Scam WFH: तेजी से फैल रहा वर्क फ्रॉम होम फ्रॉड, 100 लोगों की जुबानी, स्कैमर्स ने जाल में फंसा कर लूटे 2.5 करोड़

Work From Home Scam: देश भर में इन वर्क फ्रॉम होम स्कैम तेजी से फैल रहा है. UP के एक शख्स ने 40 लाख रुपये गंवा दिए, वहीं कई और भी हैं जिन्होंने 50 हजार रुपये से लेकर 21 लाख रुपये तक गंवाए हैं. ये ऐसा स्कैम है जहां पढ़ें लिखे लोग भी फंस रहे हैं. एक तरह का मयाजाल है. हमने लगभघ 100 विक्टिम्स से इस पूरे खेल के बारे में समझा है.

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Work From Scam Work From Scam

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 12:54 AM IST

By Munzir Ahmad: प्रयागराज के रहने वाले एक युवा इंजीनियर की हाल ही में जॉब गई थी. नई जॉब के लिए वो लगातार अलग अलग पोर्टल पर अप्लाई कर रहा था. जॉब की तलाश खत्म नहीं हो रही थी और इसी बीच एक दिन उसे WhatsApp पर मैसेज आता है. मैसेज... एक जॉब प्रपोजल का था. इसमें कहा जाता है कि Concentrix नाम की एक कंपनी में वैकेंसी है और इसके लिए उसका CV शॉर्टलिस्ट किया गया है.

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इसके बाद सिर्फ़ दो दिन के अंदर उसके साथ 3.5 लाख की ठगी हो गई. इसी तरह UP के और शख्स के साथ 40 लाख रुपये की ठगी हो गई. उसके पास इतने पैसे थे भी नहीं, लेकिन दोस्तों से क़र्ज़ लेकर उसने ख़ुद स्कैमर्स को पैसे ट्रांसफ़र कर दिए, लेकिन क्यों और कैसे?

ये कहानी सिर्फ़ UP के रहने वाले दो युवकों की नहीं है, बल्कि देश भर के अलग अलग राज्यों के 100 और लोगों की है जिनसे मैंने बातचीत की है. ये सभी Work From Home स्कैम के शिकार हुए हैं. 100 लोगों में से सभी ने लगभग 50 हजार से लेकर 50 लाख तक गंवा दिए हैं. इनमे से अब कुछ कर्ज में डूब चुके हैं और कुछ का कहना है कि वो अब सड़क पर आ चुके हैं, क्योंकि उनकी जिंदगी भर की कमाई खत्म हो चुकी है...

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इस स्कैम के शिकार हुए कई लोगों ने हमारे साथ अपने बैंक डिटेल्स भी शेयर किए हैं. एक युवक आज तक डिजिटल को बताया कि वो स्कैमर्स को अब तक 40 लाख रुपये दे चुका है. युवक की FIR की कॉपी यहां देख सकते हैं. 

इन लोगों में से हर तबके के लोग हैं. कुछ जॉबलेस हैं, कुछ लोग जॉब करते हैं, कुछ छोटे बिजनेस करते हैं. लेकिन इनमें से ज़्यादातर लोग पढ़े लिखे हैं. हालाँकि मोस्टली इसके शिकार ऐसे लोग हो रहे हैं जिनकी नौकरी चली गई है या वो जॉब ढूँढ रहे हैं.

मैने लगभग 100. लोगों से बात की है उनमें से कई ने पुलिस में शिकायत की है, लेकिन उनके मुताबिक़ पुलिस की तरफ़ से उन्हें कोई पुख़्ता सल्यूशन नहीं मिला है. हमारे पास उनके द्वारा की गई शिकायत की कॉपी भी है. इन सभी का कहना है कि पुलिस कह रही है कि अभी जाँच होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

…तो ये पूरा स्कैम हो कैसे रहा है? पढ़ें लिखे लोग भी स्कैमर्स के झाँसे में कैसे आ रहे हैं?

स्कैमर्स सबसे पहले विक्टिम को मैसेज करते हैं कि वर्क फ़्रॉम होम करके आप एक्स्ट्रा पैसे कमा सकते हैं. मैसेज देखने में बिल्कुल जॉब ऑफ़र जैसा ही लगता है.

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WhatsApp मैसेज में विक्टिम को बताया जाता है कि ये जॉब वर्क फ्रॉम होम के लिए है. शुरू में कहा गया कि ब्लॉगर्स की इंस्टाग्राम और यूट्यूब रीच बढ़ाने के लिए हर दिन कुछ अकाउंट्स फॉलो करने होंगे और वीडियोज लाइट करने होंगे. पहले ही दिन स्कैमर्स विक्टिम के अकाउंट में 1000 से 10000 रुपये तक भेज देते हैं जिससे उनका ट्रस्ट बिल्ड हो जाता है.

ये सब करने के लिए स्कैमर्स विक्टम को शुरुआत में हर दिन 10,000 रुपये तक दे कर अपनी गिरफ़्त में लेते हैं, ताकि विक्टिम को लगे कि ये काम असली है.

लोगों को ऐसे झाँसा दे रहे हैं स्कैमर्स…

अकाउंट लाइक और फॉलो करने के काम को इस तरीके से बताया गया जैसे ये काम कंपनी के ग्रोथ के लिए काफी जरूरी है. बिल्कुल प्रोफेशनल तरीके से मैसेज ड्राफ्ट करके भेजे जाते हैं. हर दिन 20 अकाउंट फॉलो करने और पोस्ट लाइक करने के लिए कहा जाता है. कई बार फर्जी ID Card भी भेजा जाता है ताकि लोग आसानी से झांसे में आ जाएं. 

ये मैसेज उधर से भेजा जाता है...

'कंपनी को एक को-इंप्लॉइ की ज़रूरत है जो हमें अपने कस्टमर के पेजेज को फ़ॉलो करने में मदद करे. डेली बेसिस पर एक्स्ट्रा इनकम के लिए आप इसे ज्वाइन कर सकते हैं. पेमेंट के लिए आपको एक टेलीग्राम ग्रुप ज्वाइन कराया जाएगा, जहां डेली 20 से 25 टास्क दिए जाएंगे और हर टास्क के लिए 70 रुपये मिलेंगे.'

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टास्क के तौर पर हर दिन अलग अलग लोगों और पेज के इंस्टा हैंडल दिए जाते हैं. इन्हें फ़ॉलो करके स्क्रीनशॉट सेंड करना होता है.

इसके बाद पेमेंट के तौर पर हर दिन अकाउंट में पैसे आने शुरू हो जाते हैं. यहां से ट्रस्ट बिल्ड करने का पूरा खेल शुरू हो जाता है.

पहले भरोसा जीतते हैं स्कैमर्स…

पार्ट टाइम जॉब बता कर कहा जाता है कि दिन के 20-30 इंस्टा हैंडल और यूट्यूब वीडियो लाइक करने हैं जिसके लिए पैसे मिलेंगे. शाम तक स्कैमर्स उनके बैंक अकाउंट में पैसे डाल देते हैं. पैसे मिलने के बाद लोगों को भरोसा हो जाता है कि ये काम सही है. यहीं से शुरू होता है स्कैमर्स का नेक्स्ट स्टेप…

इस स्कैम के विक्टिम्स ने आज तक डिजिटल को बताया कि स्कैमर्स पूरे दिन अलग अलग अकाउंट का हैंडल भेजते हैं और ये उन्हें अपने अकाउंट से फ़ॉलो करते हैं. इसी तरह YouTube वीडियो लाइक करने का भी टास्क होता है.

टास्क पूरा होते ही स्कैमर्स विक्टिम के बैंक अकाउंट में पैसे भेज देते हैं. इसके बाद विक्टिम्स को टेलीग्राम ग्रुप में ऐड किया जाता है जिसमें कुछ लोग पहले से होते हैं. ग्रुप में ऐड करने के बाद बताया जाता है कि आपको अगर और पैसे कमाने हैं तो कुछ टास्क दिए जाएंगे जिन्हें ग्रुप के साथ मिल कर कंप्लीट करना है.

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चूँकि उस ग्रुप में पहले से काफ़ी लोग होते हैं, इस वजह से विक्टिम को आसानी से भरोसा भी हो जाता है. दूसरी बात ये भी कि विक्टिम के अकाउंट में हर दिन कुछ पैसे स्कैमर्स भेजते रहते हैं, ताकि विक्टिम्स का भरोसा बना रहे.

दूसरा टास्क...

अब दूसरे टास्क के तौर पर Telegram ग्रुप का एडमिन एक लंबा चौड़ा मैसेज सेंड करता है जो देखने में प्रोफेशनल लगता है. यहाँ ट्रेडिंग के कुछ स्टेप्स लिखे होते हैं और बताया जाता है कि कुछ अमाउंट डालने से उसका कुछ परसेंट इंसेटिव के तौर पर मिलेगा.

दरअसल, ये पूरा स्टेप सिर्फ़ इसलिए डिज़ाइन किया गया होता है ताकि लोगों को ऐसा लगे कि वो सही में ट्रेडिंग प्लैटफ़ॉर्म पर क्रिप्टो की ट्रेडिंग कर रहे हैं. 

देखें वीडियो: क्या होता है SIM Swapping फ्रॉड

टेलीग्राम के उस ग्रुप का सुपरवाइजर एक क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लैटफॉर्म जैसी दिखने वाली वेबसाइट पर विक्टिम का अकाउंट बना कर देता है. लिंक क्लिक करके यूजरनेम पासवर्ड डालने पर एक क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लैटफॉर्म ओपन होता है. यहां Bitcoin, Eherium जैसे क्वाइन्स की ट्रेडिंग और ग्राफ दिखते हैं. 

ये पूरा प्लैटफॉर्म उनका ही बनाया हुआ एक मायाजाल जैसा होता है जो अपने आप में एक फ्रॉड है. यहाँ उनका नाम और डिटेल्स होते हैं. साथ ही यहाँ ट्रेडिंग जैसा दिखने वाला इंटरफ़ेस होता है और एक वर्चुअल वॉलेट होता है.

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ये फेक क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लैटफॉर्म है जो स्कैमर्स बनाते हैं

अब तक काफ़ी कम लोगों को ही क्रिप्टो की ट्रेडिंग के बारे में पता है. इन सभी विक्टिम्स ने Aaj Tak Digital को बताया कि उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग के बारे नहीं पता था, लेकिन ये पता था कि क्रिप्टो में ट्रेडिंग होती है. यानी क्रिप्टो खरीद और बेचकर पैसे कमाए जाते हैं. चूंकि ये प्लैटफॉर्म देखने में असली जैसा लग रहा था, इसलिए उसे इस पर यकीन हो गया. 

ट्रेडिंग प्लैटफॉर्म जैसा दिखने वाला ऐप... 

अब टेलीग्राम ग्रुप का एडमिन कुछ ऑप्शन्स देता है. जैसे -- 15000 देने पर 16000 मिलेगा, जबकि 40000 जमा करने पर 48000 रुपये का प्रॉफिट मिलेगा. यहां ऐसा बताया जाता है कि ट्रेडिंग के लिए कुछ सेकंड्स का ही समय मिलेगा. हालांकि इसका कोई मतलब नहीं होता, सिर्फ वेबसाइट में फर्जी काउंटडाउन टाइमर लगाया गया होता है.

यहाँ स्कैमर्स विक्टिम को इस तरह से मैनिपुलेट करते हैं कि उन्हें लगता है कि ये असलियत में कोई ट्रेडिंग प्लैटफ़ॉर्म है.

जैसे ही एडमिन इस ग्रुप में लोगों से पैसे डालने के लिए कहता है उस ग्रुप के दूसरे लोग पेमेंट की स्क्रीनशॉट उसी ग्रुप में भजते हैं. इसे देख कर विक्टिम को ऐसा लगता है कि जब दूसरे लोग भी पहले से ये काम कर रहे हैं और पैसे कमा रहे हैं तो ये काम सही है. भरोसा करके वो भी पैसे उनके बताए हुए अकाउंट में सेंड करके स्क्रीनशॉट यहां सेंड करता रहता है. 

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लेकिन फ्रॉड हो जाने के बाद विक्टिम को ये पता चलता है कि उस ग्रुप के दूसरे लोग दरअसल उसी स्कैमर्स के ही लोग होते हैं और वो भी इस फ्रॉड में शामिल होते हैं. ग्रुप के दूसरे स्कैमर्स जल्दी जल्दी पेमेंट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हैं जिसे देख कर विक्टिम को लगता है कि ये काम सही है और वो भी उनके बताए हुए अकाउंट नंबर पर पैसे भेजता है.

