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सिर्फ तेल और गैस ही नहीं... होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत में इन चीजों की सप्लाई पर पड़ेगा असर

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:21 PM IST
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मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से समुद्री मार्ग बाधित हो गया है. खासकर ईरान के होर्मुज स्ट्रेट से होकर आवाजाही नहीं होने की वजह से दूसरे देशों से आने वाले टैंकर और जहाज भारत नहीं पहुंच पा रहे हैं. इस वजह से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं कई और भी आवश्यक चीजें जो उस रास्ते से भारत तक आती है, नहीं पहुंच पा रही है. (File Photo - AP)

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ईरान और यूएस-इजरायल के बीच जंग की वजह से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट डिस्टर्ब हो गया है. उस रास्ते से आने वाले तेल और गैस के जहाज भारत तक नहीं पहुंच रहे हैं. इस वजह से भारत में गैस की किल्लत हो रही है. हालांकि, तेल और गैस के अलावा भी कई ऐसी चीजें हैं जो दूसरे देशों से होर्मुज स्ट्रेट होकर ही भारत तक पहुंचती है. (File Photo - AP)

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बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुसार, यह क्षेत्र भारत के निर्यात का 17% हिस्सा कवर करता है. इस रास्ते से कच्चे तेल की 55% सप्लाई भारत आती है.  इसके कच्चे तेल के आयात का लगभग आधा हिस्सा - करीब 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन - मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से होकर इस होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. (File Photo - AP)

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अगर होर्मुज से होकर माल ढुलाई में बाधा अधिक समय तक जारी रहता है, तो इसका  असर एनर्जी मार्केट से लेकर फर्टिलाइजर सप्लाई, मैन्युफैक्चरिंग मैटेरियल, कंस्ट्रक्शन मैटेरियल, डामर (कोलतार), कैमिकल और हीरे जैसे उद्योगों तक तेजी से फैल सकता है. (Photo - Pexels)
 

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2025 में इस क्षेत्र से लगभग 100 अरब डॉलर का सामान भारत में आयात किए गए. इनमें उर्वरक और पेट्रोकेमिकल्स से लेकर औद्योगिक खनिजों तक और  कृषि और प्लास्टिक से लेकर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के मशीनरीज और हीरा काटने जैसे उपकरणों की सप्लाई शामिल है.  (Photo - Pexels)
 

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भारत में रियल स्टेट और सड़क निर्माण के लिए जरूरी मशीनरीज, डामर, बिल्डिंग मैटेरियल और पेट्रोकेमिकल्स भी मिडिल ईस्ट के देशों से भारत इम्पोर्ट करता है. इन मालों से भरे जहाज होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ही भारत तक पहुंचते हैं. ऐसे में यह रास्ता बंद हो जाने से सिर्फ तेल और गैस तक ही असर सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव कृषि, सड़क निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और रियल स्टेट के क्षेत्र में भी पड़ेगा. (Photo - Pexels)
 

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