14 साल नौकरी के बाद मिला ले-ऑफ, 56 की उम्र में बने डिलीवरी राइडर... पोस्ट वायरल

नोएडा के 56 साल के मनोज ने एक इंश्योरेंस कंपनी में 14 साल नौकरी की, लेकिन 2023 में लेऑफ के दौरान उन्हें निकाल दिया गया. उम्र की वजह से नई नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने डिलीवरी राइडर का काम शुरू कर दिया.

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उनकी भावुक कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. ( Photo: ITG) उनकी भावुक कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:04 AM IST

क्या किसी इंसान की 14 साल की मेहनत एक दिन में खत्म हो सकती है? यह सवाल नोएडा के 56 साल के मनोज की कहानी पढ़ने के बाद हर किसी के मन में आएगा. कभी एक बड़ी इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी करने वाले मनोज आज घर चलाने के लिए डिलीवरी राइडर का काम कर रहे हैं. उनकी कहानी सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का दिल छू रही है, क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों की हकीकत है जो उम्र बढ़ने या लेऑफ का शिकार होने के बाद नई नौकरी के लिए दर-दर भटकते हैं.

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सोशल एंटरप्रेन्योर किरण वर्मा ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने नोएडा में हुई एक छोटी-सी मुलाकात का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उन्हें एक जरूरी चिट्ठी भेजनी थी, इसलिए उन्होंने सिर्फ 40 रुपये में पोर्टर से डिलीवरी बुक की. कुछ देर बाद एक 56 साल का डिलीवरी पार्टनर उनके घर पहुंचा. पहली मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ने में उन्हें थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन चेहरे पर मुस्कान बनी रही. उन्होंने पानी पीने से भी मना कर दिया और अपना काम पूरा करने लगे.

2023 में हुई थी छंटनी
मनोज के बात करने का तरीका और उनकी पर्सनैलिटी देखकर किरण वर्मा को लगा कि उनकी कहानी कुछ अलग है. उन्होंने मनोज को वापस बुलाया और कुछ देर बैठकर बात की. बातचीत के दौरान मनोज ने बताया कि वह पहले टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस के एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में काम करते थे. उन्होंने वहां पूरे 14 साल तक नौकरी की, लेकिन साल 2023 में कंपनी में हुई छंटनी के दौरान उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

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नौकरी जाने के बाद मनोज ने कई जगह काम तलाशने की कोशिश की. लेकिन उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखकर ज्यादातर कंपनियों ने उन्हें मौका नहीं दिया. आखिरकार घर का खर्च चलाने के लिए उन्होंने डिलीवरी राइडर का काम शुरू कर दिया. अब जो भी काम मिलता है, वह पूरी ईमानदारी से करते हैं. बातचीत के दौरान मनोज ने एक ऐसी बात कही जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. उन्होंने कहा- बेटा, सब्जी बनाते समय सबसे पहले करी पत्ता डाला जाता है, लेकिन जब खाना खाने की बारी आती है तो सबसे पहले उसी करी पत्ते को निकालकर अलग कर दिया जाता है. उनका इशारा उन कर्मचारियों की ओर था, जो सालों तक कंपनी के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन जरूरत खत्म होते ही उन्हें सबसे पहले बाहर कर दिया जाता है.

पोर्टर ने भी किया धन्यवाद
किरण वर्मा ने माना कि वह यह नहीं कह सकते कि मनोज की नौकरी जाने की असली वजह क्या थी, लेकिन उनकी बातें सुनकर यह जरूर महसूस हुआ कि नौकरी छूटने के बाद एक अनुभवी कर्मचारी किन मुश्किलों से गुजरता है. उन्होंने मनोज को डिलीवरी चार्ज से ज्यादा पैसे देकर विदा किया और लिखा कि जिंदगी पहले ही कठिन है, लेकिन सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब काम करने की इच्छा होने के बावजूद कोई आपको मौका नहीं देता. यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. खुद पोर्टर ने भी इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए किरण वर्मा का धन्यवाद किया और कहा कि उन्होंने उनकी टीम की मेहनत को लोगों तक पहुंचाया.

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सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने मनोज की कहानी पर अपनी राय दी. किसी ने लिखा कि अनुभवी लोगों की काबिलियत को नजरअंदाज करना गलत है. वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि हम कभी नहीं जानते सामने वाला इंसान किन हालात से गुजर रहा है, इसलिए हमें हमेशा दूसरों के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए. मनोज की कहानी यह याद दिलाती है कि नौकरी सिर्फ कमाई का जरिया नहीं होती, बल्कि इंसान की पहचान और आत्मसम्मान से भी जुड़ी होती है. इसलिए किसी कर्मचारी के अनुभव और मेहनत की कीमत सिर्फ उसकी उम्र देखकर नहीं लगानी चाहिए. आखिरकार हर व्यक्ति सम्मान और एक नए मौके का हकदार होता है.
 

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