शुगर मिल की गर्म राख में धंसे 4 बच्चों में से एक की मौत, डेढ़ महीने पहले हुआ था हादसा

बिजनौर में डेढ़ महीने पहले सड़क किनारे पड़ी गर्म राख में झुलसने वाले चार बच्चों में से एक 13 वर्षीय साद की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस दर्दनाक घटना ने औद्योगिक कचरे के निस्तारण और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजन अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं.    

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गर्म राख से धंसे 4 बच्चों में से 1 की मौत (Photo: itg) गर्म राख से धंसे 4 बच्चों में से 1 की मौत (Photo: itg)

ऋतिक राजपूत

  • बिजनौर,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

उत्तर प्रदेश के बिजनौर-झालू मार्ग पर डेढ़ महीने पहले सड़क किनारे पड़ी गर्म राख में झुलसने से चार बच्चे घायल हो गए थे.  अब इनमें से एक की मौत हो जाने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है. करीब डेढ़ महीने से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे 13 साल के साद ने मंगलवार रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस दुखद घटना के बाद पीड़ित परिवारों में गहरा आक्रोश है और वे गर्म राख डालने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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यह हादसा एक मई को शहर कोतवाली क्षेत्र के झालू रोड स्थित एक आम के बाग के पास हुआ था. उस दिन आए तेज आंधी-तूफान के बाद आसपास के कई बच्चे बाग में गिरे आम बीनने और खेलने के लिए पहुंचे थे. प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार बाग के रखवाले ने बच्चों को वहां से डांटकर भगा दिया. बच्चे भागते हुए सड़क किनारे पड़े राख के बड़े ढेर की ओर पहुंच गए, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि राख ऊपर से ठंडी दिखाई देने के बावजूद अंदर से बेहद गर्म थी.

जैसे ही बच्चे राख की सतह पर पहुंचे, उनके पैर धंस गए और वे गंभीर रूप से झुलस गए. बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे किसान मौके पर दौड़े और उन्हें किसी तरह बाहर निकाला. इसके बाद सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया.

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इस हादसे में साद, उजैद, साहिल और इशान गंभीर रूप से घायल हुए थे. लंबे इलाज के बावजूद साद की जान नहीं बच सकी. उसकी मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है. परिजनों का आरोप है कि यदि सड़क किनारे सुगर मिल की इतनी खतरनाक गर्म राख नहीं डाली जाती तो यह हादसा कभी नहीं होता. उनका कहना है कि जिम्मेदार फैक्ट्री प्रबंधन और अन्य दोषी व्यक्तियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.

गौरतलब है कि घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी थी. एसडीएम सदर रितु रानी के नेतृत्व में गठित टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था. जांच टीम में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खाद्य सुरक्षा विभाग, कारखाना विभाग, तहसील प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी शामिल थे. अधिकारियों ने मौके से राख के नमूने एकत्र किए और यह जानने का प्रयास किया कि आखिर इतनी गर्म राख वहां कैसे और किसके द्वारा डाली गई.

जांच के दौरान अधिकारियों ने संबंधित बाग का निरीक्षण करने के बाद बिजनौर शुगर मिल पहुंचकर भी पूछताछ की थी. प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि यदि जांच में किसी व्यक्ति, संस्था या फैक्ट्री की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. तहसील प्रशासन की ओर से बाग मालिक को तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से संबंधित शुगर मिल को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी.

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अब जबकि इस हादसे ने एक मासूम की जान ले ली है, मामले ने केवल एक दुर्घटना का नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और औद्योगिक कचरे के निस्तारण की व्यवस्था का भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि फैक्ट्रियों से निकलने वाले गर्म अपशिष्ट और राख का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है. साद की मौत के बाद प्रशासन पर भी जांच को जल्द पूरा कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करने का दबाव बढ़ गया है. वहीं बाकी तीन बच्चों का इलाज अभी भी जारी है और उनके परिवार लगातार उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं. 
 

 

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