हमारे साथ ऐसे कई विक्टिम्स ने पेमेंट के स्क्रीनशॉट्स शेयर किए हैं. कई लोगों ने बैंक के पासबुक की फ़ोटोकॉपी भी शेयर की है जिसमें लाखों रुपये सेंड किए गए हैं. स्कैमर्स के अकाउंट किसी कंपनी के नाम से रजिस्टर किए गए होते हैं.

इस पूरे फ़्रॉड को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि इसमें शामिल होने वाले को ऐसा लगे कि ये पूरा काम क्रिप्टो ट्रेडिंग का है. 

धीरे धीरे टास्क आगे बढ़ता है और अमाउंट भी बढ़ता जाता है यानी ये शख्स ज्यादा पैसा देने लगता है, क्योंकि उस ग्रुप के दूसरे लोग भी ऐसा कर रहे होते हैं.

जो भी पैसे विक्टिम्स स्कैमर्स के अकाउंट में ट्रांसफ़र करते हैं उतना ही अमाउंट उनके वर्चुअल वॉलेट में दिखने लगता है. ये वही ट्रेडिंग का फ़र्ज़ी प्लेटफ़ॉर्म है जिसे स्कैमर्स ने तैयार किया है. वर्चुअल वॉलेट में अमाउंट देख कर विक्टिम्स को लगता है कि उनका पैसा सेफ़ है और बढ़ रहा है.

धीरे धीरे हर दिन अमाउंट बढ़ा कर विक्टिम्स सेंड करते हैं, क्योंकि इनसे कहा जाता है कि जितना ज़्यादा पैसा डालेंगे ट्रेडिंग के ज़रिए अमाउंट उतना बढ़ेगा. धीरे धीरे विक्टिम्स हज़ार से लाख रुपये तक भेज देते हैं.

अब शुरू होता है डर का खेल…

मैंने कुछ ऐसे विक्टिम्स से बात की है जिन्होंने 40 लाख रुपये तक डाल दिए. लेकिन जब विक्टिम उन पैसों को अपने बैंक अकाउंट में  सेंड करने को कहते हैं, तब स्कैमर्स उन्हें कहते हैं कि अभी और टास्क कंपलीट करना है तो ही पैसे बैंक अकाउंट में मिलेंगे.

जिन विक्टिम्स के अपने पैसे ख़त्म हो जाते हैं वो अपने दोस्तों रिश्तेदारों से क़र्ज़ ले लेते हैं. क्योंकि उन्हें कहा जाता है कि और पैसे नहीं डाले तो उनका पैसा फ़्रीज़ हो जाएगा.

चूँकि विक्टिम्स ने अब तक लाखों रुपये डाल दिए हैं, इसलिए वो स्कैमर्स की बात मानते चले जाते हैं, ये सोच कर की अगर उनकी बात ना मानी तो पैसे बैंक अकाउंट में नहीं आएँगे.

पैसा ना होने की वजह से इसने अपने दोस्तों से कुछ पैसे उधार मांग कर जमा कराया. इसका स्क्रीनशॉट भेज कर अपने पैसे मांगे. 

कई लाख रुपये डालने के बाद भी जब विक्टिम्स को लगातार और पैसे डाल कर टास्क कंपलीट करने को कहा जाता है, तब उन्हें लगता है कि उनके साथ ग़लत हो रहा है. इसके बाद शुरू होता है साइबर सेल और पुलिस में शिकायत करने का दौर…

पुलिस और साइबर सेल में शिकायत के बाद भी कोई सल्यूशन नहीं मिला…

अब इन लोगों ने साइबर सेल में शिकायत की है. लेकिन अब तक इनमें से किसी को पैसे वापस नहीं मिले हैं. इनका कहना है कि पुलिस कह रही है कि अभी जांच कर रहे हैं. हालाँकि इन विक्टिम्स के मुताबिक़ पुसिल ने FIR नहीं लिखी, ब्लिंक इन्हें कहा गया कि ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएँ.

अब ये सभी विक्टिम्स परेशान हैं, क्योंकि इनमें से ज़्यादातर क़र्ज़ में डूब चुके हैं. इनमें से कुछ ने बताया कि उनके पिता मज़दूरी करते हैं. जबकि कुछ लोग अच्छी कंपनियों में जॉब भी करते हैं.

कई विक्टिम्स ने ये भी कहा कि उनकी सारी जमा पूँजी ख़त्म हो गई और ऊपर से वो क़र्ज़ में डूब चुके हैं.

हमने जितने भी विक्टिम्स से बात की है उन्होंने बताया कि फ्रॉड्स उन्हें इन बैंक्स के अकाउंट देते हैं जिसमें पैसा भेजा जाता है. ये अकाउंट ज्यादातर किसी कंपनी के नाम से रजिस्टर होते हैं.  Yes Bank, ICICI Bank, HDFC Bank, IDFC Bank, Axis Bank और Canera Bak.

विक्टिम्स को बैंक्स से भी है शिकायत…

इन विक्टिम्स का कहना है कि बैंक्स हर दिन इतने बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन को नोटिस नहीं करते क्या? बैंक को रिक्वेस्ट करने के बाद भी ये बैंक्स फ्रॉड्स का अकाउंट फ्रीज नहीं करते? क्या इस स्कैम में बैंक के भी लोग मिले हुए हैं?

Telegram पर बेचे जा रहे बैंक अकाउंट्स…

विक्टिम्स का कहना है कि टेलीग्राम ग्रुप पर बैंक अकाउंट्स भी बिक्री के लिए लगाए जा रहे हैं.

स्कैमर्स का अड्डा बन रहा है Telegram…

WhatsApp ग्रुप में अगर किसी को ऐड किया जाता है तो उसे सभी मेंबर्स के फोन नंबर दिखते हैं.

लेकिन Telegram में प्राइवेसी की वजह से उस ग्रुप के किसी मेंबर का फोन नंबर नहीं दिखता. यहां तक की 1-1 टेलीग्राम चैट्स भी बिना नंबर दिखाए ही की जा सकती हैं. 

स्कैमर्स इसका फायदा उठाते हैं और नंबर ना दिखने की वजह से उन्हें ट्रेस कर पाना पुलिस के लिए भी मुश्किल होता है. टेलीग्राम में पर्सनल और ग्रुप चैट्स से दोनों तरफ के मैसेज डिलीट करने का भी फीचर होता है. सेंडर और रिसीवर दोनों का ही मैसेज कोई डिलीट कर सकता है. 

स्कैमर्स डिलीट मैसेज का फायदा उठा कर ट्रेस होने से बच जाते हैं. हालांकि बैंक अकाउंट से पुलिस स्कैमर्स को ट्रेस कर सकती है, क्योंकि किसी बैंक में बिना किसी वैलिड आईडी के अकाउंट नहीं खोला जा सकता है.

कुछ सवाल...

सरकार और पुलिस को इस तरह स्कैम को गंभीरता से लेने की जरूरत है. क्योंकि ये कोई आम स्कैम नहीं है, यहां स्कैमर्स बड़ी बड़ी कंपनियों के पूर्व कर्मचारी हैं और वो इस तरह से स्कैम डिजाइन कर रहे हैं कि कोई भी इसके झांसे में आ सकता है. 

टेलीग्राम ग्रुप पर ट्रेस भले ना मिले, लेकिन बैंक अकाउंट को फ्रीज किया जा सकता है. जिन बैंक अकाउंट पर लोगों ने केस दर्ज किए हैं उन्हें ट्रेस करके साइबर क्रिमिनल्स को पकड़ना चाहिए. 

कौन चला रहा है ये स्कैम?

इसी साल जनवरी में पुलिस ने Work From Home स्कैमर्स को अरेस्ट किया था. तीन लोग कस्टडी में लिए गए और जांच में पता चला कि इस स्कैम में पेटीएम का एक पूर्व डिप्टी मैनेजर भी शामिल था जो स्कैमर्स को फिनांशियल फ्रॉड्स में मदद कर रहा था. पुलिस ने बताया था कि इस स्कैम का मुख्य आरोपी जॉर्जिया बेस्ड है. हालांकि ये नेक्सस भारत के चंडीगढ़, मुंबई, हरियाना, दिल्ली और पंजाब से चलाया जा रहा है.

ये स्कैम काफी सॉफेस्टिकेटेड है और इसमें शामिल ज्यादातर लोग काफी एजुकेटेड हैं. मुमकिन है इन्हें कोडिंग से लेकर सोशल इंजीनियरिंग पर काफी कमांड है. इसी वजह से ये पूरा स्कैम ऐसा डिजाइन कर रहे हैैं कि कोई भी इनके झांसे में आसानी से आ जाए.

 

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