'भालू मुझे खा रहा है', मां बोली बस इतना ही बोल सकी बेटी, फोन पर सुनती रही चीख

भालू के चंगुल में फंसी बेटी ने जब मां को फोन किया, तो वह सिर्फ 6 शब्द कह पाई. घटना के कई साल बाद अब एक इंटरव्यू में मां ने बताया कि बेटी का आखिरी कॉल आज भी याद है जब उसने मुझसे मदद मांगी और मैं बेटी को बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकी.

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बेटी को भालू मार रहा था और फोन पर मां चीख सुनती रही (Photo - AI Generated) बेटी को भालू मार रहा था और फोन पर मां चीख सुनती रही (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:48 PM IST

मां, भालू मुझे खा रहा है...ये छह शब्द किसी भी मां के लिए सबसे भयानक सपना हो सकते हैं. लेकिन रूस की एक मां को यह डरावना वाक्य अपनी 19 साल की बेटी के मुंह से फोन पर सुनना पड़ा. इसके बाद जो कुछ हुआ, उसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया.

डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक,  यह दर्दनाक घटना साल 2011 में रूस के पूर्वी साइबेरिया इलाके में हुई थी. उस दिन 19 साल की ओल्गा मोस्काल्योवा अपने सौतेले पिता इगोर त्सिगानेन्कोव के साथ एक नदी के किनारे गई थी. उन्हें वहां से एक फिशिंग रॉड वापस लानी थी, जिसे इगोर पहले छोड़ आए थे.लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा.

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ओल्गा की मां तातियाना ने इतने दिनों बाद भालू की आक्रामकता को लेकर एक इंटरव्यू में बेटी के साथ हुए इस हादसे के बारे में पूरी कहानी बताई.  कैसे अंतिम समय में उनकी बेटी ने फोन कर मां से मदद की गुहार लगाई थी.  

अचानक सामने आ गया मौत का शिकारी
तातियाना ने बताया कि नदी के पास ऊंची घास और झाड़ियों के बीच चलते हुए दोनों का सामना एक मादा भालू और उसके तीन शावकों से हो गया. प्रत्यक्ष विवरण के मुताबिक, भालू ने अचानक हमला कर दिया. ओल्गा की आंखों के सामने उसके सौतेले पिता पर भालू टूट पड़ा. कुछ ही पलों में भालू ने उनकी गर्दन तोड़ दी और सिर पर इतना जोरदार हमला किया कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

अपने सामने यह खौफनाक मंजर देखकर ओल्गा जान बचाने के लिए भागी. वह कुछ कदम भागी, फिर भालू ने पकड़ लिया. डरी हुई ओल्गा करीब 70 गज तक भागने में कामयाब रही. लेकिन भालू उससे ज्यादा तेज था.कुछ ही देर में भालू ने उसे पकड़ लिया और उसके पैर पर हमला कर दिया.

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इसके बाद शुरू हुआ वह दर्दनाक सिलसिला, जिसे उसकी मां तातियाना शायद जिंदगी भर नहीं भूल पाई. हमले के दौरान ओल्गा ने अपनी मां को फोन मिलाया. फोन उठते ही उसने कांपती आवाज में कहा - मां, भालू मुझे खा रहा है. मां, बहुत दर्द हो रहा है... मेरी मदद करो.

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पहले तो तातियाना को लगा कि उनकी बेटी मजाक कर रही है. लेकिन अगले ही पल उन्हें फोन पर भालू की गुर्राने की आवाज और बेटी की चीखें सुनाई देने लगीं. बाद में उन्होंने बताया कि उस क्षण उन्हें ऐसा लगा जैसे उनका दिल रुक जाएगा.

मां ने मदद के लिए लगाई गुहार
घबराई हुई तातियाना ने तुरंत अपने पति इगोर को फोन करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्हें नहीं पता था कि इगोर की मौत पहले ही हो चुकी है. इसके बाद उन्होंने पुलिस और अपने रिश्तेदारों को फोन किया और नदी की तरफ तुरंत पहुंचने की गुहार लगाई.लेकिन मदद पहुंचने में समय लग रहा था, जबकि दूसरी तरफ उनकी बेटी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी.

दूसरा फोन और भी डरावना था
कुछ देर बाद ओल्गा ने दोबारा फोन किया. इस बार उसकी आवाज पहले से काफी कमजोर हो चुकी थी. उसने मां से कहा -मां, भालू फिर वापस आ गए हैं. वह अपने तीन बच्चों को भी साथ लाई है. वे मुझे खा रहे हैं.यह सुनकर तातियाना पूरी तरह टूट गईं.वह चाहकर भी अपनी बेटी तक नहीं पहुंच सकती थीं.

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पहले फोन के करीब एक घंटे बाद ओल्गा ने तीसरी और आखिरी बार अपनी मां को फोन किया.अब उसकी आवाज में दर्द नहीं था.शायद उसे एहसास हो गया था कि उसका अंत करीब है.

उसने मां से कहा -  मां, अब दर्द नहीं हो रहा. मुझे कुछ महसूस नहीं हो रहा. मुझे माफ कर देना... मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं. ये शब्द सुनने के कुछ समय बाद फोन हमेशा के लिए खामोश हो गया. जब मदद पहुंची, तब बहुत देर हो चुकी थी.

करीब आधे घंटे बाद इगोर के भाई एंड्रेई पुलिस के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला था. मादा भालू अब भी इगोर के शव के पास मौजूद थी. वहीं ओल्गा भी  मृत पड़ी मिली.परिवार के लिए यह ऐसा सदमा था, जिससे उबरना लगभग नामुमकिन था.

कुछ दिन पहले ही मिला था ड्राइविंग लाइसेंस
अपनी बेटी को याद करते हुए तातियाना ने बताया कि ओल्गा बेहद खुशमिजाज और मिलनसार लड़की थी. वह मनोविज्ञान की पढ़ाई कर रही थी. संगीत विद्यालय से भी पढ़ाई पूरी कर चुकी थी.सबसे दुखद बात यह थी कि हमले से कुछ ही दिन पहले उसे अपना ड्राइविंग लाइसेंस मिला था और वह भविष्य को लेकर कई सपने देख रही थी.

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सालों बाद भी तातियाना अपनी बेटी की आखिरी आवाज नहीं भूल पाईं. एक मां के लिए इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो कि वह अपनी बेटी की मदद की गुहार सुनती रहे, लेकिन उसे बचाने के लिए कुछ न कर सके.

ओल्गा की कहानी सिर्फ एक भालू हमले की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां और बेटी के उस रिश्ते की भी कहानी है, जिसकी आखिरी कड़ी एक फोन कॉल बनी और जिसके आखिरी शब्द आज भी सुनने वालों को अंदर तक झकझोर देते हैं.

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