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एअर इंडिया की 'घर वापसी' पर झूमा सोशल मीडिया, TATA को लेकर ऐसे-ऐसे मीम्स हुए वायरल

कुणाल कौशल
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 11:30 PM IST
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करीब 70 साल बाद सरकारी एयरलाइंस कंपनी एअर इंडिया सरकार को 'टाटा' कहकर आजादी से पहले अपने मूल स्वामित्व वाली कंपनी टाटा संस के हाथों में चली गई.  भारी घाटे में चल रही एअर इंडिया के विनिवेश कार्यक्रम में 18000 करोड़ रुपये की बोली लगाकर टाटा संस ने एयर इंडिया को फिर से खरीद लिया है. (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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यही वजह है कि जेआरडी टाटा द्वारा शुरू किए गए एअर इंडिया के फिर से टाटा के स्वामित्व में जाने के फैसले के बाद लोग इसे सोशल मीडिया पर एविएशन कंपनी की 'घर वापसी' भी बता रहे हैं. सरकार की तरफ से जैसे ही इस बात का ऐलान किया गया कि एअर इंडिया के लिए सबसे ऊंची बोली लगाकर टाटा संस ने इसपर स्वामित्व हासिल कर लिया है वैसे ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई. (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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भारतीय उड्डयन के इतिहास में एअर इंडिया की पहली उड़ान कराची से जेआरडी टाटा के साथ पुस मोथो के नियंत्रण में रवाना हुई थी. एअर इंडिया को लेकर टाटा के लगाव को इसी बात से समझा जा सकता है कि इसके संस्थापक जेआरडी टाटा ने सिर्फ 15 साल की उम्र में फ्रांस में एक हवाई जहाज में जॉयराइड ली थी और तय कर लिया था कि वो एक पायलट बनेंगे. इसके बाद उन्होंने कमर्शियल पायलट लाइसेंस भी हासिल कर लिया था. (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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साल 1932 में, जेआरडी टाटा ने भारत में विमानन उद्योग को शुरू करने का बीड़ा उठाया और कराची (पाकिस्तान अलग नहीं हुआ था) से बॉम्बे (मुंबई) के लिए पहली उड़ान पर साथ रवाना हुए.  (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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यही वजह है कि एअर इंडिया का नियंत्रण टाटा संस को वापस मिलने के बाद संस्थापक जेआरडी टाटा के बेटे और देश के मशहूर कारोबारी रतन टाटा ने भी इसका स्वागत किया और ट्विटर पर Welcome back air india लिखकर खुशी जताई.  (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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जब जेआरडी टाटा ने इसकी शुरुआत की थी तो इसका नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था. टाटा एयरलाइंस की शुरुआत यूं तो साल 1932 में हुई थी, मगर जेआरडी टाटा ने साल 1919 में ही पहली बार हवाई जहाज शौकिया तौर पर उड़ा लिया था. (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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हालांकि ऐसा नहीं है कि एअर इंडिया को चलाने में उद्योगपति जेआरडी टाटा को दिक्कत नहीं हुई थी. उस वक्त की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने टाटा एयरलाइंस को कोई आर्थिक मदद नहीं दी थी. टाटा एयरलाइंस कंपनी मुंबई के जुहू के पास एक मिट्टी के मकान में बने दफ्तर से ऑपरेट होती थी. वहीं मौजूद एक मैदान का इस्तेमाल 'रनवे' के रूप में किया जाता था जहां बारिश होने पर पानी भर जाता था. (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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बता दें कि जेआरडी टाटा ने एयर इंडिया को एक सफल कंपनी बना दिया था लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद गहराए आर्थिक संकट ने एविएशन क्षेत्र के लिए मुश्किलें पैदा कर दी. इसके बाद एयरलाइंस को बचाने के लिए सरकार ने इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया और इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था. (तस्वीर - सोशल मीडिया)
 

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टाटा कंपनी ने जब टाटा एयरलाइंस (अब एयर इंडिया) की  शुरुआत की थी तो उस समय पैसेंजरों को नहीं बल्कि चिट्ठियों को ढोया जाता था. हालांकि स्थापना के एक साल बाद ही टाटा एयरलाइंस कंपनी के विमान ने 155 यात्रियों के साथ लगभग 11 टन डाक को भी ढोया. एक साल में ही जेआरडी टाटा की इस कंपनी ने एक लाख 60 हजार मील तक की उड़ान पूरी कर ली. (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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आपको जानकर हैरानी होगी कि एअर इंडिया के हर विमान में आप जिस महाराजा की तस्वीर देखते हैं वो साल 1946 से ही इसकी खास पहचान रहा है. महाराजा को कंपनी का शुभंकर माना जाता है जिसका इस्तेमाल सरकारी नियंत्रण में आने के बाद भी होता रहा.  (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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एअर इंडिया के अधिग्रहण के बाद अब टाटा इस देश की सबसे बड़ी एविएशन कंपनी बन जाएगी. टाटा संस के पास पहले से ही दो एयरलाइंस एयर एशिया और विस्तारा में हिस्सेदारी और मालिकाना हक है. एअर इंडिया के इसमें जुड़ने के बाद फ्लीट के मामले में भी टाटा कंपनी सबसे आगे होगी. अब टाटा संस के पास कुल तीन एयरलाइंस कंपनी हो जाएगी. (तस्वीर - सोशल मीडिया)

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