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खार्ग द्वीप पर अमेरिकी बमबारी... इसे क्यों कहा जाता है ईरान की कमजोर नस?

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:29 AM IST
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अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग द्वीप पर जोरदार बमबारी की है. इसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी. उन्होंने दावा किया कि इस हमले में द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. साथ ही ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगला निशाना इस आइलैंड पर मौजूद अहम तेल ढांचा भी बन सकता है. आइये जानते है इसे क्यों कहा जाता है ईरान की कमजोर नस.

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ईरान के पास एक छोटा सा द्वीप है, जिसका नाम खर्ग है. खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरानी तट से लगभग 16 मील दूर स्थित है. इस वजह से ईरान के लिए इसकी सुरक्षा करना काफी मुश्किल भी है. क्योंकि, ईरान का यह हिस्सा आसानी से अलग-थलग हो सकता है. यह द्वीप ईरान के लिए इसलिए खास है, क्योंकि ईरान के 90 प्रतिशत कच्चे तेल का स्टोर है. (Photo - Getty)

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खार्ग द्वीप से  ईरान का 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात दूसरे देशों में होता है. इस द्वीप पर ईरान के बड़े-बड़े टर्मिनल और पाइप लाइन हैं. स्टोरेज टैंक हैं. खार्ग द्वीप पर ही ईरान का बड़े-बड़े जहाजों में तेल भरने की फैसलिटीज बनी हुई है.  (Photo - Getty)

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ईरान के पास फारस की खाड़ी में स्थित इस छोटे से द्वीप से ही देश का 90 प्रतिशत से ज्यादा तेल निर्यात होता है.से इसी द्वीप पर बने बंदरगाह से बड़े-बड़े टैंकर जहाजों से दूसरे देशों में तेल भेजे जाते हैं. (Photo - Getty)

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हर दिन करीबन 70 लाख बैरल तेल खार्ग द्वीप से ही जहाजों में भरा जाता है और फिर यहीं से जहां अपने अलग-अलग गंतव्य के लिए रवाना होते हैं. एक तरह से ईरान के तेल कारोबार का यह द्वीप मुख्य केंद्र है. तेल निर्यात से जुड़े सारे इंफ्रास्ट्रक्चर इसी द्वीप पर हैं. (Photo - Getty)

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ईरान के इसी छोटे से द्वीप पर अमेरिका और इजरायल हमला करने की तैयारी में जुटा है. क्योंकि, यह ईरान की लाइफलाइन है. ऐसे में अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते को रोकता है तो अमेरिका और इजरायल इस द्वीप पर हमला कर सकता है. अमेरिकी सरकार ने ईरानी तेल पर भारी प्रतिबंध लगा रखे हैं, और खर्ग से निकलने वाले अधिकांश तेल को चीन भेजा जाता है. (Photo - Reuters)

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न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 'वेस्ट एशिया: ए न्यू अमेरिकन ग्रैंड स्ट्रेटेजी इन द मिडिल ईस्ट' के लेखक सोलिमन  का मानना है कि कुछ हफ्तों के लिए भी खर्ग को खो देने से ईरान में एक साथ सुरक्षा और सामाजिक संकट पैदा हो जाएंगे. तेहरान को यह चुनने का अधिकार नहीं है कि वह पहले किससे निपटे. खर्ग को खोने से राजस्व में हर महीने अरबों डॉलर की कमी आ जाएगी.(Photo - Screengrag/ITG)

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अमेरिकी कमांडरों के अनुमान से कहीं पहले आईडीएफ (आयरलैंड की रक्षा सेना) इस द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने के लिए उत्सुक है. अमेरिका खर्ग पर कब्जा करने से पहले ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म करना चाहता है. क्योंकि,  जब वहां की शासन व्यवस्था पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाएगी, तब द्वीप पर कब्जा करना,  ईरान की शासन व्यवस्था पर अधिकतम दबाव बनाने का सबसे अच्छा मौका होगा. (Photo - Screengrag/ITG)

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