किए गए  इंदिरा नगर के फायर सब स्टेशन ऑफिसर कमलेंद्र कुमार सिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कार्रवाई को गलत बता था. पत्र में उन्होंने लिखा था, 'मेरे खिलाफ कार्रवाई नाइंसाफी है. मेरा कार्यक्षेत्र सीमित है. भवनों को फायर क्लीयरेंस देने का अधिकार मुझ पर नहीं है. ये जिम्मेदारी CFO पर है. अग्निकांड में सारी कमी CFO की है, इसलिए CFO पर एक्शन होना चाहिए.'

हालांकि बाद में कमलेंद्र कुमार सिंह अपने बयान से मुकर गए थे और कहा था कि उनसे ये सब जबरन कहलवाया गया था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »