छाते से है आत्मा का कनेक्शन? क्यों अंतिम संस्कार में इसे साथ ले जाते हैं विदेशी

छाता का इस्तेमाल अक्सर बारिश और धूप से बचने के लिए लोग करते हैं. इस बेहद उपयोगी चीज से कुछ ऐसी मान्यताएं और अजीबोगरीब अंधविश्वास जुड़े हैं, जिसके बारे सुनकर थोड़ा अटपटा लगेगा.

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अंतिम संस्कार में इस वजह से छाता लेकर जाते हैं विदेशी (Photo - Pexels) अंतिम संस्कार में इस वजह से छाता लेकर जाते हैं विदेशी (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:45 AM IST

अक्सर हम विदेशी फिल्मों और टीवी शो में देखते हैं कि जब भी किसी का अंतिम संस्कार हो रहा होता है. लोग कब्रिस्तान में किसी को दफनाने जाते हैं तो हाथ में एक छाता रहता है. खासकर यूरोपियन और चीनी फिल्मों में ऐसे दृश्य आपनें जरूर देखे होंगे. ऐसे में समझते हैं कि आखिर ये लोग किसी के अंतिम संस्कार में छाता लेकर क्यों जाते हैं? क्या यह कोई परंपरा है? छाते का अंतिम संस्कार से क्या कनेक्शन हो सकता है?

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अक्सर बारिश से बचने के लिए छतरियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए वे स्वाभाविक रूप से गीली हो जाती हैं और नमी सोख लेती हैं. चीनी अंधविश्वास के अनुसार, नमी यिन ऊर्जा यानी काली तातक को आकर्षित करती है. इसका संबंध भूत-प्रेतों से होता है. इसी वजह से, कुछ अंधविश्वासी लोग अपने घरों के अंदर छतरियां रखने से बचते हैं.

चीन में छाते को लेकर कई सारे अंधविश्वास और मान्यताएं प्रचलित हैं. इसे एक ऐसा वस्तु माना जाता है जो परालौकिक शक्तियों से जुड़ा होता है. सीधे शब्दों में कहें तो छाता आत्मा और भूत प्रेतों से जुड़ा माना जाता है.   कुछ पारंपरिक चीनी अंत्येष्टि के दौरान, मृतक के रिश्तेदार मृतक की तस्वीर पर एक काली छतरी रखते हैं. ऐसा माना जाता है कि छतरी मृतक की आत्मा को सूर्य की किरणों से बचाती है. सूर्य की किरणों को काफी शक्तिशाली माना जाता है, जो आत्माओं के लिए हानिकारक होती है. ठीक उसी तरह जैसे सूर्य की रोशनी भूत- पिशाच को प्रभावित करती है.

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छाते को अशुभ उपहार माना जाता है, खासकर प्रियजनों के लिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह अलगाव या रिश्ते के अंत का प्रतीक है, यही वजह है कि इसे कभी किसी को गिफ्ट नहीं किया जाता. ऐसे ही अंधविश्वासों की वजह से छाता को चीन में अशुभ माना जाता है और लोग अंतिम संस्कार के वक्त इसे साथ लेकर जाते हैं और कुछ इसे मृतक की आत्मा के लिए वहीं चढ़ाकर चले आते हैं. 

इधर, ब्रिटेन में भी ब्रिटिश लोग अंत्येष्टि में छाता लेकर जाते दिखते है. अंग्रेज लोग अंतिम संस्कार जिस काली छतरी को लेकर जाते हैं, उसे  "ब्रोली" कहा जाता है. वहां अंतिम संस्कार के दौरान छाते को लेकर जाना किसी अंधविश्वास से नहीं जुड़ा है, बल्कि इसके पीछे  विशुद्ध व्यावहारिक वजह है, जो अब परंपरा बन चुकी है. ब्रिटेन के मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए, अचानक होने वाली बारिश से बचाव के लिए छाता एक अनिवार्य उपाय होता है. ऐसे में अगर अंतिम संस्कार के वक्त बारिश शुरू हो जाए, तो लोग भीगने से बचने के लिए इधर- उधर भागने लगेंगे और शव को दफनाने की शांतिपूर्ण प्रक्रिया बाधित हो जाएगी. 

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अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांत और गंभीर वातावरण में मौसम की वजह से आए बाधा के बावजूद बदस्तूर चलती रहे. इसलिए लोग अपने रिश्तेदारों को दफनाने ले जाने के वक्त छाता ले जाने लगे.  इससे यह सुनिश्चित होता है कि उपस्थित लोग भीगे बिना समाधि स्थल पर आयोजित समारोह पर ध्यान केंद्रित कर सकें. अब अंतिम संस्कार में छाता ले जाना एक परंपरा बन गई है. 

बारिश से बचाव के अलावा, छाते ब्रिटिश संस्कृति में दैनिक तैयारी के प्रतीक के रूप में गहराई से समाए हुए हैं. एक ऐसे देश में जहां अप्रत्याशित बारिश रोजमर्रा की हकीकत है, एक भरोसेमंद छाता साथ रखना स्वाभाविक है, चाहे आप काम पर जा रहे हों या किसी शोक सभा में श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हों.

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