'कॉफी- शराब, झड़ते बाल, चौपट सेहत और अकेलापन', शख्स ने बताया बेंगलुरु के इंजीनियर्स का हाल

आईटी की काफी कंपनियां बेंगलुरु में हैं और उत्तर भारत बल्कि पूरे देश से बड़ी संख्या में लोग वहां नौकरी के लिए जाते हैं. ऐसे में बिट्स पिलानी के एक पूर्व छात्र ने सोशल मीडिया पर कुछ लिखा जिससे आईटी क्षेत्र में काम करने वालों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा शुरू हो गई.

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सांकेतिक तस्वीर (Pexels) सांकेतिक तस्वीर (Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 4:05 PM IST

आज के टाइम में प्राइवेट नौकरी करने वाले कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं.बड़े शहरों के बड़े खर्चे, स्टेटस मेनटेन करने के बोझ के अलावा पर्सनल और वर्क लाइफ मेनटेन करना बड़ा स्ट्रगल होता है. आईटी सेक्टर की बात करें तो इसकी काफी कंपनियां बेंगलुरु में हैं और उत्तर भारत बल्कि पूरे देश से बड़ी संख्या में लोग वहां नौकरी के लिए जाते हैं. 

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ऐसे में बिट्स पिलानी के एक पूर्व छात्र ने सोशल मीडिया पर कुछ लिखा जिससे आईटी क्षेत्र में काम करने वालों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा शुरू हो गई.

झड़ते बाल और स्टेटस का खेल

हर्ष नाम के इस शख्स ने लिखा- 'बेंगलुरू में अधिकतर टेक इंजीनियर्स बहुत अकेले हैं, परिवार से दूर, कोई सच्चा दोस्त नहीं, ट्रैफिक में फंसते, दुनियाभर का किराया, बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं मिल रहे हैं, स्टेटस के खेल में फंसे हैं, टेक मीट-अप, कॉफी और शराब में खुद को डुबो रहे हैं, बाल झड़ रहे हैं, पेट निकल रहा है और वे सबसे ज्यादा टैक्स चुका रहे हैं.'

'इसे वेक-अप कॉल समझिए और...'

उन्होंने यह भी कहा कि 'लोगों को इसे वेक-अप कॉल समझना चाहिए और अपने स्वास्थ्य और परिवार का ख्याल रखना चाहिए. यह बात मुझे और भी डरा रही है कि इतने सारे लोग इससे रिलेट कर रहे हैं. इसेवेकअप कॉल समझें और कुछ करें दोस्तों. हजारों चीजें अच्छी होंगी लेकिन आपका स्वास्थ्य और परिवार टूट गए हैं.'

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 पोस्ट पर क्या बोले लोग?

शेयर किए जाने के बाद से, पोस्ट को 6.4 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है और 11,000 लाइक्स मिल चुके हैं. एक यूजर ने कहा,'क्या यह लगभग हर शहर में घर से दूर ज्यादातर युवाओं की कहानी नहीं है.'
 
एक अन्य ने लिखा,'इसके कुछ हिस्सों से भी रिलेट करना डरावना है. एक साल तक बीमार रहा क्योंकि शहरों में जो आदत विकसित हो गई थी, उसके बाद मैंने अपने स्वास्थ्य पर बहुत काम किया, अब मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं, मैं अपने परिवार के साथ रहता हूं.' एक शख्स ने कहा, 'यह सिर्फ इंजीनियर्स के बारे में नहीं है, यह पूरी पीढ़ी ही इस परेशानी से गुजर रही है. चाहे वे छात्र हों, इंजीनियर हों या वर्किंग प्रोफेश्नल हों.'

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