अफ्रीका के अखबार ने क्यों पहले पन्ने पर छापे खून के दाग? सोशल पर हो रही तारीफ

दक्षिण अफ्रीका के एक अखबार के पहले पन्ने पर दिखाई दिए खून जैसे लाल दाग ने पाठकों को हैरान कर दिया. कई लोगों ने इसे प्रिंटिंग की गलती समझा, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश सामने आने पर लोगों की सोच बदल गई.

Advertisement
यह अभियान MENstruation Foundation नामक संस्था ने तैयार किया था. (Photo:Insta/@Rainmaker1973) यह अभियान MENstruation Foundation नामक संस्था ने तैयार किया था. (Photo:Insta/@Rainmaker1973)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

आज के डिजिटल दौर में लोगों का ध्यान खींचना आसान नहीं है. लेकिन दक्षिण अफ्रीका के एक अखबार में छपे एक विज्ञापन ने ऐसा कर दिखाया. अखबार के पहले पन्ने पर दिखाई देने वाले खून जैसे लाल दाग ने पहले पाठकों को चौंकाया और फिर उन्हें एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया.

पहली नजर में यह किसी प्रिंटिंग मिस्टेक जैसा दिखाई देता है. लाल रंग का एक बड़ा धब्बा अखबार के पन्ने पर फैला हुआ नजर आता है, मानो स्याही फैल गई हो या किसी वजह से पन्ना खराब हो गया हो. कई लोगों ने इसे देखकर यही समझा कि अखबार की छपाई में कोई बड़ी गड़बड़ी हुई है.

Advertisement

करीब से देखने पर खुला राज

हालांकि, जब पाठकों ने ध्यान से देखा तो उन्हें उस धब्बे के नीचे एक संदेश दिखाई दिया. उस पर लिखा था, "What if your pad could last 5 years?"

बस यही एक लाइन पूरे दृश्य का मतलब बदल देती है. जो चीज पहले एक गलती लग रही थी, वह दरअसल माहवारी के दौरान होने वाली लीकेज और उससे जुड़ी चिंताओं को दर्शाने वाला एक रचनात्मक संदेश था.

माहवारी से जुड़े टैबू पर चोट

इस विज्ञापन का मकसद लोगों को माहवारी और उससे जुड़ी समस्याओं के बारे में सोचने पर मजबूर करना था. सार्वजनिक जगहों पर लीकेज का डर कई महिलाओं के लिए चिंता का विषय होता है. विज्ञापन ने उसी भावना को एक अलग और प्रभावशाली तरीके से दिखाने की कोशिश की.

खून जैसे दिखने वाले दाग के जरिए लोगों को कुछ पल के लिए वही असहजता महसूस कराई गई, जिसका सामना कई महिलाएं वास्तविक जीवन में करती हैं.

Advertisement

किसने तैयार किया यह अभियान?

यह अभियान MENstruation Foundation नामक संस्था ने तैयार किया था. यह संगठन अफ्रीका में सैनिटरी पैड और अन्य मासिक धर्म स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए काम करता है. संस्था का उद्देश्य माहवारी से जुड़े कलंक को कम करना और महिलाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करना है.

 लोगों की मिली तारीफ

जब इस विज्ञापन का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया तो लोगों ने इसकी खूब चर्चा की. कई यूजर्स ने इसे हाल के वर्षों के सबसे रचनात्मक प्रिंट विज्ञापनों में से एक बताया. कुछ लोगों ने कहा कि यह सिर्फ एक विज्ञापन नहीं, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर करने वाला संदेश है.

डिजिटल दौर में भी असरदार साबित हुआ प्रिंट

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान दिखाता है कि प्रिंट मीडिया आज भी लोगों का ध्यान आकर्षित करने की क्षमता रखता है. एक साधारण अखबार के पन्ने को सामाजिक जागरूकता के मंच में बदलकर इस अभियान ने साबित कर दिया कि रचनात्मक सोच किसी भी माध्यम को प्रभावशाली बना सकती है.

यही वजह है कि यह अनोखा विज्ञापन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और माहवारी स्वास्थ्य को लेकर नई चर्चा शुरू करने में सफल रहा है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »