66 साल से नहीं बदला चिकन फ्राई करने वाला तेल, रेस्टोरेंट बोला- टेस्ट का यही है सीक्रेट

जापान में एक अवार्ड विनर फ्राइड चिकन रेस्टोरेंट ने 66 वर्षों से अपना खाना पकाने का तेल नहीं बदला है. रेस्टोरेंट ने खुलेआम इस बात को स्वीकार किया है. उसने इसके पीछे एक चौंकाने वाली वजह बताई है.

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अवार्ड जीतने वाले रेस्टोरेंट ने बताया अपने फ्राइड चिकन के लाजवाब स्वाद का राज (Photo- Pexels) अवार्ड जीतने वाले रेस्टोरेंट ने बताया अपने फ्राइड चिकन के लाजवाब स्वाद का राज (Photo- Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST

जापान के शिजुओका में फ्राइड चिकन रेस्टोरेंट वाकाटोरी का दावा है कि उसकी सफलता का राज चिकन फ्राई करने वाले तेल में छुपा है. क्यों उस तेल को 66 वर्षों से बदला ही नहीं गया है. इस रेस्टोरेंट को जापान फ्राइड चिकन ग्रांड प्रिक्स में गोल्ड मेडल भी मिला है. 

ऑडिटरी सेंट्रल के मुताबिक, वाकाटोरी के मालिक ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि रेस्टोरेंट की सफलता का रहस्य एक सीक्रेट मैटेरियल में छिपा है. इसका इस्तेमाल 66 साल पहले रेस्टोरेंट खुलने के बाद से लगातार किया जा रहा है.

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दरअसल, 1960 में दुकान की स्थापना के बाद से, तलने का तेल कभी भी पूरी तरह से फेंका नहीं गया है. वाकाटोरी के तीसरी पीढ़ी के मालिक योशिहिरो त्सुचिया ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि दशकों से रीयूज किया जाने वाला तेल ही उनके परिवार के स्वादिष्ट फ्राइड चिकन का राज है.

उनका कहना है कि 'पुराने तेल' से वाकाटोरी फ्राइड चिकन में एक ऐसी 'सुगंध' और 'लाजवाब स्वाद' आता है जिसे नए तेल से नहीं बनाया जा सकता, जिससे इस रेस्टोरेंट को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलती है.

कैसे इतने सालों से एक ही तेल का हो रहा इस्तेमाल
त्सुचिया के खुलासे ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया.  कई लोगों ने दावा किया कि वाकाटोरी 66 साल पुराने तेल में चिकन तलकर लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है. हालांकि, जापान के इस पुरस्कार विजेता रेस्टोरेंट ने स्पष्ट किया कि तेल की गुणवत्ता को दैनिक सफाई, छानने और नया तेल डालने के माध्यम से बनाए रखा जाता है.

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हर रात, रेस्टोरेंट के कर्मचारी तेल से मांस के टुकड़े और अशुद्धियां सावधानीपूर्वक छानकर अलग कर देते हैं. केवल थोड़ी मात्रा में पुराने तेल को स्वाद के आधार के रूप में रखते हैं और उसे तलने के लिए नए तेल में मिला देते हैं. इसलिए वे 66 साल पुराने तेल का हूबहू इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी रूप से, उस पुराने तेल के अणु अभी भी वाकाटोरी के तेल मिश्रण में मौजूद हो सकते हैं.

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पुराने तले हुए तेल को बचाकर और उसमें ताजा तेल मिलाकर, वाकाटोरी मूल रूप से वही तकनीक अपना रहा है जो कुछ रेस्टोरेंट अपने सूप के लिए इस्तेमाल करते हैं. दरअसल, सबसे पुराना ओडेन सूप टोक्यो, जापान के एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट ओटाफुकु में इस्तेमाल किया जाता है. यह रेस्टोरेंट 70 वर्षों से अधिक समय से उसी सूप का इस्तेमाल कर रहा है. इसी तरह, बैंकॉक के एक्कामाई इलाके का एक रेस्टोरेंट 50 वर्षों से अधिक समय से उसी तरह का सूप परोस रहा है.

विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
वाकाटोरी के मामले में, खाद्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि तेल और शोरबा एक समान नहीं होते, क्योंकि बार-बार तलने से ट्रांस फैटी एसिड और एक्रिलामाइड जैसे हानिकारक और कैंसरकारी पदार्थ पैदा होते हैं. यहां तक ​​कि इसे प्रतिदिन ताजे तेल से पतला करने पर भी, इन हानिकारक पदार्थों के को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता.

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