किस हालत में हैं पाकिस्तान के सरगोधा की वो आलीशान हवेलियां, जहां कभी रहते थे हिंदू-सिख? वीडियो वायरल

पाकिस्तान का सरगोधा इन दिनों चर्चा में है. इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आउंगा' के बाद अब सोशल मीडिया पर यहां की एक पुरानी हवेली की भी खूब चर्चा हो रही है. वीडियो में दावा किया गया है कि यह हवेली 1947 के बंटवारे से पहले एक हिंदू परिवार की थी और विभाजन के बाद से वीरान पड़ी है. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

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सरगोधा की वीरान हवेली की कहानी  (Photo:Insta/@laraibexplores) सरगोधा की वीरान हवेली की कहानी (Photo:Insta/@laraibexplores)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:37 AM IST

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पाकिस्तान के सरगोधा की एक विशाल और बंद पड़ी हवेली दिखाई देती है. इसकी भव्य बनावट, ऊंचे दरवाजे, लकड़ी की पुरानी खिड़कियां और नक्काशीदार दीवारें लोगों का ध्यान खींच रही हैं. आसपास के मकानों की तुलना में यह इमारत काफी बड़ी नजर आती है, इसलिए लोग इसे प्री-पार्टिशन आर्किटेक्चर का बेहतरीन नमूना भी बता रहे हैं.

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वीडियो शेयर करने वाले का दावा है कि यह हवेली 1947 के बंटवारे से पहले एक हिंदू और सिख परिवार की थी. विभाजन के दौरान परिवार भारत चला गया और उसके बाद यह इमारत कभी आबाद नहीं हुई. हालांकि वीडियो में इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या ऐतिहासिक प्रमाण नहीं दिखाया गया है.

यह वीडियो पाकिस्तान की ट्रैवल और हेरिटेज कंटेंट क्रिएटर लरैब ज़हरा (@laraibexplores) ने शेयर किया है. वह पाकिस्तान की ऐतिहासिक इमारतों और भूली-बिसरी विरासत को अपने वीडियो के जरिए डॉक्यूमेंट करती हैं. सरगोधा की इस हवेली का वीडियो भी उनके ऐसे ही हेरिटेज कंटेंट का हिस्सा है.

देखें वीडियो

सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?

वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने लिखा कि ऐसी ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित किया जाना चाहिए. कुछ लोगों का कहना है कि इस हवेली को संग्रहालय में बदल देना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां बंटवारे के इतिहास को करीब से समझ सकें. वहीं कुछ यूजर्स ने इसे सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि बंटवारे के दौर की एक खामोश गवाही बताया.

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फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हवेली का मौजूदा मालिक कौन है और इसका पूरा इतिहास क्या है. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने एक बार फिर बंटवारे, विस्थापन और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की बहस जरूर छेड़ दी है.

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