बीमार पड़ना किसी की पसंद नहीं होता, लेकिन कई बार कर्मचारियों को बीमारी से ज्यादा चिंता इस बात की होती है कि कहीं उनकी छुट्टी पर सवाल न उठ जाए. जब आराम करने की जरूरत हो और उस समय भी खुद को सही साबित करने के लिए सबूत देना पड़े, तो यह कई लोगों के लिए निराशाजनक अनुभव बन जाता है. ऐसा ही एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें एक Gen Z कर्मचारी ने बीमारी की छुट्टी के लिए डॉक्टर की पर्ची मांगने पर अपने बॉस को ऐसा जवाब दिया कि इंटरनेट पर वर्कप्लेस में भरोसे, कर्मचारियों के अधिकार और सिक लीव की पॉलिसी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है.
हर कर्मचारी उम्मीद करता है कि जब वह सच में बीमार हो, तो उसके ऑफिस वाले उस पर भरोसा करें. लेकिन जब बीमारी की छुट्टी लेने के लिए भी सबूत मांगा जाए, तो कई लोगों को यह अपनी प्राइवेसी और आत्मसम्मान पर सवाल जैसा महसूस होता है. ऐसा ही एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक Gen Z कर्मचारी ने डॉक्टर की पर्ची मांगने पर अपने बॉस को ऐसा जवाब दिया कि इंटरनेट पर छुट्टी के नियमों, कर्मचारियों पर भरोसे और ऑफिस संस्कृति को लेकर नई बहस छिड़ गई.
डॉक्टर की पर्ची मांगने पर बदला बातचीत का तरीका
यह पोस्ट X पर Oxygen अकाउंट द्वारा शेयर किया गया. जिसमें Gen Z कर्मचारी की तरफ से करारा जवाब कैप्शन के साथ शेयर की गई थी. इसमें एक कर्मचारी और उसके मैनेजर के बीच बीमारी की छुट्टी के अनुरोध को लेकर हुई वॉट्सअप चैट का स्क्रीनशॉट भी शामिल था. बातचीत की शुरुआत इस बात से हुई कि कर्मचारी ने अपने बॉस को बताया- सर नहीं आ पाऊंगा, बुखार बढ़ गया है. बॉस ने जवाब में कहा- चलो डॉक्टर के पास चलते हैं. कर्मचारी ने जवाब दिया कि वह केवल जरूरत पड़ने पर ही डॉक्टर के पास जाएगा और फिलहाल पैरासिटामोल ले रहा है. बातचीत में तब मोड़ आया जब बॉस ने कहा- डायरेक्टर सर ने कहा है कि जो भी बीमार हो उसे डॉक्टर की पर्ची ले लो.
हालांकि, कर्मचारी ने डॉक्टर की पर्ची लाने से साफ इनकार कर दिया. उसने जवाब में लिखा- मैं स्कूल का छात्र नहीं हूं सर. मेरे पास छुट्टी उपलब्ध थी और मैंने वही ली है. इसके बाद उसने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन देना इतना ही जरूरी है, तो कंपनी के डायरेक्टर, जो खुद डॉक्टर हैं, उनके नाम से ही प्रिस्क्रिप्शन जारी कर सकते हैं. कर्मचारी ने यह भी कहा कि उसके पास न तो कोई डॉक्टर की पर्ची है और न ही स्कूल की तरह माता-पिता के सिग्नेचर वाला छुट्टी का आवेदन. आखिर में उसने साफ कर दिया कि वह फिलहाल आराम कर रहा है और अब किसी भी कॉल या मैसेज का जवाब नहीं देगा.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
स्क्रीनशॉट तेजी से ऑनलाइन वायरल हो गया, जिससे बीमारी की छुट्टी की पॉलिसी, वर्कप्लेस पर विश्वास और कुछ मैनेजर द्वारा कर्मचारियों से रखी जाने वाली अपेक्षाओं के बारे में चर्चा शुरू हो गई. कई यूजर ने तर्क दिया कि यदि कंपनियां कर्मचारियों को वार्षिक अवकाश प्रदान करती हैं, तो उन पर भरोसा किया जाना चाहिए कि वे प्रत्येक बीमारी के दिन को चिकित्सा दस्तावेजों के साथ सही ठहराने की आवश्यकता के बिना इसका उपयोग करेंगे. अन्य लोगों ने वायरल बातचीत से परे चर्चा को व्यापक बनाते हुए कहा कि छुट्टी के अनुरोधों पर अत्यधिक जांच-पड़ताल कई वर्कप्लेस में एक बड़ी समस्या को दर्शाती है.
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