होटल के महंगे खर्च की टेंशन छोड़ें! संगम नगरी में सस्ते में मिल रहे हैं घर जैसे 'होमस्टे'

माघ मेला 2026 के दौरान प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए ठहरने को लेकर तस्वीर पहले से काफी बदल चुकी है. संगम के आसपास अब ऐसे किफायती और भरोसेमंद विकल्प मौजूद हैं, जो बजट में भी फिट बैठते हैं और आराम का भरोसा भी देते हैं.

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आस्था के सागर में उमड़ी भीड़ (Photo: Pexels) आस्था के सागर में उमड़ी भीड़ (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

आंकड़े कई बार आपको चौंका देते हैं, लेकिन इस बार प्रयागराज ने जो कर दिखाया है वह वाकई काबिले तारीफ है. साल 2025 का डेटा बताता है कि हिंदुस्तान के लोगों ने घूमने के लिए गोवा के समंदर या कश्मीर की बर्फीली वादियों से कहीं ज्यादा कुंभ नगरी प्रयागराज को इंटरनेट पर सर्च किया है. वजह साफ है सैलानी अब सिर्फ मौज-मस्ती के लिए छुट्टियां नहीं बिताना चाहते, बल्कि उस आत्मिक शांति और सांस्कृतिक विरासत को महसूस करना चाहते हैं जो सिर्फ प्रयागराज की गलियों और संगम की रेती पर मिलती है. 3 जनवरी 2026 से माघ मेले का आगाज हो चुका है और 15 फरवरी तक चलने वाले आस्था के इस महाकुंभ में अगर आप भी डुबकी लगाने की योजना बना रहे हैं, तो ठहरने की चिंता छोड़ दीजिए.

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अक्सर बड़े मेलों में रुकने को लेकर लोगों के मन में डर होता है कि होटल महंगे होंगे या जगह नहीं मिलेगी, लेकिन प्रयागराज में अब ठहरने के विकल्प पूरी तरह बदल चुके हैं. यहां सिर्फ आलीशान होटल ही नहीं, बल्कि आम आदमी की जेब के हिसाब से कई ऐसे ठिकाने हैं, जहां आप कम खर्च में सुकून से रह सकते हैं. तो चलिए जानते हैं कि संगम की इस पावन नगरी में कौन से वो ठिकाने हैं, जो आपको घर जैसा एहसास भी देंगे और आपके बजट का ख्याल भी रखेंगे.

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माघ मेले के दौरान अगर आप प्रयागराज के असली रंग में रंगना चाहते हैं, तो होमस्टे आपके लिए सबसे शानदार चुनाव हो सकता है. आजकल शहर के लोग अपने घरों के कमरों को यात्रियों के लिए किराए पर देते हैं, जिससे आपको न केवल रहने की जगह मिलती है, बल्कि वहां के स्थानीय परिवारों के साथ घुलने-मिलने और उनके आतिथ्य को करीब से देखने का मौका भी मिलता है.

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संगम के 2-3 किलोमीटर के दायरे में ऐसे कई घर मिल जाएंगे, जहां आप प्रामाणिक स्थानीय जीवन का आनंद ले सकते हैं. इतना ही नहीं, जो लोग अकेले यात्रा कर रहे हैं या जिनका बजट काफी सीमित है, उनके लिए 'डॉरमेट्री' एक वरदान की तरह है. दरअसल, मेला क्षेत्र के पास बनी विशेष टेंट सिटी में डॉरमेट्री टेंट उपलब्ध कराए गए हैं, जहां एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण के साथ बिस्तर, पानी और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहद किफायती दरों पर मिल जाती हैं.

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कम खर्च में सुरक्षित बसेरा

सालों से तीर्थयात्रियों की पहली पसंद रही धर्मशालाएं आज भी सबसे किफायती और सरल विकल्प हैं. यह हॉस्टल की तरह काम करती हैं, जहां सांप्रदायिक सोने की जगहें और साझा बाथरूम होते हैं. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन हैं जो बहुत ही बुनियादी सुविधाओं में खुश रहते हैं. इसके अलावा, अगर आप थोड़ी और बेहतर सुविधाएं और प्राइवेसी चाहते हैं, तो सिविल लाइंस और मेला मैदान के आसपास कई बजट होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं. इनका किराया प्रति रात 500 रुपये से लेकर 2,000 रुपये के बीच होता है. यही वजह है कि अनुभवी सैलानी पहले से बुकिंग करने की सलाह देते हैं. इन ठिकानों पर रुककर आप बिना किसी आर्थिक बोझ के माघ मेले की आध्यात्मिक ऊर्जा और संगम की पावन शांति का पूरा आनंद उठा सकते हैं.

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