30 सेकंड में बच्चे को 8 बार पटका... मासूम आरव की जितेंद्र ने क्यों ली थी जान, दरिंदगी की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश में डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पटककर हत्या करने के मामले में आरोपी जितेंद्र को मौत की सजा सुनाई गई है. जानकारी के मुताबिक, बच्चे को आठ बार सड़क पर पटका गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

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आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसका बच्चे की मां के साथ प्रेम प्रसंग था. (Photo: ITG) आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसका बच्चे की मां के साथ प्रेम प्रसंग था. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • फिरोजाबाद,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:45 PM IST

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के शिकोहाबाद स्थित यादव कॉलोनी से एक बच्चे की हत्या का गंभीर मामला सामने आया था. आरोप लगाया गया कि 30 मई को बदायूं निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पटककर उसकी हत्या कर दी. महज 30 सेकंड में आरोपी ने बच्चे को आठ बार पटका. यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी.

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घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. अब इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिला जज ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई. इस हत्याकांड में पुलिस ने केवल 6 दिन में चार्जशीट दाखिल की, जबकि अदालत ने घटना के 40 दिन के भीतर ही फैसला सुना दिया.

बच्चे की मां के साथ प्रेम प्रसंग का दावा

जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसका बच्चे की मां के साथ प्रेम प्रसंग था और वह उसे ब्लैकमेल कर रही थी. प्रेम-प्रसंग और आपसी विवाद के चलते उसने इस वारदात को अंजाम दिया. वहीं, मृतक बच्चे की मां का कहना था कि विराज उससे शादी करना चाहता था और बच्चे को रास्ते की रुकावट मानता था.

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इस बीच जब बच्चे की मां अपनी एक रिश्तेदार के घर गई थी, तब आरोपी टॉफी दिलाने के बहाने बच्चे को अपने साथ ले गया. इसके बाद उसने बच्चे को सड़क पर पटककर गंभीर रूप से घायल कर दिया. इसके बाद तुरंत बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

वहीं, बदायूं में रहने वाले विराज के तीन भाइयों सोनू, राजीव और मुनीश ने उसके अतीत और व्यवहार को लेकर कई बातें कहीं. परिवार के मुताबिक, अप्रैल 2010 में पिता की मौत के बाद परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर असर हुआ. जिसके चलते विराज की पढ़ाई बीच में छूट गई. इसके बाद उसने मारुति वैन चलाकर टैक्सी का काम किया, लेकिन बाद में उसने घर के पास एक छोटी परचून की दुकान शुरू कर दी.

परिवार का कहना है कि विराज का स्वभाव शांत था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसके व्यवहार में बदलाव देखा गया. परिवार ने बताया कि मासूम  की हत्या के बाद विराज ने अपने बड़े भाई राजीव को फोन किया था. फोन पर वह रो रहा था, उसने बस इतना कहा कि मेरे साथ बड़ा धोखा हुआ है.

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परिवार ने साफ कहा कि विराज ने जो किया, वह काफी गलत और खौफनाक है. एक मासूम बच्चे के साथ हुई हैवानियत को किसी तरीके से सही नहीं बताया जा सकता है.

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