शामली के चर्चित धर्मांतरण मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. करोड़पति दवा कारोबारी के इकलौते बेटे आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली ने दावा किया है कि उसने कई साल पहले अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपना लिया था, लेकिन अपनी तीन सगी बहनों की शादी प्रभावित न हो इसलिए इस बात को सबसे छिपाकर रखा. वहीं शामली के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अक्षय यादव की अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले में जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं.
तीन बहनों के कारण वर्षों तक छिपाई बात
आयुष मलिक ने दावा किया कि उन्होंने कई साल पहले इस्लाम धर्म अपना लिया था. हालांकि उन्होंने यह बात सार्वजनिक नहीं की क्योंकि उनकी तीन बहनों की शादी होनी बाकी थी. मीडिया से बातचीत में आयुष ने कहा कि यदि उस समय परिवार और समाज को उनके धर्म परिवर्तन की जानकारी मिल जाती तो इसका असर उनकी बहनों के रिश्तों पर पड़ सकता था. इसी वजह से उन्होंने अपने फैसले को निजी रखा. आयुष का कहना है कि अब जब बहनों की शादी हो चुकी है, तब उन्होंने खुलकर अपनी पहचान सामने रखी है.
चांदनी से मुलाकात के बाद बदली जिंदगी
पुलिस रिकॉर्ड और शिकायत के अनुसार, आयुष की पहचान चांदनी कुरैशी से हुई थी. दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में शादी हुई. हालांकि यहां से कहानी दो हिस्सों में बंट जाती है. आयुष का दावा है कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया और किसी ने उन पर दबाव नहीं बनाया. वहीं उनके पिता का आरोप है कि चांदनी और उससे जुड़े लोगों ने शादी का लालच देकर उनके बेटे का धर्म परिवर्तन कराया.
मैं मुसलमान हूं और वापस नहीं जाऊंगा
विवाद बढ़ने के बाद आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली पहली बार खुलकर मीडिया के सामने आए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, मैं मुसलमान हूं और हिंदू धर्म में वापस नहीं जाऊंगा. आयुष ने यह भी दावा किया कि उन पर लगातार सामाजिक दबाव बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत भी बाहरी प्रभाव और दबाव का परिणाम है. आयुष ने खुद को बालिग और अपने फैसले लेने में सक्षम बताते हुए कहा कि उन्होंने जो भी निर्णय लिया, वह पूरी तरह स्वेच्छा से लिया.
पिता ने लगाया संपत्ति हड़पने की साजिश का आरोप
दूसरी तरफ आयुष के पिता देवराज मलिक इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहे हैं. दवा कारोबारी देवराज मलिक ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके बेटे का धर्म परिवर्तन शादी के बहाने कराया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि इसके पीछे उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश हो सकती है. शिकायत में कहा गया है कि आयुष को दिल्ली ले जाया गया, जहां कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर शादी कराई गई. इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया.
एक मौलाना समेत नौ लोगों पर मुकदमा
पुलिस ने मामले की जांच के बाद एक मौलाना सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है. इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और जबरन वसूली से संबंधित धाराएं शामिल हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और अभी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
चांदनी और उसके पिता गिरफ्तार
मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई तब हुई जब पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया. दोनों को 7 जून को हिरासत में लिया गया था. इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. शामली के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अक्षय यादव की अदालत ने मंगलवार को चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले में जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं. अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जानी बाकी है. अदालत ने इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जमानत याचिका खारिज होने के बाद मामले की जांच और अधिक गंभीरता से आगे बढ़ सकती है.
सुरक्षा बढ़ी, दुकान पर तैनात किए गए पुलिसकर्मी
मामले को लेकर बढ़ते विवाद और सामाजिक तनाव की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है. शामली के क्षेत्राधिकारी (नगर) जितेंद्र सिंह के अनुसार संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. विशेष रूप से हनुमान रोड क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई है, जहां आयुष रह रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि आयुष की दुकान पर भी दो पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना को रोका जा सके.
एसआईटी कर रही जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है. सीओ जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित यह टीम पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है. पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में भी लगातार छापेमारी कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर
फिलहाल इस पूरे मामले में दो दावे आमने-सामने खड़े हैं. एक ओर आयुष मलिक हैं, जो धर्म परिवर्तन को अपनी व्यक्तिगत पसंद और स्वैच्छिक निर्णय बता रहे हैं. दूसरी ओर उनके पिता हैं, जो इसे सुनियोजित साजिश और अवैध धर्मांतरण का मामला मानते हैं. पुलिस, एसआईटी और अदालत की कार्रवाई के बीच अब सबकी नजर जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई है.
शरद मलिक