श्राद्ध कर चुके बेटों के सामने जिंदा लौटी मां... 11 साल बाद हुआ चमत्कार, DJ बजवाकर फैमिली ने किया डांस

जिस मां को बेटों ने दुनिया से जा चुका मान लिया था... जिसके नाम का श्राद्ध तक कर दिया गया था... वही मां 11 साल बाद अचानक जिंदा लौट आई. ये कहानी बागपत के दोझा गांव की है, जिसने लोगों को चौंकाने के साथ भावुक कर दिया. 80 साल की लीलावती घर लौटीं तो परिवार वालों ने जश्न मनाया. बेटे -बहुएं सब DJ पर जमकर नाचे.

Advertisement
11 साल बाद घर लौट आईं बुजुर्ग महिला. (Photo: Screengrab) 11 साल बाद घर लौट आईं बुजुर्ग महिला. (Photo: Screengrab)

मनुदेव उपाध्याय

  • बागपत,
  • 22 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:31 PM IST

बागपत के दोझा गांव की एक शाम को लोग शायद कभी भूल नहीं पाएंगे. ढलती धूप, गांव की गलियों में हलचल, और एक घर के बाहर बजता तेज डीजे... इस जश्न में खुशी के आंसू थे, हैरानी थी, और एक ऐसा चमत्कार था, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया. क्योंकि जिस मां को 11 साल पहले इस दुनिया से जा चुका मान लिया गया था... जिसके नाम का श्राद्ध तक कर दिया गया था... वही मां अचानक जिंदा घर लौट आई थी. 

Advertisement

यह कहानी है 80 साल की लीलावती की... एक ऐसी मां, जिसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह जाए. साल 2015... फरवरी का महीना. दोझा गांव में लीलावती के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. 9 फरवरी को उनके पति का निधन हो गया. घर में मातम पसरा था. परिवार इस गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि तीन महीने बाद एक और घटना हो गई. लीलावती अचानक लापता हो गईं.

पहले तो परिवार को लगा कि शायद वह कहीं आस-पास होंगी, लेकिन जैसे-जैसे घंटे दिनों में बदले और दिन हफ्तों में, चिंता बढ़ती गई. बेटे, बहुएं, रिश्तेदार- सब उन्हें ढूंढने निकल पड़े. गांव-गांव, शहर-शहर, रिश्तेदारी, अस्पताल, यहां तक कि आसपास के जिलों में भी तलाश की गई, लेकिन लीलावती का कहीं कोई सुराग नहीं मिला.

Advertisement

यह भी पढ़ें: यूट्यूब के एक कमेंट ने बिछड़े बेटे को परिवार से मिलाया, भाभी की डांट से छोड़ दिया था घर

महीनों की तलाश के बाद भी जब कुछ हाथ नहीं लगा, तो परिवार की उम्मीद धीरे-धीरे टूटने लगी. हर दरवाजा खटखटाने के बाद जब सन्नाटा ही मिला, तो आखिरकार उन्होंने मान लिया कि लीलावती अब इस दुनिया में नहीं रहीं.

दिल भारी था, लेकिन परंपराएं निभानी थीं. परिवार ने भारी मन से उनका श्राद्ध कर दिया. उस दिन घर में एक अजीब सन्नाटा था- जैसे किसी ने उम्मीद की आखिरी किरण भी बुझा दी हो.

समय बीतता गया... दिन महीनों में बदले, महीने सालों में... और धीरे-धीरे जिंदगी अपनी रफ्तार पकड़ने लगी. लेकिन दिल के किसी कोने में मां की याद हमेशा जिंदा रही.

एक अनजानी कहानी, दूर कहीं...

उधर, हजारों किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर के राजौरी में एक अलग कहानी चल रही थी. भारतीय सेना के जवानों को एक दिन एक लावारिस बुजुर्ग महिला मिली. वह कमजोर थीं, थकी हुई थीं और अपनी पहचान बताने में असमर्थ थीं. लेकिन सेना के जवानों ने उन्हें यूं ही नहीं छोड़ दिया. उन्होंने उनकी देखभाल की, खाना दिया, इलाज कराया और सबसे अहम- उनकी पहचान जानने की कोशिश शुरू की.

दिनों की मेहनत और लगातार प्रयासों के बाद धीरे-धीरे उनकी पहचान सामने आई- वह कोई और नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली लीलावती थीं.

Advertisement

एक फोन कॉल... और सब बदल गया

फिर वो पल आया, जिसने सब कुछ बदल दिया. सेना के जवानों ने लीलावती के परिवार से संपर्क किया. फोन की घंटी बजी, और जब दूसरी तरफ से मां की सलामती की खबर मिली.

परिवार को पहले तो यकीन ही नहीं हुआ. जिनकी मौत मानकर उन्होंने सारे संस्कार कर दिए थे, वो जिंदा हैं. जब सच्चाई सामने आई, तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

परिवार के लोग तुरंत राजौरी के लिए रवाना हुए. दिल में हजारों सवाल, आंखों में उम्मीद और डर- क्या वाकई मां मिलेंगी? और फिर वो पल आ गया. जैसे ही उन्होंने लीलावती को देखा, सबकी आंखों से आंसू बहने लगे. 11 साल बाद मां सामने थीं. वक्त जैसे थम गया था. लीलावती ने भी अपने बेटों को पहचाना- और बस, उस पल ने दर्द, हर इंतजार को खत्म कर दिया.

वापसी हुई तो गांव में दिखा अलग नजारा

जब लीलावती अपने गांव दोझा लौटीं, तो वहां का नजारा बिल्कुल अलग था. खबर फैली- मां वापस आ गईं. गांव के लोग इकट्ठा हो गए. घर के बाहर डीजे बजने लगा. बेटे, बहुएं, पोते- सब खुशी से झूम उठे. आंसुओं के बीच हंसी थी, दर्द के बाद जश्न था. 80 साल की लीलावती खुद भी इस जश्न में शामिल हुईं. वो भी मुस्कुरा रही थीं, झूम रही थीं... जैसे जिंदगी ने उन्हें दूसरा मौका दिया हो.

Advertisement

यह भी पढ़ें: गलत ट्रेन में बैठा 6 साल का बच्चा, 13 साल बाद 2,500 किमी दूर से घर लौटा... मां से मिलते ही छलक पड़े आंसू

लीलावती के पोते बिल्लू बताते हैं कि दादी 11 साल पहले लापता हो गई थीं. हमने उन्हें मृत मान लिया था, श्राद्ध भी कर दिया था. जब सेना के जवानों का फोन आया कि वो जिंदा हैं, तो यकीन ही नहीं हुआ. आज हम बहुत खुश हैं. वहीं उनके बेटे सतीश कहते हैं कि जब हमें पता चला कि मां जिंदा हैं, तो हम तुरंत राजौरी पहुंचे. मां ने हमें पहचान लिया... वो पल शब्दों में नहीं बता सकता. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है.

इस कहानी में सेना की भूमिका सबसे खास रही. जवानों ने बुजुर्ग महिला की देखभाल की, उन्हें उनके परिवार तक पहुंचाया. यह इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल थी.

कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ देती है, जहां सब खत्म लगता है... लेकिन कहीं न कहीं एक नई शुरुआत हमारा इंतजार कर रही होती है. लीलावती की वापसी ने यही साबित किया कि कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं... बस वक्त के साथ फिर से जी उठती हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »