अमेरिकन ड्रीम एक ऐसा शब्द है, जिसके पीछे संघर्ष, मेहनत और बेहतर जिंदगी बनाने की चाह छिपी होती है. सोशल मीडिया पर अक्सर अमेरिका की वर्क लाइफ और वहां की संस्कृति को लेकर पोस्ट वायरल होती रहती हैं. ऐसी ही एक पोस्ट इन दिनों चर्चा में है, जिसमें अमेरिका और भारत की कार्य संस्कृति के बीच अंतर को लेकर बहस छिड़ गई है.
अमेरिका में रह रहे भारतीय युवक रवि आर. कुमार ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए वहां के कामकाज के तरीके के बारे में बताया. उन्होंने लिखा कि अमेरिका में कई दफ्तर सुबह 6:30 बजे ही काम शुरू कर देते हैं. ऐसे में दोपहर 3 बजे तक लोगों का दिन का बड़ा हिस्सा पूरा हो जाता है. उनकी इस पोस्ट ने भारत और अमेरिका की कार्य संस्कृति को लेकर लोगों की राय को दो हिस्सों में बांट दिया है.
अमेरिका की वर्क कल्चर ने चौंकाया भारतीय को
रवि बताते हैं कि अमेरिका में सुबह जल्दी काम शुरू होने की वजह से लोग दोपहर तक अपना मुख्य काम निपटा लेते हैं. इसके बाद उन्हें परिवार के साथ समय बिताने और निजी कामों के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है.भारत की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जिस समय अमेरिका में लोग दिन का बड़ा हिस्सा पूरा कर चुके होते हैं, उसी समय भारत के कई दफ्तरों में लोग चाय पी रहे होते हैं, खबरें पढ़ रहे होते हैं या फिर काम की शुरुआत कर रहे होते हैं.
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भारत ने भावनाएं सिखाईं, अमेरिका ने वक्त की कद्र
रवि ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी देश को बेहतर या खराब बताना नहीं है. उनका कहना है कि दोनों देशों ने उन्हें अलग-अलग सीख दी है.उनके मुताबिक, भारत ने उन्हें रिश्तों की अहमियत, भावनाएं, अपनापन और मानवीय जुड़ाव सिखाया है. वहीं अमेरिका ने उन्हें समय का सम्मान करना, अनुशासन और बेहतर समय प्रबंधन सिखाया है.रवि का मानना है कि दोनों संस्कृतियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है.
देखें पोस्ट
सोशल मीडिया पर बंटी राय
पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने अपनी-अपनी राय देनी शुरू कर दी. कुछ यूजर्स का कहना है कि सुबह जल्दी काम शुरू करने से ध्यान बेहतर रहता है और उत्पादकता बढ़ती है.
वहीं कई लोगों ने तर्क दिया कि उत्पादकता को केवल समय से नहीं मापा जा सकता. उनके अनुसार, भारत की सबसे बड़ी ताकत मजबूत रिश्ते, टीमवर्क और मानवीय जुड़ाव हैं.
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि किसी देश की कार्य संस्कृति उसके समाज और जीवनशैली से जुड़ी होती है. जब लोगों की दिनचर्या अलग है, तो वहां के बाजार, कारोबार और दफ्तरों का कामकाज भी उसी हिसाब से चलता है.
अब यह बहस सिर्फ ऑफिस के समय तक सीमित नहीं रह गई है. लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि सफलता, उत्पादकता और बेहतर जीवन की परिभाषा हर समाज में अलग-अलग हो सकती है. आखिर आपके हिसाब से क्या भारत को अमेरिका जैसी जल्दी शुरू होने वाली कार्य संस्कृति अपनानी चाहिए, या हमारी मौजूदा कार्य संस्कृति ही बेहतर है?
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