अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी की जांच के बीच अब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दानराशि की गिनती की प्रक्रिया और उसमें अपनाए गए तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं.
मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर में प्रतिदिन आने वाली करोड़ों रुपये की दानराशि की गिनती का जिम्मा बिना किसी विधिक टेंडर प्रक्रिया के सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज को सौंपा गया था. यह एजेंसी मुख्य रूप से मैनपावर सप्लाई, हाउसकीपिंग और सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध कराती है, लेकिन उसे नकदी गिनने जैसे संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी भी दिए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
SOP के पालन पर सवाल
आरोप है कि नकदी प्रबंधन से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. नियमों के अनुसार, दानराशि की गिनती केवल अधिकृत बैंक अधिकारियों और मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होनी चाहिए. वहीं, आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका केवल सहायक कार्यों तक सीमित रहनी चाहिए थी, लेकिन उन्हें नकदी गिनने का अधिकार दिए जाने के आरोप लगे हैं.
पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाने का आरोप
जांच में यह भी सवाल उठाया गया है कि एजेंसी के चयन के लिए पारदर्शी टेंडर या प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. साथ ही नकदी गिनती के दौरान सीसीटीवी निगरानी, वीडियोग्राफी, डबल वेरिफिकेशन, सील्ड पैक में रकम सुरक्षित रखने और प्रत्येक चरण पर बैंक अधिकारी, ट्रस्ट प्रतिनिधि तथा सुरक्षा कर्मियों के हस्ताक्षर जैसी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर भी सवाल उठे हैं.
ऑडिट और जवाबदेही पर भी चर्चा
जानकारी के अनुसार, नकदी गिनने वाली मशीनों की नियमित जांच और कैलिब्रेशन, पूरी प्रक्रिया का दैनिक, साप्ताहिक और त्रैमासिक ऑडिट तथा किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तत्काल रिपोर्टिंग और जवाबदेही तय करने जैसी व्यवस्थाएं भी आवश्यक मानी जाती हैं. इसके अलावा संवेदनशील नकदी प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की भी व्यवस्था होनी चाहिए.
फिलहाल चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच जारी है. इस बीच दानराशि की गिनती और उससे जुड़े संस्थानों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के दायरे में आ गई है.
आशीष श्रीवास्तव